शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों का पार्टी छोड़ना 'अनैतिक' : आनंद दुबे, लोकसभा स्पीकर से न्याय की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने गुरुवार, 25 जून को मुंबई में कहा कि पार्टी के 9 में से 6 सांसद उन्हें 'अनैतिक रूप से' बीच रास्ते में छोड़कर चले गए हैं। दुबे ने यह भी बताया कि पार्टी ने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष को सूचित कर दिया है और उनसे सुनवाई की उम्मीद है।
सांसदों के दलबदल पर आनंद दुबे का रुख
दुबे ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'आप हमारी टिकट पर चुनाव लड़ते हैं और इसके बाद हमें छोड़कर चले जाते हैं। अगर आपको जाना ही था, तो हमारी टिकट पर चुनाव लड़ते ही नहीं।' उन्होंने माँग की कि ऐसा कोई नियम बनना चाहिए जिसके तहत जिस पार्टी के टिकट पर कोई चुनाव जीते, उसे उसी पार्टी के साथ बने रहने की बाध्यता हो — अन्यथा वह चुनाव ही न लड़े। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से दोनों गुटों के बीच सांसदों और विधायकों की वफादारी को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद जारी है।
वेनेजुएला भूकंप पर मानवीय संवेदना
दुबे ने वेनेजुएला में आए भूकंप पर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, इस आपदा में हजारों लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत के वेनेजुएला के साथ ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंध रहे हैं, इसलिए इस संकट की घड़ी में भारत सरकार को मानवीय सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी एकजुट होकर राहत कार्य में सहयोग देने की अपील की।
आपातकाल की बरसी और लोकतंत्र की रक्षा
दुबे ने 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को 'काला दिन' बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को अजर-अमर बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है और सरकार को ऐसी परिस्थितियाँ नहीं बनने देनी चाहिए जहाँ फिर से इमरजेंसी की नौबत आए। गौरतलब है कि प्रतिपक्षी दल हर वर्ष 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाते हैं।
बिहार एनकाउंटर और NEET विवाद पर प्रतिक्रिया
दुबे ने बिहार में भरत तिवारी के एनकाउंटर को 'फर्जी एनकाउंटर' करार देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की। NEET पेपर विवाद पर उन्होंने कहा कि विपक्ष के दबाव के बाद पुनः परीक्षा हुई, लेकिन यह खुशी का नहीं, आत्मचिंतन का विषय है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर कार्रवाई की माँग दोहराई, यह कहते हुए कि जब तक ऐसा नहीं होता, जनता को केंद्र सरकार की मंशा पर भरोसा नहीं होगा।
मुंबई मानसून कुप्रबंधन और महापौर के बयान पर आपत्ति
मुंबई में मानसून के दौरान नाले में हुए हादसे और नगर निगम अधिकारियों की कथित असंवेदनशीलता पर दुबे ने कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, मुंबई के महापौर का यह बयान कि नाले में गिरा व्यक्ति 'नाटक' कर रहा था, 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' है। दुबे ने याद दिलाया कि जो लोग आज सत्ता में हैं, वही पहले ऐसे हादसों पर विपक्ष को कोसते थे। उन्होंने कहा कि मानसून देर से आने के कारण नाला सफाई के लिए पर्याप्त समय था, फिर भी प्रशासन ने इसका उपयोग नहीं किया — जो सरकार की विफलता को उजागर करता है। आने वाले दिनों में मुंबई में मानसून की तीव्रता को देखते हुए यह सवाल और प्रासंगिक हो जाएगा।