क्या मणिकर्णिका घाट मंदिर विवाद में अखिलेश यादव के आरोपों पर भाजपा सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया है?

Click to start listening
क्या मणिकर्णिका घाट मंदिर विवाद में अखिलेश यादव के आरोपों पर भाजपा सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया है?

सारांश

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट मंदिर विवाद में अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाए हैं। भाजपा सांसदों ने अखिलेश के बयानों का कड़ा विरोध किया है, यह स्थिति दिखाती है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कितनी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बयान महत्वपूर्ण हैं।

Key Takeaways

  • मणिकर्णिका घाट मंदिर विवाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं।
  • अखिलेश यादव ने भाजपा पर मंदिर तोड़ने का आरोप लगाया है।
  • भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रतिक्रिया दी है।
  • यह स्थिति दोनों दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।
  • सार्वजनिक विश्वास का मुद्दा दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट मंदिर को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासन में जितने भी पौराणिक मंदिर तोड़े गए हैं, उतने किसी अन्य शासन में नहीं हुए। इस पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, यह बताते हुए कि विपक्ष का आधार खिसकता हुआ दिखाई दे रहा है और उन्हें डर है कि हिंदू उनके हाथ से निकल रहे हैं, इसी कारण वे गलत बयानबाजी कर रहे हैं।

भाजपा सांसद नरेश बंसल ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, "अखिलेश यादव का स्वयं सनातन में विश्वास नहीं है। उनकी बातों पर किसी को भरोसा नहीं है। वे हमेशा अप्रासंगिक बातें करते हैं। भाजपा मंदिरों का संरक्षण करने वाली पार्टी है, मंदिर तोड़ने वाली नहीं।"

नरेश बंसल ने कहा कि इतिहास जानता है कि पिछले एक हजार वर्षों में किसने मंदिर तोड़े हैं और उनकी पहचान बदलने का कार्य किया है। अगर जांच हो, तो पता चलेगा कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने कितने हिंदुओं को अयोध्या के राम मंदिर के समय में सरयू नदी में पत्थर फेंककर मारा था। मुजफ्फरनगर गोलीकांड भी अखिलेश यादव के पिता के कारण हुआ था।

उन्होंने कहा कि भाजपाई सनातन के उपासक हैं और इसके लिए ही काम करते हैं। इसलिए, अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए किसी भी आरोप पर जनता का विश्वास नहीं है।

भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने अखिलेश यादव को जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार सभी धर्मों को साथ लेकर चलने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, "विपक्ष का आधार खिसकता नजर आ रहा है। उन्हें लग रहा है कि हिंदू उनके हाथ से जाने वाले हैं, इसलिए वे गलत बयानबाजी कर रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में मंदिरों को तोड़ने की कोई घटना नहीं हो सकती।"

इससे पहले, अखिलेश यादव ने एक बयान में कहा था कि भाजपा की सरकार में जितने पौराणिक मंदिर तोड़े गए हैं, उतने धरती पर किसी राजा ने नहीं तोड़े। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सैफई में बनाए जा रहे मंदिर में भाजपा के लोग टंगड़ी लगा रहे हैं।

Point of View

यह कहना है कि मणिकर्णिका घाट मंदिर विवाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप केवल एक राजनीतिक चतुराई का हिस्सा है। ऐसे मामलों में, सही तथ्यों की पहचान करना और जनता को सही जानकारी देना आवश्यक है।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या अखिलेश यादव के आरोप सही हैं?
अखिलेश यादव के आरोपों की जांच आवश्यक है, लेकिन भाजपा ने इसे खारिज कर दिया है।
भाजपा ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
भाजपा सांसदों ने कहा है कि विपक्ष का आधार खिसकता नजर आ रहा है।
क्या यह विवाद राजनीतिक है?
हां, यह विवाद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है।
मणिकर्णिका घाट मंदिर का महत्व क्या है?
यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है और वाराणसी के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।
क्या भाजपा मंदिरों के संरक्षण की पक्षधर है?
भाजपा ने खुद को मंदिरों का संरक्षण करने वाली पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है।
Nation Press