शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे बोले — निष्कासन की खबर बेबुनियाद, पार्टी को बदनाम करने की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 सितंबर 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी से निष्कासित किए जाने की तमाम खबरें पूरी तरह निराधार और फर्जी हैं। दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की अफवाहें फैलाकर पार्टी को साजिशन बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
दुबे का स्पष्टीकरण
आनंद दुबे ने कहा, 'जिस पार्टी का मैं प्रवक्ता हूँ, उसे भी नहीं पता कि मुझे कौन निकाल रहा है। जिस व्यक्ति को — यानी मुझे — निकाला जाना बताया जा रहा है, उसे खुद इसकी कोई जानकारी नहीं है। फिर भी कुछ लोग ऐसी खबरें चला रहे हैं कि आनंद दुबे को पार्टी से हटाया, निकाला, बर्खास्त या पद-मुक्त कर दिया गया है।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी इन खबरों को अफवाह करार दिया है।
निष्कासन का दावा — क्या थी पूरी पृष्ठभूमि
मंगलवार की सुबह शिवसेना (यूबीटी) के लेटरहेड पर एक बयान जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि पंडित अवधेश शुक्ला द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और तथ्यों के आधार पर अनिल देसाई ने आनंद दुबे को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया है और संबंधित संगठनात्मक पदाधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है। इसी बयान के बाद विवाद खड़ा हुआ।
एसआईआर पर दुबे की चेतावनी
दुबे ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'कोई भी एसआईआर का विरोध नहीं कर रहा — यह जरूरी प्रक्रिया है और समय-समय पर होनी चाहिए। लेकिन एसआईआर को राजनीतिक पार्टियों को तोड़ने, कमज़ोर करने, नाम हटाने और अपने नाम जोड़ने के हथियार के रूप में नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए।' उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में यही हो रहा है।
पार्टी की प्रतिक्रिया
आनंद दुबे के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पार्टी ने दुबे को नहीं निकाला है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के भीतर अंदरूनी खींचतान की खबरें आती रहती हैं। गौरतलब है कि इस तरह के 'फर्जी निष्कासन पत्र' या विवादित आंतरिक बयानों का सिलसिला पार्टियों में उथल-पुथल के दौर में पहले भी देखा जा चुका है।
आगे क्या
फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) की ओर से कोई औपचारिक लिखित खंडन सार्वजनिक नहीं हुआ है। आनंद दुबे ने संकेत दिया है कि वे पार्टी में अपनी भूमिका जारी रखेंगे और कथित साजिश के पीछे के लोगों की पहचान उजागर करने की माँग करेंगे।