मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर हिमाचल में शोक, राजकीय सम्मान न मिलने पर BJP ने सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
शाहपुर से पाँच बार विधायक और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन के बाद प्रदेश में शोक की लहर है। 88 वर्ष की आयु में अचानक हार्ट अटैक से हुए उनके निधन को राजनीतिक हलकों में अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। साथ ही उनके अंतिम संस्कार में राजकीय सम्मान न दिए जाने को लेकर राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठने लगे हैं।
नेताओं ने जताया गहरा शोक
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुधीर शर्मा ने कहा, 'यह हिमाचल प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है — कांगड़ा जिले के लिए भी, क्योंकि वे शुरू से ही कांगड़ा की मुखर आवाज़ रहे हैं। उनका नेतृत्व ईमानदार रहा है। वह राजनेताओं की एक ऐसी पीढ़ी से थे, जिनके जैसे नेता अब कोई-कोई ही बचे हैं।'
शर्मा ने यह भी कहा कि मनकोटिया बिल्कुल स्वस्थ थे — चलते-फिरते ही ईश्वर की शरण में चले गए। उन्होंने बताया कि वे बचपन से, लगभग आठ वर्ष की उम्र से, उन्हें जानते थे।
राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल
सुधीर शर्मा ने सरकार के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि हमेशा से परंपरा रही है कि ऐसे पूर्व मंत्रियों को राजकीय सम्मान दिया जाता है, लेकिन न प्रशासन को और न ही प्रदेश सरकार को इसकी जानकारी थी। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार ऐसे मामलों में भी इस तरह का रवैया अपनाएगी तो इससे दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता।'
गौरतलब है कि प्रोटोकॉल के अनुसार राजकीय सम्मान तब दिया जाता है जब स्टेट फ्यूनरल आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया जाए। एक महिला अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री होने के नाते जो प्रावधान बनता है, उसके तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, किंतु पूर्ण राजकीय सम्मान के लिए अधिसूचना आवश्यक होती है जो इस बार जारी नहीं हुई।
सरवीन चौधरी की भावभीनी श्रद्धांजलि
पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी ने कहा कि मनकोटिया ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) से भी चुनाव लड़ा और बाद में BJP में भी शामिल हुए, जो दर्शाता है कि उनकी स्वीकार्यता हर दल और हर वर्ग में थी। 'शाहपुर के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया।'
चौधरी ने बताया कि मनकोटिया नहा-धोकर भोजन ग्रहण कर रहे थे, तभी अचानक हार्ट अटैक आया। उन्होंने कहा, 'इस संसार से इस तरह जाना किसी नसीब वाले को ही नसीब होता है।' उन्होंने दिवंगत नेता के परिजनों के लिए शक्ति की कामना भी की।
मनकोटिया का राजनीतिक सफ़र
मेजर विजय सिंह मनकोटिया शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक रहे और हिमाचल सरकार में मंत्री पद भी सँभाला। कांगड़ा जिले की राजनीति में उनकी उपस्थिति दशकों तक बनी रही। उनके अचानक निधन से क्षेत्र में एक राजनीतिक रिक्तता महसूस की जा रही है।
आगे क्या होगा
राजकीय सम्मान विवाद ने राज्य सरकार पर प्रोटोकॉल प्रबंधन को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। BJP ने माँग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि अधिसूचना क्यों नहीं जारी की गई। यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अगले सत्र में भी उठाए जाने की संभावना है।