14 अक्टूबर 2026
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इंडिया ब्लॉक की दिल्ली रैली के बाद महुआ माजी बोलीं — सुप्रीम कोर्ट जाना अंतिम विकल्प, वोट चोरी पर लड़ाई जारी

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इंडिया ब्लॉक की दिल्ली रैली के बाद महुआ माजी बोलीं — सुप्रीम कोर्ट जाना अंतिम विकल्प, वोट चोरी पर लड़ाई जारी

सारांश

इंडिया ब्लॉक की दिल्ली रैली महज़ विरोध प्रदर्शन नहीं थी — यह एक रणनीतिक संकेत था। जेएमएम सांसद महुआ माजी का सुप्रीम कोर्ट को 'अंतिम गुहार' बताना दर्शाता है कि विपक्ष संसदीय और सड़क माध्यमों के बाद अब न्यायपालिका का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

जेएमएम सांसद महुआ माजी ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि सर्वोच्च न्यायालय जाना इंडिया ब्लॉक की अंतिम गुहार है।
झारखंड CM हेमंत सोरेन माँ के निधन के कारण रैली में नहीं आ सके; माजी को उनका प्रतिनिधि भेजा गया।
भूपेश बघेल ने दावा किया कि रैली ने जनता का भय समाप्त किया; BJP RSS पर डराने का आरोप।
दीपक बैज ने माँग की — चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाएँ, बैलेट पेपर से चुनाव कराएँ।
योगेंद्र यादव ने कहा — युवाओं, किसानों और मज़दूरों की भागीदारी से यह अब जन आंदोलन बन चुका है।

इंडिया ब्लॉक की नई दिल्ली में आयोजित विशाल रैली और हाई टी बैठक के बाद विपक्षी दलों ने 13 अक्टूबर 2026 को एकजुट होकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले बोले। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने स्पष्ट कहा कि जब लोकतंत्र के सभी दरवाज़े बंद हो जाते हैं, तो जनता के पास सर्वोच्च न्यायालय के पास जाना ही अंतिम गुहार बचती है।

महुआ माजी का बयान और जेएमएम का रुख

महुआ माजी ने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें इंडिया गठबंधन का प्रतिनिधित्व करने के लिए विशेष रूप से भेजा है, क्योंकि उनकी माँ के निधन के कारण वे स्वयं रैली में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने कहा, "हाई टी में कुछ भी निर्णय लिया जाता है तो इस संबंध में मैं अपनी पार्टी से बात करूंगी और जैसा कहा जाएगा वैसा हम करेंगे।"

माजी ने रैली में हुई कथित धक्का मुक्की के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि जब लाखों लोग सीमित सड़कों पर एकत्र होते हैं, तो भीड़ का दबाव स्वाभाविक है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) वोट चोरी के मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर ऐसे आरोप लगा रही है।

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

महुआ माजी ने रेखांकित किया कि इंडिया ब्लॉक ने पहले राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, संसद में मुद्दा उठाने की कोशिश की और अब सड़क पर उतरा है। उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियाँ नहीं बदलतीं, तो सर्वोच्च न्यायालय जाना ही एकमात्र बचा हुआ रास्ता है। गौरतलब है कि विपक्ष की यह रणनीति उन स्थितियों में सामने आई है जब संसदीय और कार्यपालिका माध्यमों से राहत न मिलने का दावा किया जा रहा है।

अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सोमवार की रैली ने जनता के भय को समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और कथित तौर पर BJP व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोग डराने धमकाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रैली की सफलता के बाद वे शांत हो गए।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि लाखों लोग सड़क पर उतरे और यह रैली मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने माँग की कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए और बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएँ।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाली गई यह रैली केवल पार्टी लाइन से परे सभी वर्गों को एकजुट करने वाली थी। राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार तानाशाही रवैया अपनाती रहेगी, विपक्ष सड़कों पर डटा रहेगा।

जन आंदोलन का विस्तार

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि यह आंदोलन अब किसी एक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं रहा — यह सच्चे अर्थों में जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि युवाओं और छात्रों के साथ साथ किसान, मजदूर और नागरिक अधिकार संगठन भी इससे जुड़ रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है और इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चाएँ होती रही हैं। आने वाले दिनों में गठबंधन की अगली रणनीति और सर्वोच्च न्यायालय में संभावित याचिका दायर करने पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

किस आधार पर और कौन दाखिल करेगा, यह अभी तक अस्पष्ट है। रैली की भव्यता असंदिग्ध है, लेकिन इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच समन्वय हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है — माजी का 'पार्टी आलाकमान से पूछकर बताऊंगी' वाला जवाब इसी आंतरिक दबाव को उजागर करता है। वोट चोरी के आरोप गंभीर हैं और इन पर स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है; महज़ रैली और बयानबाज़ी से संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महुआ माजी ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात क्यों कही?
महुआ माजी का कहना है कि इंडिया ब्लॉक पहले राष्ट्रपति को ज्ञापन दे चुका है, संसद में मुद्दा उठा चुका है और अब सड़क पर उतरा है। उनके अनुसार यदि इन सभी माध्यमों से स्थिति नहीं बदलती, तो सर्वोच्च न्यायालय जाना ही एकमात्र शेष विकल्प है।
इंडिया ब्लॉक की दिल्ली रैली किस मुद्दे पर थी?
यह रैली मुख्यतः कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ थी। विपक्ष ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग भी रखी।
हेमंत सोरेन रैली में क्यों नहीं आए?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ का निधन हो जाने के कारण वे रैली में शामिल नहीं हो सके। उनकी जगह जेएमएम सांसद महुआ माजी ने गठबंधन का प्रतिनिधित्व किया।
BJP ने रैली पर क्या आरोप लगाए?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, BJP ने रैली में धक्का मुक्की की घटनाओं को मुद्दा बनाने की कोशिश की। महुआ माजी ने इसे वोट चोरी के असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।
योगेंद्र यादव ने इस आंदोलन को जन आंदोलन क्यों कहा?
स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव का कहना है कि इस आंदोलन में युवाओं और छात्रों के अलावा किसान, मजदूर और नागरिक अधिकार संगठन भी जुड़ रहे हैं। इसलिए यह अब किसी एक दल या विचारधारा तक सीमित न रहकर वास्तविक जन आंदोलन बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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