क्या प्रख्यात उद्योगपति एमएल मित्तल का निधन पीएम मोदी से जुड़ी यादों को पीछे छोड़ गया?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या प्रख्यात उद्योगपति एमएल मित्तल का निधन पीएम मोदी से जुड़ी यादों को पीछे छोड़ गया?

सारांश

प्रख्यात उद्योगपति एमएल मित्तल का निधन, पीएम मोदी के साथ उनके संबंधों की अनकही कहानियों से भरा हुआ। जानें कैसे मित्तल ने मोदी की सादगी और अनुशासन को देखा और उनकी निजी आदतों के राज़। इस लेख में छिपी हैं कई दिलचस्प बातें।

मुख्य बातें

सादगी और अनुशासन मोदी जी की पहचान हैं।
व्यक्तिगत संबंधों में आत्म-अनुशासन की महत्ता।
मित्तल ने मोदी के सार्वजनिक मुद्दों पर स्पष्ट सोच की सराहना की।
मोदी जी का जीवन सरलता और संवेदनशीलता से भरा हुआ है।
विदेश यात्रा के दौरान मित्तल की आंखों से मोदी की दिनचर्या को देखना।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रख्यात उद्योगपति एम एल मित्तल का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके दशकों पुराने व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ी कई यादें भी उभरकर सामने आई हैं, जो 1990 के दशक में मोदी के एक युवा भाजपा नेता के रूप में सक्रिय रहने के दौर की हैं। मित्तल अक्सर उस समय के निजी अनुभव साझा करते थे, जिनसे मोदी के अनुशासन, सादगी और जीवनशैली की झलक मिलती है।

करीब 25 वर्ष पहले, भाजपा के राष्ट्रीय नेता के रूप में एक विदेश दौरे के दौरान नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो गए थे। इस यात्रा के दौरान वे एम एल मित्तल के निवास पर ठहरे थे। मित्तल बताया करते थे कि उस समय भी मोदी की सरल जीवनशैली और स्पष्ट सोच ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था।

मित्तल के अनुसार, “वे कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ आए थे और मेरे चार बेडरूम वाले अपार्टमेंट में ठहरे थे। एयर कंडीशन वाले कमरे वरिष्ठ नेताओं को दे दिए गए। मैंने मोदी जी से आग्रह किया कि वे मेरा कमरा ले लें या मैं उनके लिए होटल की व्यवस्था कर दूं, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कपड़े इस्त्री करने वाले एक छोटे से यूटिलिटी रूम में रहना चुना। वहां न एसी था, न ही अटैच बाथरूम, फिर भी उन्होंने कहा कि यह उनके लिए पर्याप्त है।”

मित्तल को याद है कि वे (मोदी जी) रोज सुबह करीब 5 बजे उठ जाते थे, खुद चाय बनाते थे और स्टाफ के आने से पहले सभी के लिए नाश्ते की व्यवस्था कर देते थे। वे कहा करते थे कि “इस तरह का आत्म-अनुशासन और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता उस समय बहुत कम देखने को मिलती थी।”

मित्तल के मन पर सबसे गहरी छाप मोदी की स्पष्ट सोच और सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी समझ ने छोड़ी। किसी औपचारिक पद पर न होते हुए भी वे गरीबी उन्मूलन और वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका जैसे विषयों पर आत्मविश्वास और विनम्रता के साथ बात करते थे।

मित्तल ने यह भी याद किया कि जब वे दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्यरत नरेंद्र मोदी से मिलने गए, तो उन्हें एक सांसद आवास के भीतर बेहद साधारण कमरे में रहते देख आश्चर्य हुआ। मित्तल ने बताया था, “उन्होंने मुझे बेहद अपनापन दिखाया, स्वयं दीपक जलाया और पीने का पानी भी खुद लेकर आए। जिम्मेदारियां बढ़ने के बावजूद उनकी निजी आदतों में कोई बदलाव नहीं आया था।”

कई यात्राओं के दौरान मित्तल ने पीएम मोदी की कठोर दिनचर्या और सादगी भरे विकल्पों को करीब से देखा। वे अक्सर होटलों में रुकने से बचते थे, स्वयंसेवकों या स्थानीय कार्यकर्ताओं के यहां ठहरना पसंद करते थे और भोजन भी अत्यंत साधारण रखते थे। मित्तल बताते थे, “भूख लगने पर वे गुड़ और मूंगफली निकालकर कहते थे, ‘इतना मेरे लिए काफी है।’”

उन्होंने यह भी साझा किया कि विदेश यात्राओं के दौरान नरेंद्र मोदी को मिलने वाले सीमित दैनिक भत्ते में से वे कुछ राशि बचाकर शेष पार्टी मुख्यालय में जन हित के कार्यों के लिए लौटा देते थे। मित्तल ने कहा, “बाद में जब भी मैं गुजरात गया, उन्होंने मेरा पूरा ध्यान रखा, लेकिन खुद चुपचाप फलों पर ही निर्भर रहते थे।”

एम एल मित्तल की ये स्मृतियां ऐसे समय की गवाही देती हैं, जब साझा मूल्यों पर आधारित एक संबंध बना, बहुत पहले, जब पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय मंच पर उभरने से पहले ही अपनी सादगी, अनुशासन और सेवा भाव के लिए पहचाने जाते थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि एमएल मित्तल का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच का रिश्ता हमें यह सिखाता है कि असली सफलता सादगी और अनुशासन में निहित होती है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएल मित्तल का योगदान क्या था?
एमएल मित्तल ने वैश्विक स्तर पर भारतीय उद्योग को नई दिशा दी और उनके व्यवसायिक निर्णयों ने कई लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
मोदी और मित्तल के संबंध कैसे थे?
मोदी और मित्तल के बीच का संबंध व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों ही स्तर पर गहरा था, जिसमें अनुशासन और सादगी की साझा कद्र थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले