मुंबई के मलाड में गरबा विवाद के बाद परिवार पर लोहे की छड़ों से हमला, संजय दुबे आईसीयू में
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के मलाड इलाके की मालवणी अंबुजवाड़ी में 18 अक्टूबर 2026 को गरबा आयोजन से जुड़े विवाद के बाद एक परिवार पर कथित तौर पर लोहे की छड़ों से हमला किया गया, जिसमें परिवार के मुखिया संजय दुबे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस उनकी शिकायत दर्ज करने में सहयोग नहीं कर रही, जबकि पुलिस के अनुसार मामले की जाँच जारी है।
घटनाक्रम: कैसे हुई मारपीट
पीड़ित के पुत्र हर्ष दुबे के अनुसार, मंदिर के सामने वर्षों की परंपरा के अनुसार गरबा आयोजन हो रहा था। रात 10 बजे नियमानुसार पुलिस ने गरबा बंद कराया। इसके बाद कुछ आरोपियों ने पुलिस से बहस की और मंदिर के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की। जब मारपीट शुरू हुई तो हर्ष ने तत्काल पुलिस को सूचित किया, किंतु उनके अनुसार पुलिस 40-45 मिनट बाद पहुँची।
हर्ष ने बताया, 'आरोपियों ने पुलिस के साथ बहस की। मंदिर के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की। जब मारपीट की तो मैंने पुलिस को कॉल किया, लेकिन पुलिस 40-45 मिनट बाद आई।'
पीड़ित परिवार के आरोप
संजय दुबे की पत्नी रंजना दुबे ने बताया कि उनका परिवार 20 वर्षों से इस इलाके में रह रहा है और इस दौरान तीन बार उनके पति पर हमले की कोशिश हुई है। उन्होंने कहा, 'रेहान, गोलू और अजय — तीन युवक जबरदस्ती घर में घुस गए। हमारे दो जेठ और एक लड़के को मारने लगे। मेरे पति बीच-बचाव करने गए, तो गोलू ने रॉड से हमला किया।'
रंजना दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दे रही है और उन्हें न्याय नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा, 'पुलिस हमारा सहयोग नहीं कर रही है। आरोपी हमें मजबूर कर रहे हैं कि इस इलाके में नहीं रहें।' यह आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
संजय दुबे की स्थिति
हर्ष दुबे के अनुसार उनके पिता संजय दुबे करीब 30 घंटे तक आईसीयू में भर्ती रहे, इसके बाद उन्हें जनरल वार्ड में स्थानांतरित किया गया। परिवार ने सरकार और पुलिस से सुरक्षा तथा न्याय की माँग की है। घटना ने मालवणी इलाके में तनाव का माहौल बना दिया है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
परिवार ने आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज नहीं की जा रही, जो कि एक गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। गौरतलब है कि घटना के समय प्रशासनिक तंत्र की प्रतिक्रिया समय पर सवाल उठे हैं — परिवार के अनुसार आपातकालीन कॉल के बाद भी पुलिस 40-45 मिनट बाद पहुँची।
आगे क्या होगा
पीड़ित परिवार ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप और आरोपियों की गिरफ्तारी की माँग की है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में नवरात्रि के गरबा आयोजनों के दौरान कई स्थानों पर विवादों की खबरें आई हैं। पुलिस जाँच की दिशा और अंजाम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।