विहिप प्रवक्ता श्रीराज नायर की माँग: गरबा पंडालों में केवल हिंदुओं को मिले प्रवेश, तिलक-कलावा अनिवार्य हो
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि गरबा पंडालों में प्रवेश केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को दिया जाना चाहिए। नायर ने आयोजकों से आग्रह किया कि वे प्रवेश द्वार पर पहचान-पत्र की जाँच करें और तिलक तथा कलावा को अनिवार्य बनाएँ।
विहिप का स्पष्ट रुख
नायर ने कहा कि विहिप का स्पष्ट मानना है कि गरबा एक धार्मिक आयोजन है, इसलिए इसमें केवल हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों को ही प्रवेश मिलना चाहिए। जब उनसे यह पूछा गया कि जो गैर-हिंदू हिंदू देवी-देवताओं में आस्था रखते हों, उनके बारे में क्या रुख होगा, तो उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहले हिंदू धर्म स्वीकार करना चाहिए।
आयोजकों को पत्र और निगरानी की व्यवस्था
नायर के अनुसार, गरबा आयोजकों को इस संबंध में औपचारिक पत्र भेजे जाएंगे और उन्हें विहिप की माँगों से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता आयोजनों पर नज़र रखेंगे। इसके अतिरिक्त आयोजनों में वराह भगवान के कटआउट लगाए जाने की भी अपील की गई है।
जबरन प्रवेश पर चेतावनी
किसी व्यक्ति द्वारा पहचान छिपाकर या जबरन पंडाल में घुसने की स्थिति पर नायर ने कहा कि पहले पुलिस की सहायता ली जानी चाहिए और कानून का पालन किया जाना चाहिए। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में 'बजरंग दल स्टाइल' में जवाब देने से भी इनकार नहीं किया, जो कि सुरक्षा एजेंसियों और नागरिक समाज के लिए एक चिंताजनक संकेत माना जा सकता है।
पिछले साल का अनुभव
नायर ने दावा किया कि 2025 के नवरात्रि आयोजनों में भी अनेक स्थानों पर पहचान-पत्र जाँच, तिलक और कलावा जैसी व्यवस्थाएँ अपनाई गई थीं और इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़कर कार्यक्रम शांतिपूर्वक सम्पन्न हुए थे। इस बार भी आयोजकों से इन्हीं व्यवस्थाओं को दोहराने की अपील की गई है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह माँग ऐसे समय में आई है जब नवरात्रि उत्सव अक्टूबर 2026 में शुरू होने वाले हैं और देशभर में गरबा आयोजनों की तैयारियाँ जोरों पर हैं। गौरतलब है कि कुछ राज्यों में पिछले वर्षों में धार्मिक आयोजनों में प्रवेश को लेकर विवाद होते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की अपील सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकती है, जबकि विहिप इसे धार्मिक परम्परा की रक्षा का प्रश्न बताती है। आने वाले दिनों में आयोजकों, प्रशासन और सुरक्षा बलों की भूमिका इस मामले में निर्णायक होगी।