मध्य प्रदेश में गरबा विवाद: भाजपा विधायकों के बयानों से नवरात्रि से पहले राजनीतिक तूफान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में शरद नवरात्रि 2026 शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो विधायकों के गरबा संबंधी बयानों ने राज्य की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। महू विधायक उषा ठाकुर और भोपाल विधायक रामेश्वर शर्मा के लगातार आए बयानों में गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की माँग की गई है। इस वर्ष शरद नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली है।
उषा ठाकुर के बयान और माँगें
महू की भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने गरबा आयोजनों पर बोलते हुए हिंदू संगठनों की उस माँग का समर्थन किया जिसमें गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है। उनके अनुसार, 'गरबा को कभी भी पेशेवर नहीं बनाया जाना चाहिए — यह देवी दुर्गा की शक्ति की पूजा का त्योहार है।' ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग तिलक लगाकर और कलाव (पवित्र धागा) बाँधकर अपनी पहचान छिपाते हुए गरबा स्थलों में प्रवेश करते हैं और हिंदू महिलाओं को गुमराह करते हैं।
ठाकुर ने गरबा पंडालों में पहचान सत्यापन की माँग भी की। उन्होंने यह भी कहा कि सनातनी समुदाय को धर्मग्रंथों और हथियारों का अध्ययन करना चाहिए, तथा महिलाओं को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।
रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी और 'लव जिहाद' की चेतावनी
ठाकुर के बयान से एक दिन पहले भोपाल के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुस्लिम पुरुषों की गरबा में भागीदारी पर सवाल उठाया था। शर्मा ने कहा कि मुस्लिम पुरुष गरबा में तभी भाग ले सकते हैं जब वे 'स्थायी रूप से' आएँ, 'जय श्री राम' का जाप करें और तिलक लगाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यक्रमों का उपयोग 'लव जिहाद' के लिए करने के किसी भी प्रयास का युवा जवाब देने के लिए तैयार हैं।
गौरतलब है कि 'लव जिहाद' एक ऐसा शब्द है जिसे कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल और नागरिक अधिकार संगठन खारिज करते हैं और इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का हथियार मानते हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के भोपाल विधायक आरिफ मसूद ने शर्मा की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें 'आपत्तिजनक' करार दिया। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान नवरात्रि जैसे धार्मिक त्योहार को सांप्रदायिक रंग देते हैं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में पिछले कई वर्षों से नवरात्रि के आसपास गरबा में गैर-हिंदुओं की भागीदारी का मुद्दा बार-बार विवाद का केंद्र बनता रहा है। कई हिंदू संगठन स्वयंसेवकों को गरबा स्थलों पर तैनात करते हैं।
नवरात्रि और गरबा का महत्व
शरद नवरात्रि नौ रात्रिकालीन हिंदू पर्व है जो देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित है। गरबा गुजरात से उत्पन्न एक पारंपरिक लोक नृत्य है जो नवरात्रि उत्सव का अभिन्न अंग बन चुका है। इस वर्ष यह पर्व 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा और पूरे भारत में लाखों श्रद्धालु इसे मनाएँगे।
आगे क्या होगा
इन बयानों के बाद मध्य प्रदेश में गरबा आयोजकों और प्रशासन पर दबाव बढ़ने की आशंका है। प्रवेश नियंत्रण और पहचान सत्यापन के मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नवरात्रि से पहले इस तरह के बयान राज्य में ध्रुवीकरण की राजनीति को और तेज कर सकते हैं।