एमएमडीआर एक्ट पर BJP नेता प्रतुल शाहदेव बोले — झारखंड सरकार के पास कोई विकल्प नहीं, सर्वोच्च न्यायालय जाएं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता प्रतुल शाहदेव ने 2 अक्टूबर 2026 को रांची में तीन अहम मुद्दों — एमएमडीआर एक्ट, झारखंड को तीन महीने में नक्सल-मुक्त बनाने के लक्ष्य और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पेपर लीक विवाद — पर तीखी प्रतिक्रिया दी। शाहदेव ने स्पष्ट कहा कि एमएमडीआर संशोधन पर झारखंड सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है — अगर आपत्ति है तो सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएं।
एमएमडीआर एक्ट पर सरकार की स्थिति
शाहदेव ने कहा, 'देश संविधान, कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर चलता है। यह साफ हो गया है कि मेजर मिनरल केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है।' उन्होंने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जैसे ही केंद्र या संसद इस विषय पर कानून बना लेगी, राज्य सरकार का शेष-राशि लेने का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि संसद ने कानून बना लिया है, इसलिए अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की आपत्ति निराधार है। शाहदेव के अनुसार, 'एमएमडीआर एक्ट में अवैध खनन के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। झारखंड में एक समांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है, जो अवैध खनन पर टिकी है।' उन्होंने तर्क दिया कि अवैध खनन ने राज्य में 'संस्थागत रूप' ले लिया है।
नक्सल उन्मूलन अभियान पर प्रतिक्रिया
झारखंड को तीन महीने में नक्सल-मुक्त बनाने के लक्ष्य पर शाहदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सल-विरोधी अभियान निरंतर जारी है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और दंतेवाड़ा तथा बस्तर जैसे इलाकों में 'पूर्ण रूप से अमन-चैन स्थापित हो गया है।' झारखंड पुलिस द्वारा शेष बचे नक्सली कमांडरों को निष्क्रिय करने के कदम का उन्होंने स्वागत किया।
गौरतलब है कि झारखंड उन राज्यों में शामिल रहा है जहाँ माओवादी प्रभाव ऐतिहासिक रूप से केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। बस्तर और दंतेवाड़ा में सफलताओं के बाद अब ध्यान झारखंड के शेष प्रभावित इलाकों पर है।
जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक विवाद
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल प्रवेश परीक्षा पर शाहदेव ने राज्य सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में पेपर लीक के आरोपों को सरकार ने नकारा, लेकिन छात्रों के दबाव में सीआईडी जांच के आदेश दिए। उस समय सीआईडी ने पेपर लीक से इनकार किया था।
शाहदेव ने सवाल उठाया, 'डेढ़ वर्ष बाद उसी मामले में सीआईडी की ओर से कहा जा रहा है कि बड़ा पेपर लीक का मामला था — सीआईडी का रंग कैसे बदल गया?' उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के सपनों को इस विवाद ने चकनाचूर कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग देशभर में तेज़ हो रही है।
विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक संदर्भ
शाहदेव के इन बयानों को BJP की उस व्यापक रणनीति के तहत देखा जा सकता है, जिसमें वह झारखंड की JMM-कांग्रेस गठबंधन सरकार पर खनन भ्रष्टाचार, छात्र-विरोधी नीतियों और नक्सल प्रबंधन में विफलता के आरोप लगाती रही है। एमएमडीआर मुद्दे पर झारखंड सरकार केंद्र के फैसले को राज्य के राजस्व अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि BJP इसे अवैध खनन पर लगाम के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि झारखंड सरकार एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में जाती है या नहीं — और सीजीएल पेपर लीक जांच का दायरा किस दिशा में बढ़ता है।