क्या बल्लारी हिंसा के निलंबित एसपी ने आत्महत्या की कोशिश की?
सारांश
Key Takeaways
- बल्लारी में हुई हिंसा से निलंबित एसपी ने आत्महत्या का प्रयास किया।
- भाजपा ने कांग्रेस सरकार को 'हत्यारी सरकार' कहा।
- पुलिस अधिकारियों पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
- कर्नाटक की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
- राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है।
बेंगलुरु, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के बल्लारी में 1 जनवरी को हुई हिंसा से संबंधित एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। हिंसा के बाद लापरवाही के आरोपों के तहत निलंबित पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया है। इस घटना के बाद भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए उसे "हत्यारी सरकार" कहा है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, निलंबित एसपी पवन नेज्जुर ने तुमकुरु जिले के सिरा तालुक में स्थित बरगुरु गांव में अपने एक मित्र के फार्महाउस पर नींद की गोलियां खा लीं। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती किया गया। सूत्रों के अनुसार, उपचार के बाद उनकी स्थिति स्थिर है और वे स्वस्थ हो रहे हैं।
बताया गया है कि बल्लारी में हुई हिंसा की घटना एसपी पवन नेज्जुर के कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों बाद हुई थी। पुलिस विभाग में 11 वर्षों की सेवा के बाद यह उनका पहला कार्यकारी पद था।
हालांकि उनके परिवार या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन विभागीय सूत्रों ने घटना की पुष्टि की है।
इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बेंगलुरु में कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार "हत्यारी सरकार" बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और यह सरकार भ्रष्ट और धोखेबाज है।
अशोक ने कहा कि बल्लारी में भाजपा विधायक जनार्दन रेड्डी के आवास के पास हुई गोलीबारी की घटना में एसपी को बलि का बकरा बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एसपी ने घटना से महज दो घंटे पहले कार्यभार संभाला था और किसी नए जिले को समझने में कम से कम 15-20 दिन लगते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि गोली कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा चलाई गई और उन्होंने अपने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की। अशोक के अनुसार, जनार्दन रेड्डी की हत्या की साजिश रची गई थी, लेकिन सरकार ने एसपी को निलंबित कर दिया।
उन्होंने बेंगलुरु भगदड़ कांड के बाद पुलिस आयुक्त के निलंबन का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों पर लगातार मानसिक दबाव डाला जा रहा है। अशोक ने आरोप लगाया कि पुलिस पदस्थापन कथित तौर पर पैसे देकर किए जा रहे हैं।
अशोक ने यह भी कहा कि बल्लारी में जनार्दन रेड्डी पर गोली चलाने की कोशिश हुई, लेकिन एसपी को यह कहकर निलंबित कर दिया गया कि विधायक भारत रेड्डी के गनमैन ने गोली चलाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने केवल हथियार जब्त किया और आरोपियों को राज्य से भागने दिया।
उन्होंने कहा कि आरोपी भाग जाने के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है और सरकारी दबाव के कारण अधिकारी आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। अशोक ने दावा किया कि अब तक 12 पुलिस अधिकारी आत्महत्या कर चुके हैं।
उन्होंने मांग की कि यदि एसपी को दो घंटे में निलंबित किया जा सकता है, तो ढाई साल से पद पर बैठे गृह मंत्री और मंत्री जमीर अहमद खान को भी निलंबित किया जाना चाहिए। अशोक ने कहा कि यह सरकार अधिकारियों को "आत्महत्या की गारंटी" दे रही है।
वहीं, कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने शुक्रवार रात कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि बल्लारी एसपी को लापरवाही के कारण निलंबित किया गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या अधिकारी को बलि का बकरा बनाया गया, तो उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान एसपी घटनास्थल पर नहीं पहुंचे।
पाटिल ने कहा, "ऐसे मामलों में एसपी से अपेक्षा की जाती है कि वह कार्यभार संभालने के 30 मिनट बाद भी घटनास्थल पर पहुंचे।"