भाजपा का राहुल गांधी पर हमला: सुप्रीम कोर्ट में मामला सब-ज्यूडिस, फिर सड़क पर दबाव क्यों — प्रदीप भंडारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया सह-संयोजक प्रदीप भंडारी ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके समर्थकों के राजघाट प्रदर्शन पर तीखे सवाल उठाए। भंडारी ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन (सब-ज्यूडिस) है, ऐसे में राहुल गांधी का सड़कों पर भीड़ एकत्र करना न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश है।
मुख्य आरोप: न्यायपालिका पर दबाव की राजनीति
भंडारी ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद देश के न्यायालयों में विश्वास रखने पर टिकी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले की अगली सुनवाई की तारीख दे चुका है, तब सड़क पर भीड़ जुटाने का एकमात्र उद्देश्य अदालत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है — जो, उनके अनुसार, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। भंडारी ने तीन सीधे सवाल राहुल गांधी से पूछे: क्या वे सर्वोच्च न्यायालय के प्रति अविश्वास जता रहे हैं? क्या वे अदालत को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं? और क्या उनका पक्ष कोर्ट में तथ्यों के आधार पर इतना कमजोर है कि बाहर से माहौल बनाना पड़ रहा है?
युवक के साथ दुर्व्यवहार पर कांग्रेस से जवाब माँगा
भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने जब अपनी बात कहने का प्रयास किया, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया और पीटने का प्रयास किया। उन्होंने इसे संविधान की उद्देशिका के पहले शब्दों — 'वी द पीपल ऑफ इंडिया' — का सीधा उल्लंघन बताया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा राहुल गांधी से इस घटना पर जवाब माँगा। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस तरह का हमला 'अपराध' की श्रेणी में आता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: ईवीएम और न्यायपालिका विवाद
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में कांग्रेस ने ईवीएम को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ न्यायालय ने उनके तर्कों को खारिज किया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी विफल हो गया था। भंडारी के अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का यह कांग्रेस का पुराना चलन है।
राज्यों में हार का हवाला, राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल
भंडारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 1977, बिहार में 1990, ओडिशा में 2000, आंध्र प्रदेश में 2014 और उत्तर प्रदेश में 1989 से कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब ये पराजय हुईं तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब वोट-चोरी का आरोप किस पर लगता? उनका कहना था कि कांग्रेस जनाधार खो चुकी है और अब 'अराजकता की टूलकिट' का सहारा ले रही है।
राजघाट यात्रा पर भाजपा की टिप्पणी
भंडारी ने राजघाट पर कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने स्वयं कहा था कि आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी को भंग कर देना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजघाट की यात्रा के बाद राहुल गांधी को 'सद्बुद्धि' मिलेगी और वे पिछले तीन दिनों की गतिविधियों के लिए देश की जनता से माफी माँगेंगे। भाजपा का स्पष्ट संदेश है कि न्यायपालिका का फैसला तथ्यों पर होगा, सड़क की भीड़ पर नहीं — और यही टकराव आगे भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।