अभिमन्यु ईश्वरन का भारत के लिए खेलने का सपना बरकरार, 117 मैचों में 8,632 रन के बावजूद डेब्यू का इंतज़ार
सारांश
मुख्य बातें
बंगाल के दाएं हाथ के बल्लेबाज़ अभिमन्यु ईश्वरन ने स्पष्ट किया है कि भारतीय टेस्ट टीम के लिए डेब्यू करने का उनका सपना आज भी उतना ही जीवंत है। 31 साल की उम्र में 117 प्रथम श्रेणी मैचों में 8,632 रन बना चुके ईश्वरन घरेलू क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में से एक हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय पदार्पण उनसे दूर है। रणजी ट्रॉफी 2026-27 के दूसरे दौर में सर्विसेज़ के खिलाफ बंगाल के लिए 56 रन की पारी खेलने के बाद उन्होंने यह भावना व्यक्त की।
करियर का सफ़र और आँकड़े
2013 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बंगाल के लिए डेब्यू करने वाले ईश्वरन अब अपना 118वाँ फर्स्ट-क्लास मैच खेल रहे हैं। 200 पारियों में उन्होंने 27 शतक और 38 अर्धशतक जड़े हैं, और उनका सर्वाधिक स्कोर 233 रन है। जुलाई 2018 से वह इंडिया A का भी हिस्सा रहे हैं — इस दौरान 32 मैच खेले — और टेस्ट टीम में कॉल-अप भी मिला, परंतु कैप पहनने का अवसर अभी तक नहीं आया।
ईश्वरन के अपने शब्दों में
ईश्वरन ने कहा, 'जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, तो सपना हमेशा देश के लिए खेलना था, और वह सपना अभी भी है। जब आप टीम में होते हैं और फिर आपको ड्रॉप कर दिया जाता है, तो आपके दिमाग में हमेशा कुछ बातें चलती रहती हैं — 'मैं फिर से क्यों नहीं?' ऐसे मामले हुए हैं, लेकिन कोई बात नहीं, आपको इसकी आदत हो जाती है। यह ज़िंदगी का हिस्सा है। समय के साथ, आप सीखते हैं।'
उन्होंने अपनी मानसिकता को और स्पष्ट करते हुए जोड़ा, 'आपका काम हमेशा यह होता है कि आप जिस भी टीम के लिए खेल रहे हों, उसके लिए अच्छा करें। एक खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज यह होता है कि वह हर दिन खेले और टीम को जो चाहिए वह करे। मुझे लगता है कि मैं इस समय इसका और अपने क्रिकेट का मज़ा ले रहा हूँ।'
बंगाल के प्रति समर्पण
ईश्वरन ने बंगाल को अपनी जड़ और रास्ता बताया। उन्होंने कहा, 'मेरा लक्ष्य हमेशा इंडिया के लिए खेलना है। उससे पहले, मैं बंगाल के लिए खेलना चाहता था, क्योंकि वही जड़ है, वही रास्ता है। बंगाल को लीड करना मेरे लिए बहुत अच्छा एहसास है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस रणजी सीज़न में बंगाल के लिए ट्रॉफी जीतना उनका प्राथमिक लक्ष्य है।
इंग्लैंड दौरे का अधूरा सपना
गौरतलब है कि 2025 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम के स्क्वाड में शामिल होने के बावजूद ईश्वरन को एकादश में जगह नहीं मिली। यह उनके करियर का एक ऐसा मोड़ था जब अंतरराष्ट्रीय पदार्पण की संभावना सबसे नज़दीक लगी, लेकिन फिर भी हाथ से फिसल गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय टेस्ट टीम में शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों की प्रतिस्पर्धा अत्यंत कड़ी बनी हुई है।
आगे क्या
ईश्वरन का लगातार प्रदर्शन चयनकर्ताओं के सामने एक जटिल सवाल खड़ा करता है — घरेलू क्रिकेट में निरंतरता का पुरस्कार कब मिलेगा? रणजी ट्रॉफी के शेष दौरों में उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि क्या वह एक बार फिर चयन की दौड़ में आगे आते हैं।