इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट मार्च 'असंवैधानिक' और 'अवैध': BJP सांसद बसवराज बोम्मई
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद बसवराज बोम्मई ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाला गया मार्च पूरी तरह 'असंवैधानिक', 'अवैध' और 'लोकतंत्र विरोधी' है। उनके अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके सहयोगी दल न्यायपालिका पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मार्च पर बोम्मई की आपत्ति
एक प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिये बोम्मई ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में जारी है। उनका तर्क था कि जब न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो, तब उस अदालत पर बाहरी दबाव बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक भी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह 'राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण' मार्च भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध विद्रोह भड़काने की दिशा में पहला कदम प्रतीत होता है। उन्होंने देश के सभी नागरिकों से इस प्रवृत्ति का 'पूरी ताकत से कड़ा विरोध' करने की अपील की।
कांग्रेस पर सीधा हमला
बोम्मई ने गहरा खेद जताते हुए कहा कि लगभग 60 वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी आज इस स्तर तक 'गिर' गई है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं।
SC/ST आरक्षण पर बड़ा बयान
बोम्मई ने एक अलग लेकिन महत्त्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कर्नाटक राज्य सरकार से माँग की कि वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) आरक्षण में बढ़ोतरी को रद्द करने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए तत्काल सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उनकी सरकार ने यह आरक्षण बढ़ाया था, तो वह न्यायमूर्ति नागमोहन दास समिति की रिपोर्ट के आधार पर और राज्य विधानसभा के दोनों सदनों में विधिवत कानून पारित करके किया गया था। उन्होंने कहा कि संविधान SC/ST समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की अनुमति देता है, इसलिए यह कदम संवैधानिक था।
PIL दायर करने वालों पर आरोप
बोम्मई ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने वालों ने SC/ST समुदायों के विकास का विरोध करने के उद्देश्य से ऐसा किया। उन्होंने माँग की कि कर्नाटक सरकार इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ज़रूर ले जाए, और चेतावनी दी कि यदि सरकार निष्क्रिय रही तो वे स्वयं इस मुद्दे को शीर्ष अदालत में उठाएँगे।
आगे क्या होगा
बोम्मई के इस बयान से कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर दोहरा दबाव पड़ने की संभावना है — एक तरफ SC/ST आरक्षण मामले में कानूनी कार्यवाही की माँग और दूसरी तरफ इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर तीखी राजनीतिक बहस। गौरतलब है कि चुनाव आयोग से जुड़े मामले और राज्यों में आरक्षण की राजनीति दोनों ही आगामी समय में न्यायिक और राजनीतिक दृष्टि से निर्णायक साबित हो सकते हैं।