मिथुन मन्हास: घरेलू क्रिकेट के 'सुपरस्टार' जो बने BCCI के पहले गैर-अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी मिथुन मन्हास ने घरेलू क्रिकेट में दशकों तक शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन राष्ट्रीय टीम की जर्सी कभी नहीं पहन सके। इसके बावजूद, उन्होंने 28 सितंबर 2025 को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष पद की शपथ ली — और इस तरह वह BCCI के इतिहास में एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेले बिना सर्वोच्च पद पर पहुँचने वाले पहले व्यक्ति बन गए।
प्रारंभिक जीवन और क्रिकेट की शुरुआत
मिथुन मन्हास का जन्म 12 अक्टूबर 1979 को जम्मू-कश्मीर में हुआ। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि रखने वाले मन्हास ने इस खेल को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया और अथक परिश्रम के बल पर जल्द ही घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 1997 में पदार्पण किया।
घरेलू क्रिकेट में उपलब्धियाँ
मन्हास का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड अत्यंत प्रभावशाली रहा। 157 फर्स्ट-क्लास मैचों में उन्होंने 45 की औसत से 9,714 रन बनाए, जिसमें 27 शतक और 49 अर्धशतक शामिल हैं। गेंदबाजी में भी उन्होंने 40 विकेट झटके। लिस्ट-ए फॉर्मेट में 130 मुकाबलों में उन्होंने 4,126 रन बनाने के साथ 25 विकेट भी हासिल किए।
गौरतलब है कि उस दौर में राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे महारथियों की मौजूदगी के कारण मन्हास को भारतीय टीम में जगह नहीं मिल सकी — यह ऐसे समय में आया जब घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन लगातार उत्कृष्ट था।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट का कायाकल्प
खेल के बाद मन्हास ने क्रिकेट ऑपरेशन्स डायरेक्टर के पद पर रहते हुए जम्मू-कश्मीर क्रिकेट को नई दिशा दी। उन्होंने बुनियादी ढाँचे में सुधार, लाल मिट्टी की पिचों के निर्माण और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की पहचान जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया। उनकी देखरेख में उमरान मलिक समेत कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए।
उनके प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम यह रहा कि जम्मू-कश्मीर टीम रणजी ट्रॉफी 2025-26 का खिताब जीतने में सफल रही — यह उपलब्धि पहले कभी हासिल नहीं हुई थी।
BCCI अध्यक्ष पद तक का सफर
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट में उल्लेखनीय योगदान देने के बाद 28 सितंबर 2025 को मन्हास को रोजर बिन्नी के उत्तराधिकारी के रूप में BCCI का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति कई कारणों से ऐतिहासिक है — वह BCCI के इतिहास में पहले ऐसे अध्यक्ष हैं जिन्होंने एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला।
भारतीय क्रिकेट प्रशासन पर असर
मन्हास की नियुक्ति यह संकेत देती है कि BCCI प्रशासन में अब अंतरराष्ट्रीय खेल अनुभव से अधिक जमीनी विकास कार्य और संगठनात्मक क्षमता को महत्व दिया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह बदलाव भारतीय क्रिकेट की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है, जहाँ घरेलू ढाँचे और खिलाड़ी विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में BCCI की नीतियाँ और खिलाड़ी चयन प्रक्रिया में क्या बदलाव आते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।