शिवसेना (शिंदे) में शामिल आनंद दुबे बोले — 'मैं अपने घर वापस आ गया हूं'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने वाले नेता आनंद दुबे ने 17 अक्टूबर 2026 को इसे 'घर वापसी' करार दिया। उन्होंने कहा कि शिंदे की 'नेशन फर्स्ट' विचारधारा उनकी अपनी सोच से पूरी तरह मेल खाती है, इसलिए यह कदम उनके लिए स्वाभाविक था।
घर वापसी की भावना
दुबे ने अपनी पार्टी बदलने को दलबदल नहीं, बल्कि मूल विचारधारा की ओर लौटना बताया। उन्होंने कहा, 'मैं शिवसेना में ही था। बीच में उस पार्टी का नाम शिवसेना (यूबीटी) हो गया था और अब मैं फिर शिवसेना में आ गया।' उन्होंने बाला साहेब ठाकरे के हिंदुत्व और देश-प्रथम के मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि यही राह एकनाथ शिंदे चल रहे हैं।
दुबे ने कहा कि वे एनडीए परिवार में शामिल होकर पूरे देश में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार कर सकेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के वैश्विक प्रभाव पर भी आस्था जताई।
खड़गे के पत्र पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने पर दुबे ने कहा कि विपक्ष को संवाद और सकारात्मक राजनीति का अधिकार है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि देश तोड़ने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने या अराजकता फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विशेष सत्र बुलाने के सवाल पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उचित बातचीत के बाद निर्णय लेंगे।
रक्षा मंत्री के बयान पर समर्थन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा विपक्ष पर साधे गए निशाने का दुबे ने पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीतिक जमीन को गहराई से समझते हैं और उनका यह कहना 'शत-प्रतिशत सही' है कि रायबरेली और अमेठी में समाजवादी पार्टी व कांग्रेस का गठबंधन होता है।
दुबे ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई खास आधार नहीं रहा है और 2012 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी की आखिरी सरकार थी। उनके अनुसार अब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता ने अपना रास्ता चुन लिया है।
भारत-अमेरिका व्यापार पर टिप्पणी
भारत-अमेरिका टैरिफ के सवाल पर दुबे ने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मामला है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस पर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कोई आधिकारिक समझौता या दस्तावेज हस्ताक्षरित नहीं होता, तब तक सरकार का एकमात्र लक्ष्य भारतीय व्यापारियों और नागरिकों का अधिकतम हित सुनिश्चित करना है।
आनंद दुबे की यह शिवसेना (शिंदे) में वापसी ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र की राजनीति में पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी है और एनडीए अपने आधार को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।