3 जुलाई 2026
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नरेगल हिंसा की एसआईटी जांच हो, हावेरी एसपी पर गिरे गाज: बसवराज बोम्मई

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नरेगल हिंसा की एसआईटी जांच हो, हावेरी एसपी पर गिरे गाज: बसवराज बोम्मई

सारांश

नरेगल हिंसा पर BJP सांसद बसवराज बोम्मई का तीखा हमला — एसआईटी जांच, हावेरी एसपी पर कार्रवाई और हंगल पुलिस अधिकारियों के निलंबन की माँग। उनका दावा है कि पिछले एक साल में यह जिले की सातवीं-आठवीं सांप्रदायिक घटना है और कांग्रेस सरकार तुष्टिकरण की आड़ में प्रशासनिक विफलता छिपा रही है।

मुख्य बातें

बसवराज बोम्मई ने 3 जुलाई को नरेगल गांव (हंगल तालुक, हावेरी) की सांप्रदायिक हिंसा की एसआईटी जांच की माँग की।
उन्होंने हावेरी एसपी पर कार्रवाई और हंगल सीपीआई व एसआई को तत्काल निलंबित करने की अपील की।
बोम्मई के अनुसार, पिछले एक वर्ष में हावेरी जिले में यह सातवीं-आठवीं सांप्रदायिक घटना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नरेगल, बोम्मनहल्ली और बंकापुर में कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए और केवल दो पुलिसकर्मियों वाला '112' वाहन भेजा गया।
कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति और हिंसाकर्ताओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
बोम्मई ने मामला मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और डीजीपी के समक्ष उठाने की घोषणा की।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बसवराज बोम्मई ने 3 जुलाई को हावेरी में पत्रकारों से बात करते हुए मांग की कि हावेरी जिले के हंगल तालुक के नरेगल गांव में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की जांच एक विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जाए। उन्होंने जिले में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह विफल बताते हुए हावेरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के विरुद्ध कार्रवाई और हंगल सर्किल पुलिस इंस्पेक्टर (सीपीआई) तथा सब-इंस्पेक्टर (एसआई) को तत्काल निलंबित करने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

हावेरी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले बोम्मई ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, पिछले एक वर्ष में हावेरी जिले में यह सातवीं या आठवीं सांप्रदायिक घटना है और नरेगल गांव पिछले तीन दशकों से बार-बार सांप्रदायिक तनाव का केंद्र रहा है।

उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए मस्जिद को अतिरिक्त भूमि आवंटित की गई थी, श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश मार्ग बनाया गया था और तत्कालीन उपायुक्त ने मुख्य सड़क सभी के लिए खुली रखने के आदेश जारी किए थे। बोम्मई का आरोप है कि पुलिस ने इन निर्णयों को लागू नहीं किया।

पुलिस पर गंभीर आरोप

बोम्मई ने एसपी द्वारा घटना को 'व्यक्तिगत विवाद' बताए जाने को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'जब किसी गांव में दो समुदायों के बीच टकराव होता है तो उसे व्यक्तिगत विवाद कैसे कहा जा सकता है?' उनका आरोप है कि पुलिस घटना की गंभीरता को कम करके दिखाने और सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि नरेगल, बोम्मनहल्ली और बंकापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए और ऐसी स्थिति में केवल दो पुलिसकर्मियों के साथ '112' पुलिस वाहन भेजना पर्याप्त नहीं था।

बोम्मई ने यह भी आरोप लगाया कि हंगल में गंभीर आपराधिक मामलों, आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े आरोपियों और सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को जमानत मिलने के बाद पुलिस सुरक्षा में जुलूस निकालने की अनुमति दी गई।

कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का सीधा आरोप लगाया। उनका कहना है कि हिंसा करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि पीड़ितों के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर पुलिस दोनों पक्षों के 20-20 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर देती है, जिससे न्याय नहीं मिलता।

हंगल के विधायक के उस आरोप का जवाब देते हुए कि BJP इस घटना का राजनीतिकरण कर रही है, बोम्मई ने कहा कि यदि यह वास्तव में निजी विवाद था तो पुलिस उसे सार्वजनिक करे, अन्यथा ऐसे बयान केवल प्रशासनिक विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति पर पर्दा डालने के लिए दिए जा रहे हैं।

आगे क्या होगा

बोम्मई ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने बताया कि वह पहले ही हावेरी एसपी से बात कर चुके हैं और एसआईटी जांच तथा स्थानीय पुलिस अधिकारियों के निलंबन की माँग दोहराई है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस राजनीतिक दबाव के बीच जांच के स्वरूप पर क्या निर्णय लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके कुछ सवाल प्रशासनिक जवाबदेही के नजरिए से वैध हैं — विशेषकर यह कि संवेदनशील क्षेत्र में केवल दो पुलिसकर्मी क्यों तैनात थे और पूर्व सरकार के आदेशों को लागू क्यों नहीं किया गया। हालांकि, यह भी गौर करने वाली बात है कि BJP खुद उस दौर में सत्ता में थी जब नरेगल में विवाद का 'स्थायी समाधान' निकाला गया था, फिर भी तनाव बना रहा। एसपी का 'व्यक्तिगत विवाद' वाला बयान यदि तथ्यों पर आधारित नहीं है तो वह जांच से बचने की कोशिश लग सकता है, और यदि आधारित है तो सरकार को पारदर्शिता से तथ्य सामने रखने चाहिए। निष्पक्ष एसआईटी जांच दोनों पक्षों के लिए — और सबसे बढ़कर प्रभावित नागरिकों के लिए — ही एकमात्र विश्वसनीय रास्ता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेगल सांप्रदायिक हिंसा क्या है और यह कहाँ हुई?
नरेगल हिंसा कर्नाटक के हावेरी जिले के हंगल तालुक के नरेगल गांव में हुई एक सांप्रदायिक घटना है। बसवराज बोम्मई के अनुसार, यह गांव पिछले तीन दशकों से बार-बार सांप्रदायिक तनाव का केंद्र रहा है।
बसवराज बोम्मई ने एसआईटी जांच की माँग क्यों की?
बोम्मई का कहना है कि जिला पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि पुलिस अधिकारी खुद घटना को 'व्यक्तिगत विवाद' बताकर उसकी गंभीरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, एसआईटी ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है।
हावेरी एसपी पर कार्रवाई की माँग किस आधार पर की गई है?
बोम्मई का आरोप है कि एसपी ने सांप्रदायिक हिंसा को 'व्यक्तिगत विवाद' बताकर मामले को दबाने की कोशिश की और संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त एहतियाती कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि केवल दो पुलिसकर्मियों वाला '112' वाहन भेजना कानून-व्यवस्था की घोर विफलता है।
क्या हावेरी जिले में पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
बोम्मई के अनुसार, पिछले एक वर्ष में हावेरी जिले में यह सातवीं या आठवीं सांप्रदायिक घटना है। नरेगल गांव में पिछले तीन दशकों से कई बार सांप्रदायिक तनाव देखा गया है।
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
बोम्मई ने घोषणा की है कि वह इस मामले को कर्नाटक के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष उठाएंगे। वह एसआईटी गठन और हंगल के सीपीआई व एसआई के निलंबन की माँग पर अड़े हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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