क्या मकर संक्रांति पर इस मंदिर में भक्तों का तांता लगता है?

Click to start listening
क्या मकर संक्रांति पर इस मंदिर में भक्तों का तांता लगता है?

सारांश

मध्य प्रदेश के खरगोन में स्थित सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर मकर संक्रांति पर भक्तों की भीड़ को आकर्षित करता है। यहां सूरज की पहली किरण गिरती है, और श्रद्धालु ग्रहों के संतुलन के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। जानें इस अद्भुत मंदिर की खासियतें और पौराणिक कथाएं।

Key Takeaways

  • मकर संक्रांति पर लाखों भक्तों की भीड़
  • सूर्य की पहली किरण इस मंदिर पर गिरती है
  • 300 वर्ष पुराना नवग्रह मंदिर
  • दक्षिण भारतीय वास्तुकला का प्रभाव
  • ग्रहों के संतुलन के लिए दान और पूजा

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की धरती पर अनेक ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु आते हैं।

यह प्रदेश सभ्यता और आध्यात्मिकता का प्रमुख केंद्र है, जहां खजुराहो की विरासत और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के खरगोन को नवग्रह की नगरी भी कहा जाता है? यहां देश का एकमात्र सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर स्थित है।

मकर संक्रांति का संबंध सीधे सूर्य भगवान से है, क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी कारण खरगोन के सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर में भक्तों की भीड़ लगती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के पहले दिन इसी मंदिर पर सूरज की पहली किरण गिरती है।

300 वर्षों पुराना यह मंदिर त्रिदेव, बारह राशियों, और बारह ग्रहों की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। यदि ग्रह असंतुलित हैं और परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो इस मंदिर में दान और पूजा करने से समस्याएं हल हो जाती हैं। यहां हर ग्रह के नाम पर एक पोटली दान की जाती है, जिसमें ग्रह से जुड़ी वस्तुएं होती हैं, जो कष्टों के निवारण में मददगार होती हैं। सूर्य प्रधान मंदिर होने के कारण मकर संक्रांति पर लाखों भक्त सूर्य भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं।

मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली से प्रेरित है। मंदिर में प्रतिमाओं का आकार और शैली दक्षिण भारत की तरह है। मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं। तीन शिखर इसे और भी अद्भुत बनाते हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार मां बगलामुखी ने एक पंडित को स्वप्न में आकर मंदिर बनाने का निर्देश दिया था। इसी कारण मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्य की प्रतिमा के साथ मां बगलामुखी की प्रतिमा भी प्रतिष्ठित है। इसके साथ ही, अन्य 8 ग्रहों की प्रतिमाएं और उनके सवारी भी मंदिर में स्थापित हैं।

Point of View

बल्कि यह भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि को भी दर्शाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहां वे अपने कष्टों का निवारण करने के लिए आती हैं।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

खरगोन के सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर की विशेषता क्या है?
यह मंदिर भारत का एकमात्र सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर है, जहां मकर संक्रांति पर सूरज की पहली किरण गिरती है।
मंदिर की वास्तुकला किस शैली से प्रेरित है?
इसकी वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली से प्रेरित है, जिसमें बारीक नक्काशी और अद्वितीय प्रतिमाएं हैं।
मंदिर में कौन-कौन से ग्रहों की पूजा की जाती है?
यहां त्रिदेव के साथ-साथ बारह राशियों और बारह ग्रहों की पूजा की जाती है।
Nation Press