मिथुन चक्रवर्ती बने पश्चिम बंगाल सरकार के सांस्कृतिक सलाहकार, कैबिनेट मंत्री का दर्जा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग में सलाहकार नियुक्त किया है। उन्हें यह जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री के रैंक के साथ दी गई है और नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। राज्य के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
अधिसूचना का विवरण
यह अधिसूचना 6 अक्टूबर 2026 को नबान्न स्थित कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (आई.ए.एस. सेल), हावड़ा से अधिसूचना संख्या 1878-पीएआर(आईएएस)/5सी-71/2026 के तहत जारी की गई है। अधिसूचना पर मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के हस्ताक्षर हैं और यह राज्यपाल के आदेश से प्रभावी मानी गई है। सरकार के अनुसार, यह अधिसूचना सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से जनहित में जारी की गई है।
नियुक्ति-पत्र की एक प्रति सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए मिथुन चक्रवर्ती को भी भेजी गई है। यह नियुक्ति अगले आदेश तक जारी रहेगी।
मिथुन चक्रवर्ती की पृष्ठभूमि और योगदान
मूल रूप से कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले मिथुन चक्रवर्ती न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि समूचे देश में सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं। 'मिथुन दा' के नाम से प्रसिद्ध इस अभिनेता का बंगाल की संस्कृति, कला और फिल्म जगत से गहरा जुड़ाव रहा है। फिल्मी करियर के अलावा सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है।
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, उनके व्यापक अनुभव का लाभ सीधे सूचना एवं संस्कृति विभाग को मिलेगा। उनकी नियुक्ति से बंगाल की कला, संस्कृति और फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने की सरकारी योजनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार की व्यापक सांस्कृतिक पहल
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल सरकार सांस्कृतिक और सूचना क्षेत्र में कई नई पहल कर रही है। कैबिनेट मंत्री के रैंक के साथ सलाहकार की भूमिका मिलने के बाद मिथुन चक्रवर्ती अब सरकार की सांस्कृतिक नीतियों और कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से योगदान दे सकेंगे। गौरतलब है कि यह पद राज्य की सांस्कृतिक नीति-निर्माण में सीधी भागीदारी का अवसर देता है।
आगे क्या होगा
कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ सलाहकार की जिम्मेदारी सँभालने के बाद मिथुन चक्रवर्ती से उम्मीद की जा रही है कि वे बंगाल के फिल्म उद्योग, लोक कलाओं और सांस्कृतिक संस्थाओं के विकास में नीतिगत स्तर पर योगदान देंगे। सरकार की सांस्कृतिक कूटनीति और अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान की योजनाओं में भी उनकी भूमिका अहम हो सकती है।