12 अक्टूबर 2026
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शिवसेना (UBT) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे का इस्तीफा, बोले — 'शरजील इमाम या उमर खालिद नहीं हैं मेरे आदर्श'

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शिवसेना (UBT) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे का इस्तीफा, बोले — 'शरजील इमाम या उमर खालिद नहीं हैं मेरे आदर्श'

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने उद्धव ठाकरे की पार्टी से इस्तीफा दे दिया — और जाते-जाते तीखा संदेश दिया कि शरजील इमाम या उमर खालिद उनके आदर्श नहीं। पहलगाम हमले के बाद पार्टी की कार्यशैली से नाराज़गी इस विदाई की असली वजह बनी।

मुख्य बातें

आनंद दुबे ने 12 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (यूबीटी) की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया।
दुबे ने कहा कि उनके आदर्श शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से प्रेरित लोग हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पार्टी के रुख से असहमति को इस्तीफे की बड़ी वजह बताया।
2024 विधानसभा चुनाव और मुंबई महानगरपालिका राजनीति में काम करने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलने का आरोप।
दुबे ने कहा — इस्तीफे की बात कहने के बाद पार्टी की ओर से कोई हाल पूछने नहीं आया।

शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दुबे ने पार्टी की कार्यशैली और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उसके रुख को लेकर खुलकर असहमति जताई।

इस्तीफे की वजह और भावुक बयान

दुबे ने कहा कि पार्टी और व्यक्ति से ऊपर देश होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'देश सबसे पहले आता है। पार्टी बाद में और व्यक्ति उससे भी बाद में।' उन्होंने पार्टी छोड़ने के निर्णय को 'बेहद पीड़ादायक' बताते हुए कहा कि जिस तरह कोई अपना घर छोड़ता है उसे दुख होता है, वैसे ही उन्हें भी है — 'लेकिन जहाँ विचार और दिल नहीं मिलते, वहाँ आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।'

गौरतलब है कि दुबे ने 2024 विधानसभा चुनाव और मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका आरोप है कि इस्तीफे की बात कहने के बाद पार्टी की ओर से कोई उनका हाल पूछने तक नहीं आया।

पहलगाम हमले के बाद बढ़ी खाई

दुबे ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद वे अपने सहयोगी गुलाबचंद मोरे के साथ वहाँ गए और फारूक अब्दुल्ला तथा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के साथ खड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब पहलगाम हमले के बाद राष्ट्रीय एकता बनाम विपक्षी राजनीति का सवाल विभिन्न दलों में आंतरिक तनाव का कारण बना है।

विचारधारा पर तीखा प्रहार

दुबे ने शिवसेना (यूबीटी) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उनके आदर्श शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हैं। उनके शब्दों में, उनके नायक वे लोग हैं जिन्होंने देश और समाज के लिए साहसिक कार्य किए। उन्होंने विपक्षी दलों को संदेश देते हुए कहा, 'राजनीति कीजिए, सरकार की आलोचना कीजिए, महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ आंदोलन कीजिए — लेकिन देश के खिलाफ खड़े मत होइए।'

दुबे ने यह भी कहा कि उनमें बालासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित एक शिवसैनिक की भावना हमेशा रही है, और संकट के समय सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए।

शिवसेना (UBT) में नई दरार

यह ऐसे समय में सामने आया है जब उद्धव ठाकरे की पार्टी पहले से ही महाराष्ट्र की राजनीति में कठिन दौर से गुज़र रही है। 2024 विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद आंतरिक असंतोष की खबरें आती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि पार्टी के कुछ गठबंधन और बयानबाज़ी मूल शिवसैनिक विचारधारा से दूर जाती प्रतीत होती है।

आगे क्या

दुबे ने अभी तक किसी नई पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनके इस्तीफे से शिवसेना (यूबीटी) पर नए दबाव की संभावना है, विशेषकर मुंबई महानगरपालिका चुनावों की तैयारी के मद्देनज़र। पार्टी की ओर से दुबे के बयानों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब यह दरार और गहरी हुई। जो बात मुख्यधारा की कवरेज चूक रही है वह यह है कि दुबे का नाम शरजील इमाम और उमर खालिद के साथ रखना महज़ व्यक्तिगत बयानबाज़ी नहीं — यह शिवसेना (UBT) के गठबंधन-धर्म पर सीधा राजनीतिक सवाल है, जिसका जवाब पार्टी को देना होगा।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद दुबे ने शिवसेना (यूबीटी) क्यों छोड़ी?
आनंद दुबे ने पार्टी की कार्यशैली और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उसके रुख से असहमति के चलते इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पार्टी का रवैया उनके विचारों से मेल नहीं खाता था, और 2024 विधानसभा चुनाव में मेहनत के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।
आनंद दुबे ने शरजील इमाम और उमर खालिद का नाम क्यों लिया?
दुबे ने स्पष्ट किया कि शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी उनके आदर्श नहीं हैं — यह बयान शिवसेना (यूबीटी) की विचारधारा और उसके कुछ गठबंधन सहयोगियों पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुसार उनके नायक वे लोग हैं जिन्होंने देश के लिए साहसिक कदम उठाए।
आनंद दुबे शिवसेना (यूबीटी) में क्या पद पर थे?
आनंद दुबे शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे। उन्होंने 12 अक्टूबर 2026 को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से भी इस्तीफा दिया।
क्या आनंद दुबे किसी नई पार्टी में शामिल होंगे?
अभी तक दुबे ने किसी नई पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनके अगले राजनीतिक कदम पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
शिवसेना (यूबीटी) ने दुबे के इस्तीफे पर क्या कहा?
दुबे के इस्तीफे के बाद शिवसेना (यूबीटी) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दुबे ने खुद बताया कि इस्तीफे की बात कहने के बाद पार्टी से कोई उनका हाल पूछने तक नहीं आया।
राष्ट्र प्रेस
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