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मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर हिमाचल में शोक, राजकीय सम्मान न मिलने पर BJP ने सरकार को घेरा

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मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर हिमाचल में शोक, राजकीय सम्मान न मिलने पर BJP ने सरकार को घेरा

सारांश

पाँच बार के विधायक और पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया के 88 वर्ष की उम्र में अचानक निधन से हिमाचल में शोक है — लेकिन असली विवाद राजकीय सम्मान न मिलने पर है, जिसे BJP ने सरकार की घोर लापरवाही बताया।

मुख्य बातें

मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 88 वर्ष की आयु में अचानक हार्ट अटैक से निधन; शाहपुर से पाँच बार विधायक और पूर्व मंत्री थे।
अंतिम संस्कार में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, किंतु पूर्ण राजकीय सम्मान नहीं मिला क्योंकि स्टेट फ्यूनरल अधिसूचित नहीं हुआ।
BJP विधायक सुधीर शर्मा ने राज्य सरकार के रवैये को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और परंपरा का हवाला दिया।
पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी ने मनकोटिया की BSP और BJP दोनों दलों में स्वीकार्यता को उनकी विशिष्टता बताया।
विवाद से हिमाचल प्रदेश सरकार पर प्रोटोकॉल प्रबंधन को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ा।

शाहपुर से पाँच बार विधायक और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन के बाद प्रदेश में शोक की लहर है। 88 वर्ष की आयु में अचानक हार्ट अटैक से हुए उनके निधन को राजनीतिक हलकों में अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। साथ ही उनके अंतिम संस्कार में राजकीय सम्मान न दिए जाने को लेकर राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठने लगे हैं।

नेताओं ने जताया गहरा शोक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुधीर शर्मा ने कहा, 'यह हिमाचल प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है — कांगड़ा जिले के लिए भी, क्योंकि वे शुरू से ही कांगड़ा की मुखर आवाज़ रहे हैं। उनका नेतृत्व ईमानदार रहा है। वह राजनेताओं की एक ऐसी पीढ़ी से थे, जिनके जैसे नेता अब कोई-कोई ही बचे हैं।'

शर्मा ने यह भी कहा कि मनकोटिया बिल्कुल स्वस्थ थे — चलते-फिरते ही ईश्वर की शरण में चले गए। उन्होंने बताया कि वे बचपन से, लगभग आठ वर्ष की उम्र से, उन्हें जानते थे।

राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल

सुधीर शर्मा ने सरकार के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि हमेशा से परंपरा रही है कि ऐसे पूर्व मंत्रियों को राजकीय सम्मान दिया जाता है, लेकिन न प्रशासन को और न ही प्रदेश सरकार को इसकी जानकारी थी। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार ऐसे मामलों में भी इस तरह का रवैया अपनाएगी तो इससे दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता।'

गौरतलब है कि प्रोटोकॉल के अनुसार राजकीय सम्मान तब दिया जाता है जब स्टेट फ्यूनरल आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया जाए। एक महिला अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री होने के नाते जो प्रावधान बनता है, उसके तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, किंतु पूर्ण राजकीय सम्मान के लिए अधिसूचना आवश्यक होती है जो इस बार जारी नहीं हुई।

सरवीन चौधरी की भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी ने कहा कि मनकोटिया ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) से भी चुनाव लड़ा और बाद में BJP में भी शामिल हुए, जो दर्शाता है कि उनकी स्वीकार्यता हर दल और हर वर्ग में थी। 'शाहपुर के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया।'

चौधरी ने बताया कि मनकोटिया नहा-धोकर भोजन ग्रहण कर रहे थे, तभी अचानक हार्ट अटैक आया। उन्होंने कहा, 'इस संसार से इस तरह जाना किसी नसीब वाले को ही नसीब होता है।' उन्होंने दिवंगत नेता के परिजनों के लिए शक्ति की कामना भी की।

मनकोटिया का राजनीतिक सफ़र

मेजर विजय सिंह मनकोटिया शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक रहे और हिमाचल सरकार में मंत्री पद भी सँभाला। कांगड़ा जिले की राजनीति में उनकी उपस्थिति दशकों तक बनी रही। उनके अचानक निधन से क्षेत्र में एक राजनीतिक रिक्तता महसूस की जा रही है।

आगे क्या होगा

राजकीय सम्मान विवाद ने राज्य सरकार पर प्रोटोकॉल प्रबंधन को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। BJP ने माँग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि अधिसूचना क्यों नहीं जारी की गई। यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अगले सत्र में भी उठाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह राजनीतिक संस्कृति के क्षरण का संकेत है। अधिसूचना की तकनीकी दलील देना तब कमज़ोर पड़ जाती है जब सरकार के पास पर्याप्त समय और जानकारी थी। यह मसला विधानसभा में उठेगा — और सरकार के लिए यह जवाब देना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेजर विजय सिंह मनकोटिया कौन थे?
मेजर विजय सिंह मनकोटिया हिमाचल प्रदेश के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक और राज्य सरकार में पूर्व मंत्री थे। वे कांगड़ा जिले की राजनीति में कई दशकों तक सक्रिय रहे और 88 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से उनका निधन हुआ।
मनकोटिया को राजकीय सम्मान क्यों नहीं मिला?
एक अधिकारी के अनुसार राजकीय सम्मान तब दिया जाता है जब स्टेट फ्यूनरल आधिकारिक रूप से अधिसूचित हो, जो इस बार नहीं हुआ। पूर्व मंत्री के दर्जे के प्रावधान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, लेकिन BJP ने इसे अपर्याप्त बताया।
BJP ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
BJP विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि न प्रशासन को और न राज्य सरकार को राजकीय सम्मान की परंपरा का ध्यान था। उन्होंने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और कहा कि पूर्व मंत्रियों को राजकीय सम्मान देना हमेशा से परंपरा रही है।
सरवीन चौधरी ने मनकोटिया के बारे में क्या कहा?
पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी ने कहा कि मनकोटिया ने BSP और BJP दोनों से चुनाव लड़ा, जो उनकी व्यापक राजनीतिक स्वीकार्यता दर्शाता है। उन्होंने बताया कि मनकोटिया बिना किसी तकलीफ के भोजन ग्रहण करते समय अचानक हार्ट अटैक से चले गए।
इस विवाद का आगे क्या असर होगा?
BJP ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा हिमाचल विधानसभा के अगले सत्र में उठाया जाएगा। इस विवाद ने राज्य सरकार पर प्रोटोकॉल और सम्मान प्रबंधन को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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