गरबा पंडाल में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर महामंडलेश्वर राम गोपाल दास का बयान, आयोजकों से प्रतिबंध की माँग
सारांश
मुख्य बातें
इंदौर के धार्मिक समागम में महामंडलेश्वर राम गोपाल दास महाराज ने 16 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि गरबा आयोजनों में गैर-हिंदू युवाओं की उपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई और गरबा पंडाल आयोजकों से उनके प्रवेश पर रोक लगाने की सीधी अपील की। उन्होंने प्रशासन से भी इस संदर्भ में सख्त कार्रवाई की माँग रखी।
महामंडलेश्वर का बयान
महामंडलेश्वर राम गोपाल दास महाराज ने अपनी बात रखते हुए कहा, 'हमने पहले ही गरबा पंडाल आयोजकों से आह्वान किया है कि गैर-हिंदू लोगों को नवरात्रि के कार्यक्रम में एंट्री न दें।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार मक्का-मदीना में केवल मुसलमानों के प्रवेश की अनुमति है, उसी तर्ज पर गरबा पंडालों में केवल हिंदुओं का प्रवेश वैध होना चाहिए।
उनके अनुसार गैर-हिंदू व्यक्ति गरबा में 'लव जिहाद' के उद्देश्य से आते हैं और हिंदू लड़कियों की 'मानसिकता बदलने' का प्रयास करते हैं — यह आरोप उन्होंने बिना किसी साक्ष्य के लगाया। उल्लेखनीय है कि 'लव जिहाद' एक विवादित और कानूनी रूप से अपरिभाषित शब्द है, जिसे विभिन्न न्यायालय एवं विशेषज्ञ प्रमाण-रहित बता चुके हैं।
आयोजकों और प्रशासन से अपील
महामंडलेश्वर ने कहा कि संत समाज की ओर से भी आयोजकों को चेतावनी दी जा रही है कि वे गैर-हिंदुओं को आमंत्रित न करें। उन्होंने कहा, 'आप माता रानी की आराधना और उपासना कीजिए। सनातनियों को बुलाइए।' साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की कि यदि कोई 'लव जिहाद' करता पाया जाए तो उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने हिंदू महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे देवी दुर्गा और काली के चरित्र से प्रेरणा लें और स्वयं को 'देवी स्वरूपा' समझें।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा आयोजनों में प्रवेश-नियंत्रण को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों में विभिन्न हिंदू संगठन इस तरह के प्रतिबंध की माँग करते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं और संविधान में प्रदत्त सार्वजनिक स्थलों पर समान अधिकार के विरुद्ध हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नवरात्रि के मौसम में इस तरह की माँगें उठी हों — पिछले कई वर्षों से यह मुद्दा सांप्रदायिक रंग लेता रहा है।
विशेषज्ञ और नागरिक समाज की प्रतिक्रिया
नागरिक अधिकार संगठनों और सामाजिक टिप्पणीकारों ने इस तरह के बयानों पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि किसी सार्वजनिक धार्मिक आयोजन में धर्म के आधार पर प्रवेश-प्रतिबंध भारतीय कानून और संविधान की भावना से मेल नहीं खाता। हालाँकि, प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे क्या
नवरात्रि उत्सव का माहौल पूरे इंदौर और मध्य प्रदेश में सक्रिय है और ऐसे बयानों के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वह आयोजनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिशानिर्देश जारी करे। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने की संभावना है।