हिमाचल के पूर्व पर्यटन मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन, कांगड़ा में शोक
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक और स्पष्टवादी छवि के लिए जाने जाने वाले पूर्व पर्यटन मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 29 सितंबर 2026 को निधन हो गया। उनके जाने की खबर से कांगड़ा समेत पूरे हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर छा गई है। राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र के लोगों ने उनके निधन पर गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।
प्रारंभिक जीवन और सैन्य पृष्ठभूमि
मेजर मनकोटिया का जन्म कांगड़ा के त्यारा गाँव में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा शिमला के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन स्कूल में हुई। शिक्षा पूर्ण करने के बाद वह भारतीय सेना में शामिल हुए और मेजर के पद तक पहुँचे। सैन्य सेवा से अवकाश लेने के बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया।
राजनीतिक यात्रा और योगदान
मनकोटिया ने शाहपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और विधायक के रूप में जनता की सेवा की। वह हिमाचल प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री भी रहे। मंत्रालय संभालते हुए उन्होंने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए।
सेना की पृष्ठभूमि से आए मनकोटिया का स्वभाव राजनीति में भी उसी अनुशासन और निडरता से परिलक्षित होता था। वह बिना किसी लाग-लपेट के सरकार और प्रशासन के सामने जनहित के मुद्दे रखते थे। कांगड़ा क्षेत्र के विकास और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने लगातार संघर्ष किया।
साहित्यिक अवदान
मेजर मनकोटिया केवल राजनेता नहीं, बल्कि एक सक्रिय लेखक भी थे। उन्होंने तीन पुस्तकें लिखीं — 'द पैटर्न्स ऑफ डेस्टिनी', 'टर्मॉइल' और 'अपहीवल'। इन रचनाओं के माध्यम से उन्होंने न्याय और समानता से जुड़े अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा।
शोक और श्रद्धांजलि
उनके निधन को कांगड़ा के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और साहित्यिक समुदाय के लोगों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। गौरतलब है कि मनकोटिया उन नेताओं में से थे जो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता की आवाज़ बनने के लिए पहचाने जाते थे।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उनका यह रिक्त स्थान लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।