पश्चिम बंगाल हिंसा पर आनंद दुबे का गंभीर बयान, चुनाव आयोग को लेना चाहिए संज्ञान
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं।
- आनंद दुबे ने चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
- महिलाओं के लिए 50%25 आरक्षण की आवश्यकता है।
- भाजपा नेता नवनीत राणा के विवादास्पद बयान पर प्रतिक्रिया।
- राजनीतिक स्थिरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है।
मुंबई, ३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा, भाजपा नेता नवनीत राणा के बयान और महिला आरक्षण जैसी महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर चुनाव आयोग को संज्ञान लेना चाहिए।
आनंद दुबे ने मालदा में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों के साथ हुई मारपीट और हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उनका कहना था कि राज्य में चुनाव के दौरान हिंसा की खबरें निरंतर सामने आती रहती हैं, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि जब चुनाव के समय लूटपाट, अपहरण और अधिकारियों को बंधक बनाए जाने जैसी घटनाएं होती हैं, तो इससे जनता में गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। चुनाव आयोग को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और राज्य सरकार को कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए तत्पर कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य के सहयोग से ही किसी प्रदेश का संचालन संभव है। आनंद दुबे ने आशा व्यक्त की कि ४ मई को बनने वाली नई सरकार के साथ पश्चिम बंगाल में हिंसा का अंत होगा।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर आनंद दुबे ने स्पष्ट रूप से समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि इसे देश में पहले ही लागू किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि महिलाओं को ५० प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए और यह कोई बहस का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
भाजपा नेता नवनीत राणा के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि बुर्का पहनने वाली कोई महिला महापौर या मुख्यमंत्री नहीं बन सकती, दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि नवनीत राणा को धार्मिक ग्रंथों का कितना ज्ञान है, यह भी एक प्रश्न है। दुबे ने कहा कि देश में असली मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी और आम लोगों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने के हैं, जिन पर चर्चा होनी चाहिए, न कि इस प्रकार की बयानों पर।