इंदौर गरबा विवाद: वीएचपी की चेतावनी — 'गड़बड़ी करने वालों को इस बार नहीं छोड़ेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
नवरात्रि से ठीक पहले इंदौर में गरबा आयोजनों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) नेता संतोष शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस बार गरबा पंडालों में किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने हिंदू संगठनों की माँगों का खुलकर समर्थन किया है। कांग्रेस ने इस पर पलटवार करते हुए इसे 'ध्रुवीकरण की राजनीति' करार दिया है।
वीएचपी का कड़ा रुख
वीएचपी नेता संतोष शर्मा ने कहा, 'इस बार हम लोग पूरी तरह से तैयार हैं। अगर नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों में कोई व्यक्ति आकर गलत काम करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने आगे जोड़ा कि 'पहले गलती समझकर छोड़ दिया जाता था, लेकिन इस बार हम लोग छोड़ने वाले नहीं हैं, इसीलिए कोई भी आने से पहले सोचकर आए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई हिंदू संगठन गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की माँग कर रहे हैं।
उषा ठाकुर का समर्थन
भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने इन माँगों का समर्थन करते हुए कहा, 'गरबा कभी प्रोफेशनल होना ही नहीं चाहिए। गरबा देवी मां की शक्ति की आराधना का पर्व है। सनातनी समाज शास्त्र और शस्त्र का अध्ययन करें, अपने व्यक्तित्व का माता-बहनें सर्वांगीण विकास करें। धर्म, संस्कृति, राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार हों।' उन्होंने यह भी कहा कि गैर-हिंदू संगठन वहाँ आकर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं।
विजयवर्गीय विवाद और कांग्रेस का पलटवार
इसी बीच कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान पर तीखा हमला बोला, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने एक महिला पार्षद की शारीरिक बनावट पर सार्वजनिक मंच से टिप्पणी की थी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई है।
वर्मा ने कहा, 'मुझे लगता है कि कैलाश विजयवर्गीय अभी मानसिक रूप से परेशान या अस्थिर दौर से गुजर रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा उन्हें बिना किसी सम्मान के दरकिनार किए जाने के कारण वे अपना आपा खो रहे हैं। उनके विभाग में कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है।' वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग जाति और धर्म के नाम पर लड़ाई कराने के लिए ऐसे बयान देते हैं।
पार्षद संध्या यादव प्रकरण
उषा ठाकुर ने पार्षद संध्या यादव से जुड़े एक बयान का भी बचाव किया। उन्होंने कहा, 'हमारी पार्षद बहन संध्या यादव बचपन से ही उनकी गोद में पली-बढ़ी हैं। वह उनकी बेटी जैसी हैं। हो सकता है कि उन्होंने स्नेहवश ऐसा कहा हो, शायद अपनी बहन को सेहत का ध्यान रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी हो।' उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं है।
व्यापक संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में प्रवेश नियंत्रण को लेकर विवाद उठते रहे हैं। मध्य प्रदेश में इस बार चुनावी माहौल न होने के बावजूद इस मुद्दे का उभरना राज्य की राजनीतिक तापमान को दर्शाता है। नवरात्रि शुरू होने से पहले प्रशासन पर यह दबाव होगा कि वह आयोजनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी संभावित तनाव को रोके।