मनोज कुमार झा का आरोप: चुनाव आयोग भाजपा को जिताने में है संलग्न
सारांश
Key Takeaways
- महाभियोग प्रस्ताव का खारिज होना संसदीय प्रक्रिया की अवहेलना है।
- मनोज झा का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा को समर्थन कर रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी मनोज झा ने चिंता व्यक्त की है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अस्वीकार किए जाने से राजनीतिक वातावरण में तूफान खड़ा हो गया है। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने इसे संसदीय प्रक्रिया की अनदेखी करार दिया।
मनोज कुमार झा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल प्रस्ताव का खारिज होना नहीं है, बल्कि यह संसद की स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। उनके अनुसार, संविधान में ऐसे प्रावधान असाधारण परिस्थितियों के लिए बनाए गए हैं, और वर्तमान स्थिति वास्तव में ऐसी ही है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली में निष्पक्षता और स्वतंत्रता की कमी स्पष्ट है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
आरजेडी सांसद ने यह आरोप भी लगाया कि आज के दौर में संसदीय परंपराओं को कमजोर किया जा रहा है, जो भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव का खारिज होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। उनके अनुसार, विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
मनोज झा ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग जिस प्रकार कार्य कर रहा है, वह संविधान के अनुरूप नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग भाजपा को जिताने के लिए काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि एसआईआर से संबंधित विपक्ष के नेताओं की बातों पर चुनाव आयोग कोई ध्यान नहीं दे रहा है, जो यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग किसके इशारे पर कार्य कर रहा है।
इसके अलावा, मनोज झा ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और वहां की राजनीतिक स्थिति भी अस्थिर हो रही है। सत्तारूढ़ दल के भीतर भी समर्थन घटता जा रहा है और वैश्विक स्तर पर नीतियों के प्रभाव स्पष्ट हो रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय निर्णय विशेष लॉबी के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, जिससे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है।