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इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट मार्च 'असंवैधानिक' और 'अवैध': BJP सांसद बसवराज बोम्मई

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इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट मार्च 'असंवैधानिक' और 'अवैध': BJP सांसद बसवराज बोम्मई

सारांश

BJP सांसद बसवराज बोम्मई ने इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च को 'असंवैधानिक' और 'न्यायपालिका विरोधी' करार दिया। साथ ही SC/ST आरक्षण पर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सरकार को अल्टीमेटम दिया — अन्यथा वे खुद अदालत जाएँगे।

मुख्य बातें

BJP सांसद बसवराज बोम्मई ने 12 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च को 'असंवैधानिक', 'अवैध' और 'लोकतंत्र विरोधी' बताया।
बोम्मई के अनुसार CEC और SIR से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, इसलिए यह मार्च न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला है।
उन्होंने कर्नाटक सरकार को SC/ST आरक्षण बढ़ोतरी रद्द करने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की माँग की।
न्यायमूर्ति नागमोहन दास समिति की रिपोर्ट और विधानसभा के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद उनकी सरकार ने आरक्षण बढ़ाया था।
सरकार की निष्क्रियता पर बोम्मई ने चेतावनी दी कि वे स्वयं इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाएँगे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद बसवराज बोम्मई ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाला गया मार्च पूरी तरह 'असंवैधानिक', 'अवैध' और 'लोकतंत्र विरोधी' है। उनके अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके सहयोगी दल न्यायपालिका पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मार्च पर बोम्मई की आपत्ति

एक प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिये बोम्मई ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में जारी है। उनका तर्क था कि जब न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो, तब उस अदालत पर बाहरी दबाव बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक भी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह 'राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण' मार्च भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध विद्रोह भड़काने की दिशा में पहला कदम प्रतीत होता है। उन्होंने देश के सभी नागरिकों से इस प्रवृत्ति का 'पूरी ताकत से कड़ा विरोध' करने की अपील की।

कांग्रेस पर सीधा हमला

बोम्मई ने गहरा खेद जताते हुए कहा कि लगभग 60 वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी आज इस स्तर तक 'गिर' गई है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं।

SC/ST आरक्षण पर बड़ा बयान

बोम्मई ने एक अलग लेकिन महत्त्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कर्नाटक राज्य सरकार से माँग की कि वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) आरक्षण में बढ़ोतरी को रद्द करने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए तत्काल सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उनकी सरकार ने यह आरक्षण बढ़ाया था, तो वह न्यायमूर्ति नागमोहन दास समिति की रिपोर्ट के आधार पर और राज्य विधानसभा के दोनों सदनों में विधिवत कानून पारित करके किया गया था। उन्होंने कहा कि संविधान SC/ST समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की अनुमति देता है, इसलिए यह कदम संवैधानिक था।

PIL दायर करने वालों पर आरोप

बोम्मई ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने वालों ने SC/ST समुदायों के विकास का विरोध करने के उद्देश्य से ऐसा किया। उन्होंने माँग की कि कर्नाटक सरकार इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ज़रूर ले जाए, और चेतावनी दी कि यदि सरकार निष्क्रिय रही तो वे स्वयं इस मुद्दे को शीर्ष अदालत में उठाएँगे।

आगे क्या होगा

बोम्मई के इस बयान से कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर दोहरा दबाव पड़ने की संभावना है — एक तरफ SC/ST आरक्षण मामले में कानूनी कार्यवाही की माँग और दूसरी तरफ इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर तीखी राजनीतिक बहस। गौरतलब है कि चुनाव आयोग से जुड़े मामले और राज्यों में आरक्षण की राजनीति दोनों ही आगामी समय में न्यायिक और राजनीतिक दृष्टि से निर्णायक साबित हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष की न्यायिक रणनीति को 'असंवैधानिक' ठहराना; और दूसरा, SC/ST आरक्षण के मुद्दे पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करना। दिलचस्प यह है कि बोम्मई खुद भी न्यायपालिका से राहत माँगने की बात कर रहे हैं — यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने को 'अवैध' बताना और खुद उसी दरवाज़े की धमकी देना एक विरोधाभास उजागर करता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अनदेखा कर देती है। SC/ST आरक्षण का मुद्दा कर्नाटक में दलित राजनीति की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले यह दोनों पार्टियों के लिए बड़ा दाँव बन सकता है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसवराज बोम्मई ने इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च को 'असंवैधानिक' क्यों कहा?
बोम्मई का तर्क है कि CEC और SIR से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, इसलिए न्यायालय पर बाहरी राजनीतिक दबाव बनाना न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। उन्होंने इसे 'राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण' कदम बताया।
इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट मार्च क्या था?
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और संबंधित न्यायिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर एक मार्च निकाला। BJP और उसके नेताओं ने इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
कर्नाटक में SC/ST आरक्षण बढ़ोतरी का मामला क्या है?
बोम्मई की सरकार ने न्यायमूर्ति नागमोहन दास समिति की सिफारिशों और विधानसभा के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद SC/ST आरक्षण में वृद्धि की थी। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक PIL पर सुनवाई करते हुए इस बढ़ोतरी को रद्द कर दिया, जिसके बाद बोम्मई ने मौजूदा राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की माँग की है।
बोम्मई ने कर्नाटक सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया?
बोम्मई ने माँग की कि कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार SC/ST आरक्षण मामले में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर करे। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार के निष्क्रिय रहने पर वे खुद इस मामले को शीर्ष अदालत तक ले जाएँगे।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह बयान कर्नाटक में दलित और आदिवासी मतदाताओं के बीच कांग्रेस सरकार को घेरने की BJP की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। SC/ST आरक्षण कर्नाटक में एक संवेदनशील और निर्णायक चुनावी मुद्दा है, और यह मामला आने वाले समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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