8 अक्टूबर 2026
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मिथुन चक्रवर्ती की सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्ति पर आनंद दुबे बोले — 'भाजपा नेता हैं, आश्चर्य क्यों'

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मिथुन चक्रवर्ती की सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्ति पर आनंद दुबे बोले — 'भाजपा नेता हैं, आश्चर्य क्यों'

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने मिथुन चक्रवर्ती की पश्चिम बंगाल सरकार में सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्ति को 'अस्वाभाविक नहीं' बताया — क्योंकि वे भाजपा से जुड़े हैं। साथ ही उन्होंने नाना पाटेकर के निधन पर गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अहम राजनीतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी।
मिथुन चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल में कैबिनेट रैंक सहित सांस्कृतिक सलाहकार बनाए जाने पर दुबे ने कहा — वे आधिकारिक तौर पर BJP के नेता हैं, इसलिए आश्चर्य नहीं।
दुबे ने राहुल गांधी की लंच मीटिंग पर उठ रहे सवालों को 'व्यक्तिगत मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने' की कोशिश करार दिया।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया; SIR विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय में।
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर दुबे ने शोक जताया; नाम फाउंडेशन के ज़रिए किसान-सेवा को याद किया।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कई महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इनमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को कैबिनेट रैंक के साथ सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्त किए जाने का मामला, राहुल गांधी की लंच मीटिंग पर उठे सवाल और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी आंदोलन प्रमुख रहे। साथ ही उन्होंने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

मिथुन चक्रवर्ती की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मिथुन चक्रवर्ती को कैबिनेट रैंक सहित सांस्कृतिक सलाहकार बनाए जाने पर दुबे ने कहा कि मिथुन चक्रवर्ती आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता हैं और फिल्मों के साथ-साथ पार्टी से भी जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, ऐसे में उनकी पार्टी की सरकार में सलाहकार के रूप में नियुक्ति पर कोई बड़ा आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

दुबे ने कहा कि सलाहकार की भूमिका सरकार को मार्गदर्शन देने की होती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मिथुन चक्रवर्ती किस तरह की सलाह देंगे और सरकार में क्या भूमिका निभाएंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मी कलाकार पहले भी अलग-अलग सरकारों के लिए काम करते रहे हैं और नेता व अभिनेता एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

राहुल गांधी की लंच मीटिंग पर सवाल

राहुल गांधी की लंच मीटिंग और उसमें शामिल लोगों को लेकर उठ रहे सवालों पर दुबे ने कहा कि यह एक व्यक्तिगत विषय है। उनके अनुसार, लंच करना किसी का निजी मामला है और इस पर राजनीतिक टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यक्तिगत कार्यक्रमों को राजनीतिक मुद्दे का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी आंदोलन

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन पर दुबे ने कहा कि लोकतंत्र में धरना और प्रदर्शन विपक्ष का अधिकार है। उन्होंने एसआईआर (SIR) विवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। दुबे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से यह अपेक्षा जताई कि वह राहुल गांधी से मिलकर विपक्ष की चिंताओं को सुनें और समझें।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मतभेदों को लेकर स्थिति को स्पष्ट किया जाना चाहिए। दुबे ने ज़ोर देकर कहा कि विपक्ष को देश का दुश्मन नहीं समझा जाना चाहिए और उसे आंदोलन करने का लोकतांत्रिक अधिकार है।

नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर पर आनंद दुबे ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुबह यह खबर सामने आने से उन्हें काफी दुख हुआ। दुबे ने नाना पाटेकर को एक ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जिन्होंने सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक विषय, आपसी भाईचारे और देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों में अपना अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने 'तिरंगा', 'क्रांतिवीर', 'प्रहार' और 'अंकुश' जैसी फिल्मों का विशेष उल्लेख किया।

दुबे ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों और जल संकट जैसे मुद्दों पर उल्लेखनीय कार्य किया। उनके अनुसार, नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक व्यक्तित्व भी थे जिनकी पहचान महाराष्ट्र की अस्मिता से जुड़ी थी, लेकिन उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी व्यापक लोकप्रियता हासिल की।

दुबे ने नाना पाटेकर के पारंपरिक पहनावे — कुर्ता-पायजामा, गमछे और कभी-कभी मराठी टोपी — का जिक्र करते हुए उनकी सहज और ज़मीनी छवि को याद किया। उन्होंने पाटेकर के साथ हुई अपनी मुलाकातों को भी याद किया और उनकी अभिनय प्रतिभा तथा संवाद अदायगी की प्रशंसा की। दुबे ने दिवंगत अभिनेता के परिवार के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

राजनीतिक संदर्भ और आगे का रुख

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ सरकार और BJP के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। मिथुन चक्रवर्ती की नियुक्ति को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। गौरतलब है कि फिल्मी हस्तियों का राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिकाओं में आना भारतीय राजनीति में कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस नियुक्ति की राजनीतिक पृष्ठभूमि इसे विशेष रूप से चर्चा का विषय बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें अंतर्निहित राजनीतिक कटाक्ष है — भाजपा और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच के विरोधाभास को उजागर करना। असली सवाल यह है कि एक विपक्षी दल के नेता को किसी राज्य सरकार में कैबिनेट रैंक देने का संवैधानिक और प्रशासनिक औचित्य क्या है — यह पहलू मुख्यधारा की बहस में अभी भी अनुत्तरित है। नाना पाटेकर के निधन पर श्रद्धांजलि ने इस प्रेस बाइट को एक भावनात्मक आयाम दिया, लेकिन एकाधिक विषयों को एक साथ समेटना राजनीतिक संदेश की धार कम करता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिथुन चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल सरकार में क्या भूमिका दी गई है?
मिथुन चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट रैंक के साथ सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्त किया गया है। वे आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े नेता भी हैं।
आनंद दुबे ने मिथुन चक्रवर्ती की नियुक्ति पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि मिथुन चक्रवर्ती भाजपा के नेता हैं, इसलिए उनकी पार्टी की सरकार में सलाहकार बनाए जाने पर कोई बड़ा आश्चर्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सलाहकार की भूमिका और उनका योगदान आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष क्यों आंदोलन कर रहा है?
विपक्ष एसआईआर (SIR) विवाद को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन कर रहा है, जो अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। आनंद दुबे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से अपेक्षा जताई कि वे राहुल गांधी से मिलकर विपक्ष की चिंताओं को सुनें।
नाना पाटेकर कौन थे और उनका सामाजिक योगदान क्या था?
नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता थे, जिन्होंने 'तिरंगा', 'क्रांतिवीर', 'प्रहार' और 'अंकुश' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों और जल संकट के मुद्दों पर भी उल्लेखनीय सामाजिक कार्य किए।
आनंद दुबे ने राहुल गांधी की लंच मीटिंग पर क्या रुख अपनाया?
आनंद दुबे ने कहा कि लंच करना एक व्यक्तिगत विषय है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह के निजी कार्यक्रमों पर राजनीतिक टिप्पणी उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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