15 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट परिसर में भीड़तंत्र नहीं चलेगा, राहुल गांधी अराजकता के प्रतीक: भाजपा

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सुप्रीम कोर्ट परिसर में भीड़तंत्र नहीं चलेगा, राहुल गांधी अराजकता के प्रतीक: भाजपा

सारांश

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी को 'अराजकता का प्रतीक' करार दिया और सर्वोच्च न्यायालय परिसर में प्रदर्शन को असंवैधानिक बताया। यह हमला उस दिन आया जब इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई — संसदीय विपक्ष के अधिकार और न्यायपालिका की गरिमा के बीच टकराव अब अदालत के दरवाज़े तक पहुँच गया है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने 15 अक्टूबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी को 'अराजकता का प्रतीक' बताया।
भाटिया ने आरोप लगाया कि 10 और 11 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की योजना बनाई गई थी।
भाजपा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में भीड़तंत्र के लिए कोई स्थान नहीं; प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
भाटिया ने राहुल गांधी के 'स्मैश द पैट्रिआर्की' नारे पर भी सवाल उठाए।
सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर गुरुवार को सुनवाई हुई, जिसमें भाटिया स्वयं वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पेश हुए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने 15 अक्टूबर 2026 को भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। भाटिया ने राहुल गांधी को 'अराजकता का प्रतीक' करार देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय न्याय का मंदिर है और उसके परिसर में भीड़तंत्र के लिए कोई स्थान नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियाँ तथ्यों पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि वे गुरुवार को स्वयं एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में सर्वोच्च न्यायालय में उस सुनवाई में पेश हुए, जो विपक्षी नेताओं के अदालत परिसर के समीप प्रदर्शन और न्यायपालिका की गरिमा से जुड़े मुद्दे पर आयोजित थी। उनके अनुसार, 10 और 11 अक्टूबर को कांग्रेस एवं राहुल गांधी की ओर से सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की बात कही गई थी।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि देश के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेता प्रतिपक्ष का पद एक ऐसे व्यक्ति के पास है जो उनके अनुसार 'अपरिपक्व, गैर-जिम्मेदार और संविधान की समझ से अनभिज्ञ' है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस वक्त आई जब सर्वोच्च न्यायालय में इसी मसले पर सुनवाई चल रही थी।

संवैधानिक अधिकार बनाम संस्थाओं की गरिमा

भाटिया ने स्वीकार किया कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार देता है। हालाँकि, उन्होंने तर्क दिया कि इस अधिकार की सीमाएँ हैं — प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल होते हैं और उसके लिए संबंधित अधिकारियों से पूर्व अनुमति आवश्यक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संवैधानिक अधिकारों की आड़ में किसी भी स्थान पर नारेबाजी या हंगामा किया जा सकता है। भाटिया का कहना था कि संविधान में मिले अधिकारों का उपयोग संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।

महिला सम्मान पर भाजपा का प्रश्न

भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के 'स्मैश द पैट्रिआर्की' अर्थात पितृसत्ता को समाप्त करने के नारे का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या महिलाओं के सम्मान की बात केवल गांधी परिवार की महिलाओं तक सीमित है? उन्होंने इसे एक 'महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न' बताया।

सरकार और भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा का यह हमला उस पृष्ठभूमि में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय परिसर के आसपास विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन को लेकर न्यायपालिका की गरिमा का मसला एक बड़े विमर्श का रूप ले चुका है। भाटिया ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, किंतु इसका उपयोग कानून, संविधान और न्यायपालिका को चुनौती देने के लिए नहीं किया जा सकता।

क्या होगा आगे

यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर विचाराधीन है और आने वाले दिनों में इस पर और सुनवाई संभावित है। आलोचकों का कहना है कि यह विवाद संसदीय विपक्ष के अधिकारों और न्यायपालिका की स्वायत्तता के बीच की महीन रेखा को रेखांकित करता है — एक ऐसा प्रश्न जिसका उत्तर केवल अदालत ही तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह सरकार की ओर से एक राजनीतिक आख्यान स्थापित करने की कोशिश है। न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा का तर्क तब और जटिल हो जाता है जब सत्तारूढ़ दल के नेता स्वयं वकील की भूमिका में भी हों और प्रवक्ता की भूमिका में भी। मुख्यधारा की कवरेज इस द्वंद्व को प्रायः नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा ने राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट को लेकर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने 10 और 11 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की योजना बनाई, जो न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है। उन्होंने राहुल गांधी को 'अपरिपक्व, गैर-जिम्मेदार और संविधान की समझ से अनभिज्ञ' नेता बताया।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई कब हुई?
विपक्षी नेताओं के सर्वोच्च न्यायालय परिसर के निकट प्रदर्शन और अदालत की गरिमा से जुड़े मुद्दे पर 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई। गौरव भाटिया इस सुनवाई में स्वयं वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
क्या प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार नहीं है?
भाजपा ने यह माना कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस अधिकार की सीमाएँ हैं। प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों का उपयोग करना और पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है; न्यायपालिका के परिसर में नारेबाजी या हंगामे को संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन बताया गया।
भाजपा ने राहुल गांधी के 'स्मैश द पैट्रिआर्की' नारे पर क्या कहा?
गौरव भाटिया ने सवाल उठाया कि क्या महिला सम्मान की बात केवल गांधी परिवार की महिलाओं तक सीमित है। उन्होंने इसे एक 'महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न' बताया, हालाँकि उन्होंने इस संदर्भ में किसी विशेष घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।
इस विवाद का आगे क्या होगा?
यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और आगे और सुनवाई होना संभावित है। भाजपा ने संसदीय विपक्ष के प्रदर्शन अधिकार और न्यायपालिका की गरिमा के बीच की सीमा को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस को नई धार दी है।
राष्ट्र प्रेस
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