11 अक्टूबर 2026
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नवरात्रि 2026: मेहरानगढ़ दुर्ग की मां चामुंडा मंदिर में उमड़े 10-15 हजार श्रद्धालु, मारवाड़ की कुलदेवी के दर्शन को अलसुबह से लगीं कतारें

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नवरात्रि 2026: मेहरानगढ़ दुर्ग की मां चामुंडा मंदिर में उमड़े 10-15 हजार श्रद्धालु, मारवाड़ की कुलदेवी के दर्शन को अलसुबह से लगीं कतारें

सारांश

नवरात्रि 2026 के पहले दिन जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर में 10-15 हजार श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। 563 वर्ष पुराना यह मंदिर मारवाड़ की कुलदेवी का प्रतीक है। राव जोधा द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक मंदिर में आठ दिनों के अनुष्ठान, अष्टमी को हवन और नवमी को पूर्णाहुति होगी।

मुख्य बातें

11 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पहले दिन मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर में 10 से 15 हजार श्रद्धालुओं के दर्शन की संभावना।
सुबह 7:30 बजे पहली आरती और घट स्थापना के साथ अनुष्ठान शुरू; आठ दिनों तक सप्तशती पाठ जारी रहेगा।
मंदिर की स्थापना जोधपुर के संस्थापक राव जोधा ने विक्रम संवत 1517 (लगभग 563 वर्ष पूर्व ) में मंडोर से प्रतिमा लाकर की थी।
मां चामुंडा को मारवाड़ के लोग अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
जयपोल, मित्यापोल, फतेहपोल और जोधा प्याऊ पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात।
अष्टमी की रात भव्य हवन और नवमी को पूर्णाहुति के साथ नवरात्रि महोत्सव का समापन होगा।

नवरात्रि के पहले दिन, 11 अक्टूबर 2026 को जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर में श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही दर्शनार्थियों की लंबी कतारें दुर्ग तक पहुँच गईं और पूरा परिसर माता के जयकारों एवं भजनों से गूँजता रहा। पुलिस अनुमान के अनुसार, इस दिन मंदिर में कम से कम 10 से 15 हजार भक्तों के दर्शन की संभावना जताई गई।

मुख्य घटनाक्रम

मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होते ही मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जोधपुर शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जिलों से भी भारी संख्या में भक्त माता का आशीर्वाद लेने पहुँचे। बच्चों, युवाओं और वृद्धों — सभी में मां के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह दिखा।

मंदिर से जुड़े पुजारी घनश्याम त्रिवेदी ने बताया कि सुबह 7:30 बजे पहली आरती के साथ विधिवत अनुष्ठान शुरू हुए, जिसमें बाबजी हुकुम की ओर से घट स्थापना की पूजा संपन्न हुई। मंदिर में आठ दिनों तक सप्तशती पाठ जारी रहेगा, अष्टमी की रात भव्य हवन होगा और नवमी के दिन पूर्णाहुति की जाएगी।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

इतिहासकारों के अनुसार, जोधपुर के संस्थापक राव जोधा ने विक्रम संवत 1517 — यानी लगभग 563 वर्ष पूर्व — मां चामुंडा की इस दिव्य प्रतिमा को मंडोर से लाकर मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थापित किया था। पुजारी घनश्याम त्रिवेदी ने कहा, 'यह मंदिर बहुत प्राचीन है। राजा राव जोधा ने मंदिर की स्थापना कराई थी। इस मंदिर से मारवाड़ के लोगों की आस्था जुड़ी है। ये लोग मां चामुंडा को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।'

मंदिर से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इतिहास में संकट के किसी दौर में जब दुश्मन द्वारा बम फेंके गए थे, तब मां के आशीर्वाद से एक भी बम नहीं फटा और कोई क्षति नहीं हुई — इस आस्था-कथा ने मारवाड़ के राजवंश और जनमानस दोनों की मां चामुंडा के प्रति श्रद्धा को और प्रगाढ़ किया है।

श्रद्धालुओं की आस्था

श्रद्धालु ललित परमार ने बताया, 'हम लोग माता रानी के दर्शन करने के लिए आए हैं। हम लोग सुबह 5 बजे से लाइन में खड़े थे। नवरात्रि के समय यहाँ अधिक संख्या में लोग पहुँचते हैं।' दर्शनार्थी दीपिका ने कहा, 'यहाँ मान्यता है कि सच्ची भावना से जो भक्त आते हैं, उनकी हर आस पूरी होती है। हर साल हम नवरात्र में नौ दिन मंदिर में आते हैं।' कई भक्त परंपरानुसार नौ दिनों तक अन्न त्याग या मौन व्रत रखकर माता की आराधना में लीन हैं।

सुरक्षा व्यवस्था

भारी भीड़ और सुरक्षा के मद्देनजर थानाधिकारी देवेंद्र देवड़ा ने बताया कि शारदीय नवरात्रि का पहला दिन रविवार और सार्वजनिक अवकाश के साथ पड़ने से दर्शनार्थियों की संख्या असाधारण रूप से अधिक रही। जयपोल, मित्यापोल, फतेहपोल और जोधा प्याऊ के आसपास त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए प्रत्येक स्तर पर रोक-रोककर प्रवेश दिया जा रहा है।

आगे का कार्यक्रम

नवरात्रि के नौ दिनों तक मां चामुंडा मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहेगा। अष्टमी की रात भव्य हवन और नवमी को पूर्णाहुति के साथ महोत्सव का समापन होगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए व्यवस्थित ढंग से दर्शन करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मारवाड़ की सामूहिक पहचान और सांस्कृतिक स्मृति का जीवंत प्रतीक है — जहाँ 563 वर्षों की आस्था हर नवरात्रि पर फिर से नवीन होती है। यह उल्लेखनीय है कि रविवार और सार्वजनिक अवकाश का संयोग ही 10-15 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ की प्रमुख वजह बना, जो प्रशासनिक दृष्टि से सुरक्षा-नियोजन की चुनौती भी प्रस्तुत करता है। मुख्यधारा की कवरेज आस्था के उत्साह पर केंद्रित रहती है, लेकिन भविष्य में यह भी विचारणीय है कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए दीर्घकालिक अवसंरचना और भगदड़-रोधी प्रबंधन कितना पुख्ता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर कितना पुराना है?
इतिहासकारों के अनुसार, जोधपुर के संस्थापक राव जोधा ने विक्रम संवत 1517 में — यानी लगभग 563 वर्ष पूर्व — मंडोर से मां चामुंडा की प्रतिमा लाकर मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थापित की थी। यह मंदिर मारवाड़ के राजवंश और जनमानस दोनों की आस्था का केंद्र रहा है।
मारवाड़ के लोग मां चामुंडा को कुलदेवी क्यों मानते हैं?
मंदिर के पुजारी घनश्याम त्रिवेदी के अनुसार, मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा मंदिर राव जोधा के काल से मारवाड़ के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है और इस क्षेत्र के लोग पीढ़ियों से मां चामुंडा को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते आए हैं। नवरात्रि के दौरान यहाँ दर्शन करना मारवाड़ी परंपरा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
नवरात्रि 2026 में मेहरानगढ़ मां चामुंडा मंदिर में कितने श्रद्धालु पहुँचे?
पुलिस अनुमान के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पहले दिन मेहरानगढ़ मां चामुंडा मंदिर में कम से कम 10 से 15 हजार श्रद्धालुओं के दर्शन की संभावना थी। रविवार और सार्वजनिक अवकाश के संयोग से भीड़ असाधारण रूप से अधिक रही।
नवरात्रि 2026 में मंदिर में कौन-से धार्मिक अनुष्ठान होंगे?
मंदिर के पुजारी घनश्याम त्रिवेदी के अनुसार, आठ दिनों तक सप्तशती पाठ होगा, अष्टमी की रात भव्य हवन का आयोजन होगा और नवमी के दिन पूर्णाहुति के साथ नवरात्रि महोत्सव का समापन होगा। 11 अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे पहली आरती और घट स्थापना के साथ अनुष्ठानों की शुरुआत हुई।
मेहरानगढ़ में नवरात्रि के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
थानाधिकारी देवेंद्र देवड़ा के अनुसार, जयपोल, मित्यापोल, फतेहपोल और जोधा प्याऊ के आसपास त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए प्रत्येक स्तर पर रोक-रोककर प्रवेश दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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