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अभिमन्यु मिथुन: एथलेटिक्स छोड़ क्रिकेट अपनाया, 103 फर्स्ट-क्लास मैचों में 338 विकेट और जन्मदिन पर हैट्रिक का कमाल

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अभिमन्यु मिथुन: एथलेटिक्स छोड़ क्रिकेट अपनाया, 103 फर्स्ट-क्लास मैचों में 338 विकेट और जन्मदिन पर हैट्रिक का कमाल

सारांश

एथलेटिक्स छोड़ 17 साल में क्रिकेट थामने वाले अभिमन्यु मिथुन ने 103 फर्स्ट-क्लास मैचों में 338 विकेट और तीनों बड़े घरेलू टूर्नामेंटों में हैट्रिक का अनोखा कारनामा किया — भारतीय क्रिकेट की वह अनकही कहानी, जहाँ घरेलू महानता अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह नहीं खिल पाई।

मुख्य बातें

अभिमन्यु मिथुन का जन्म 25 अक्टूबर 1989 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ।
उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में डिस्कस थ्रो छोड़ क्रिकेट अपनाया और 2009 में कर्नाटक की ओर से घरेलू पदार्पण किया।
103 फर्स्ट-क्लास मैचों में 338 विकेट — कर्नाटक के प्रमुख तेज गेंदबाज के रूप में पहचान।
2019 में जन्मदिन (25 अक्टूबर) पर विजय हजारे ट्रॉफी फाइनल में तमिलनाडु के खिलाफ हैट्रिक ली।
सैयद मुश्ताक अली सेमीफाइनल में हरियाणा के खिलाफ एक ओवर में 5 विकेट झटके।
रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली — तीनों में हैट्रिक लेने वाले इकलौते गेंदबाज ; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 टेस्ट में 9 विकेट ।

भारत के पूर्व तेज गेंदबाज अभिमन्यु मिथुन घरेलू क्रिकेट के उन विरल खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने 103 फर्स्ट-क्लास मैचों में 338 विकेट चटकाकर अपनी पीढ़ी के सबसे धारदार देसी तेज गेंदबाजों में अपना नाम दर्ज कराया। इतने बड़े घरेलू रिकॉर्ड के बावजूद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर महज 4 टेस्ट और कुछ एकदिवसीय मुकाबलों तक सिमटा रहा — एक ऐसी विडंबना जो भारतीय क्रिकेट की गहरी प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।

एथलेटिक्स से क्रिकेट तक का सफर

25 अक्टूबर 1989 को बेंगलुरु, कर्नाटक में जन्मे अभिमन्यु मिथुन का बचपन से खेलों से गहरा लगाव था। किशोरावस्था में उन्होंने डिस्कस थ्रो में करियर बनाने की कोशिश की, लेकिन 17 वर्ष की उम्र में एक मित्र की सलाह पर उन्होंने क्रिकेट कैंप जॉइन किया। बस यही वह मोड़ था जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

6 फुट 2 इंच की लंबी काठी और कुदरती गति के बूते अभिमन्यु ने बल्लेबाजों को परेशान करना शुरू किया। तेज, उछाल भरी गेंदबाजी ने उन्हें घरेलू सर्किट में जल्द ही अलग पहचान दिलाई।

घरेलू क्रिकेट में दमदार उपस्थिति

अभिमन्यु ने 2009 में कर्नाटक की तरफ से घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया और शीघ्र ही टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज बन गए। 103 फर्स्ट-क्लास मैचों में उन्होंने कुल 338 विकेट हासिल किए — एक आँकड़ा जो उनकी निरंतरता और दक्षता को सिद्ध करता है।

गौरतलब है कि उन्होंने रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी — तीनों प्रमुख घरेलू टूर्नामेंटों में हैट्रिक लेने का दुर्लभ कारनामा किया। भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे इकलौते गेंदबाज हैं।

जन्मदिन पर हैट्रिक और एक ओवर में 5 विकेट

2019 में अभिमन्यु ने अपने जन्मदिन — 25 अक्टूबर — के मौके पर विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में तमिलनाडु के खिलाफ हैट्रिक ली। वे इस टूर्नामेंट में कर्नाटक की ओर से हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बने।

इसी वर्ष सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में हरियाणा के खिलाफ उन्होंने एक और अविश्वसनीय प्रदर्शन किया — छह गेंदों में 5 विकेट झटककर पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया। हैट्रिक और एक ओवर में 5 विकेट — यह संयोजन उनकी गेंदबाजी की धार और मानसिक दृढ़ता का जीवंत उदाहरण है।

अंतरराष्ट्रीय करियर: संभावना और सीमाएँ

अभिमन्यु ने 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय मुकाबले से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। उसी वर्ष श्रीलंका के खिलाफ उनका टेस्ट डेब्यू हुआ। उन्होंने 4 टेस्ट मैचों में 9 विकेट और एकदिवसीय प्रारूप में 3 विकेट लिए।

यह ऐसे समय में आया जब भारतीय पेस अटैक में जहीर खान जैसे दिग्गज मौजूद थे, और युवा गेंदबाजों के लिए जगह बनाना असाधारण रूप से कठिन था। अभिमन्यु के आँकड़े बताते हैं कि प्रतिभा और घरेलू प्रदर्शन अकेले अंतरराष्ट्रीय पारी की गारंटी नहीं देते।

विरासत और आगे की राह

अभिमन्यु मिथुन का करियर भारतीय क्रिकेट की उस अनकही कहानी का हिस्सा है, जहाँ दर्जनों असाधारण घरेलू खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में कभी वह स्थान नहीं पा सके जिसके वे हकदार थे। तीनों प्रमुख घरेलू टूर्नामेंटों में हैट्रिक और जन्मदिन पर हैट्रिक जैसे दुर्लभ कारनामे उन्हें घरेलू क्रिकेट की लोककथाओं में हमेशा के लिए अमर बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय प्रतिभा की उस विडंबना की है जहाँ घरेलू सर्किट में तीनों बड़े टूर्नामेंटों में हैट्रिक लेना भी राष्ट्रीय टीम में स्थायी जगह की गारंटी नहीं दे सका। 338 फर्स्ट-क्लास विकेट और अनेक यादगार प्रदर्शन के बावजूद महज 4 टेस्ट — यह आँकड़ा बताता है कि चयन प्रक्रिया में प्रदर्शन से परे कई कारक काम करते हैं। तीनों प्रमुख घरेलू प्रारूपों में हैट्रिक का रिकॉर्ड उनकी विशिष्टता को रेखांकित करता है, फिर भी मुख्यधारा की क्रिकेट कवरेज इन खिलाड़ियों को वह सम्मान नहीं देती जो उनके आँकड़े माँगते हैं।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिमन्यु मिथुन कौन हैं और उनका क्रिकेट करियर कैसा रहा?
अभिमन्यु मिथुन बेंगलुरु के पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज हैं, जिन्होंने 103 फर्स्ट-क्लास मैचों में 338 विकेट लिए। उन्होंने 2010 में भारत के लिए टेस्ट और वनडे डेब्यू किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर सीमित रहा।
अभिमन्यु मिथुन ने अपने जन्मदिन पर क्या कारनामा किया?
25 अक्टूबर 2019 को अपने जन्मदिन पर अभिमन्यु ने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में तमिलनाडु के खिलाफ हैट्रिक ली। वे कर्नाटक की ओर से इस टूर्नामेंट में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बने।
अभिमन्यु मिथुन ने एक ओवर में 5 विकेट कब और कहाँ लिए?
2019 के सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में हरियाणा के खिलाफ अभिमन्यु ने छह गेंदों में 5 विकेट झटके। इस मैच में उन्होंने हैट्रिक भी ली।
क्रिकेट से पहले अभिमन्यु मिथुन किस खेल में थे?
अभिमन्यु मिथुन किशोरावस्था में डिस्कस थ्रो में करियर बनाना चाहते थे। 17 साल की उम्र में एक मित्र की सलाह पर उन्होंने क्रिकेट कैंप जॉइन किया और इसी के बाद उनका झुकाव पूरी तरह क्रिकेट की तरफ हो गया।
अभिमन्यु मिथुन का तीनों घरेलू टूर्नामेंटों में हैट्रिक का रिकॉर्ड क्या है?
अभिमन्यु मिथुन रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट — तीनों में हैट्रिक लेने वाले भारतीय घरेलू क्रिकेट के इकलौते गेंदबाज हैं। यह उपलब्धि उन्हें घरेलू क्रिकेट इतिहास में विशेष दर्जा देती है।
राष्ट्र प्रेस
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