12 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट मार्च पर BJP नेता प्रतुल शाहदेव बोले — 'कांग्रेस पर अवमानना का मुकदमा चलना चाहिए'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट मार्च पर BJP नेता प्रतुल शाहदेव बोले — 'कांग्रेस पर अवमानना का मुकदमा चलना चाहिए'

सारांश

CJI द्वारा 'इंडिया' गठबंधन की मुलाकात अपील नामंजूर होने के बाद कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान और BJP की जवाबी माँग — कि अवमानना का मुकदमा चले — न्यायपालिका बनाम राजनीति की नई बहस छेड़ रहा है।

मुख्य बातें

BJP नेता प्रतुल शाहदेव ने 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च को 'घेराव' करार दिया।
शाहदेव ने माँग की कि मार्च में शामिल होने वालों पर न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चलाया जाए।
CJI ने 'इंडिया' गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात की अपील अस्वीकार कर दी; कहा — शिकायत हो तो याचिका दायर करें।
BJP नेता विनुशा रेड्डी के अनुसार CJP के तीन नेताओं — अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका — को शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर के बाद जमानत मिली।
तीनों नेताओं ने कथित तौर पर एक वर्ष तक शांति भंग न करने का वचन दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रतुल शाहदेव ने 12 अक्टूबर 2026 को रांची में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार कोई राजनीतिक दल सर्वोच्च न्यायालय का घेराव करने की कोशिश कर रहा है, और ऐसा करने वालों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने 'इंडिया' गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात की अपील को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने देश भर से अपने विधायकों, सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और राज्य व राष्ट्रीय पदाधिकारियों को बुलाकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की घोषणा की।

शाहदेव ने कहा, 'मार्च' तो महज एक लेबल है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में नेताओं को दिल्ली बुलाना स्पष्ट रूप से संवैधानिक संस्था पर दबाव बनाने की कोशिश है।

BJP का रुख और आरोप

प्रतुल शाहदेव ने अपने बयान में कहा, 'पहले कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त का घेराव किया और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। उसी विरोध प्रदर्शन के दौरान वे आकाशवाणी का भी घेराव करने पहुँच गए, मानो वे प्रसारण निगम पर कब्जा करना चाहते हों।' उन्होंने माँग की कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ 'विधि सम्मत कार्रवाई' की जाए।

शाहदेव ने यह भी कहा कि CJI की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसी राजनीतिक दल को मुलाकात देना उचित नहीं है और यदि कोई शिकायत है तो याचिका दाखिल की जाए — जिस पर सुनवाई पहले से जारी है। उनके अनुसार, विचाराधीन मामले पर दबाव बनाने के लिए न्यायालय का घेराव करना अवमानना के दायरे में आता है।

सीजेपी नेताओं को जमानत

इस बीच, BJP नेता विनुशा रेड्डी ने बताया कि सीजेपी (CJP) के तीन नेताओं — अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका — को शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद जमानत दी गई है। रेड्डी के अनुसार, तीनों ने कथित तौर पर एक अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें वचन दिया गया है कि वे एक वर्ष तक शांति भंग करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

सरकार और न्यायपालिका की भूमिका

गौरतलब है कि भारत में किसी राजनीतिक दल द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को इस प्रकार घेरने की कोशिश की कोई स्थापित मिसाल नहीं है। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायालय में विचाराधीन किसी मामले पर सार्वजनिक दबाव बनाना न्यायिक स्वतंत्रता की दृष्टि से संवेदनशील प्रश्न खड़े करता है। CJI का यह रुख — कि शिकायत हो तो याचिका के माध्यम से आएं — संस्थागत प्रोटोकॉल के अनुरूप बताया जा रहा है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन का यह मार्च राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है। दिल्ली पुलिस की भूमिका, मार्च को अनुमति मिलती है या नहीं, और न्यायालय की प्रतिक्रिया — ये तीनों पहलू आने वाले दिनों में निर्णायक होंगे। यह विवाद न्यायपालिका और राजनीतिक दलों के बीच की सीमा-रेखा को एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए जोखिम भरा है। CJI का याचिका-मार्ग सुझाना संस्थागत रूप से सही है, लेकिन BJP की 'अवमानना मुकदमे' की माँग भी राजनीतिक रंग लिए हुए है — क्योंकि शांतिपूर्ण मार्च और न्यायालय की अवमानना के बीच की विधिक सीमा-रेखा स्पष्ट नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर विरोध की सीमाएँ अभी तक स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं — और यह घटना उस परिभाषा को स्थापित करने का अनचाहा अवसर बन सकती है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किस मुद्दे पर है?
कांग्रेस के नेतृत्व वाला 'इंडिया' गठबंधन एक विचाराधीन मामले को लेकर CJI से मुलाकात चाहता था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान किया, जिसमें देश भर से विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
CJI ने 'इंडिया' ब्लॉक की मुलाकात अपील क्यों अस्वीकार की?
CJI का रुख यह है कि वे सामान्यतः किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत है तो उचित माध्यम याचिका है, जिस पर न्यायालय में सुनवाई होती है।
BJP ने अवमानना मुकदमे की माँग क्यों उठाई?
BJP नेता प्रतुल शाहदेव का तर्क है कि न्यायालय में विचाराधीन मामले पर दबाव बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का घेराव करना न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। उनके अनुसार किसी भी राजनीतिक दल ने ऐसा पहले नहीं किया।
CJP नेताओं को जमानत कैसे और किस शर्त पर मिली?
CJP के तीन नेताओं — अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका — को शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर के बाद जमानत दी गई। कथित तौर पर उन्होंने एक अंडरटेकिंग दी है जिसमें एक वर्ष तक शांति भंग करने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहने का वचन है।
इस विवाद का न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर क्या असर पड़ सकता है?
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, विचाराधीन मामलों पर सार्वजनिक दबाव बनाना न्यायिक स्वतंत्रता के लिए संवेदनशील है। यह घटना सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर विरोध की विधिक सीमाओं को स्पष्ट करने का एक मिसाल-निर्माण अवसर बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले