भाजपा नेता संजय सरावगी बोले — 'भाजपा पार्टियां नहीं तोड़ती', TMC-शिवसेना UBT बगावत पर दिया जवाब
सारांश
मुख्य बातें
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने 17 जून 2026 को पटना में स्पष्ट किया कि भाजपा पर दूसरे दलों को तोड़ने के जो आरोप लग रहे हैं, वे निराधार हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसदों की बगावत और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) से 6 सांसदों के अलग होने की अटकलें तेज हैं।
TMC बगावत पर भाजपा का रुख
सरावगी ने कहा, "भाजपा पार्टियां नहीं तोड़ती। पश्चिम बंगाल में जो हुआ, उसे देखिए — ममता बनर्जी की जन-विरोधी नीतियों के 15 साल बाद कई सांसदों को लगता है कि वे TMC के चुनाव चिह्न पर दोबारा नहीं जीत सकते।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि ममता बनर्जी और TMC के खिलाफ जनता में गहरी नाराजगी है, इसीलिए नेता खुद पार्टी छोड़ रहे हैं। उनके अनुसार, यदि ये नेता NDA के सहयोगियों के साथ आते हैं तो इससे NDA सरकार और मजबूत होगी।
शिवसेना UBT पर सरावगी का तर्क
महाराष्ट्र की स्थिति पर सरावगी ने कहा कि शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर वह विचारधारा छोड़ दी है जो बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व की नींव पर खड़ी थी। उन्होंने कहा, "बालासाहेब ठाकरे कांग्रेस और उसकी नीतियों के कड़े विरोधी थे। नतीजतन, वहाँ भी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला दिख रहा है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि NDA में शामिल होने वाले नेताओं का पार्टी स्वागत करती है।
बागी सांसदों की गतिविधियाँ
गौरतलब है कि TMC के करीब 20 सांसद ममता बनर्जी से बगावत की स्थिति में बताए जा रहे हैं। वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना-UBT से 6 सांसदों के अलग होने की चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार, बागी सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की है — जो इस राजनीतिक हलचल को और गहरा बनाती है।
पटना विवाद और नीट पेपर लीक पर प्रतिक्रिया
सरावगी ने पटना में फैजल खान (खान सर) और रौशन आनंद के बीच चल रहे विवाद पर कहा कि कानून तोड़ने वाले किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस मामले पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। नीट पेपर लीक मामले पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है और संभावित लीक को रोकने के लिए संबंधित एप बंद किए गए हैं।
बिहार में सहायता शिविर और आगे की योजना
बिहार भाजपा अध्यक्ष ने बताया कि राज्य के सभी प्रखंडों में प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को दो-तीन पंचायतों में सहायता शिविर लगाए जाएँगे। इन शिविरों में लिखित आवेदन देने पर 30 दिनों के भीतर अधिकारियों को निष्पादन अनिवार्य होगा — अन्यथा 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित हो जाएंगे। इसके अलावा, केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राज्यभर के प्रखंडों में दो दिवसीय शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें केंद्र और राज्य की योजनाओं के लिए आवेदन किया जा सकता है। सरावगी ने कहा कि यह सभी पहल बिहार की आम जनता के हित में हैं और आने वाले समय में इनका विस्तार किया जाएगा।