मध्य प्रदेश पुलिस की नई व्यवस्था: गिरफ्तारी के लिए लिखित कारण देना अब अनिवार्य
सारांश
Key Takeaways
- गिरफ्तारी के लिए लिखित आधार देना अनिवार्य है।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जानकारी समझने योग्य होनी चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है।
- गिरफ्तारी की प्रक्रिया में सुधार लाने का प्रयास है।
- नियमों का पालन न करने पर गिरफ्तारी अवैध हो सकती है।
भोपाल, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गिरफ्तारी के अधिकारों को सशक्त बनाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने एक नई प्रक्रिया की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत, अब सभी पुलिसकर्मियों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे हर गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के लिखित कारण (गिरफ्तारी का आधार) प्रदान करें।
इस सुधार को कार्यान्वित करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय, भोपाल ने सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और फील्ड इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हाल के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ६ नवंबर २०२५ को दिए अपने आदेश में कहा था कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के कारण बताना उसका मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद २२(१) के तहत आता है।
सर्कुलर में यह स्पष्ट किया गया है कि पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी के स्पष्ट और विशेष कारण लिखित रूप में प्रदान करने होंगे। केवल मौखिक जानकारी देना अब पर्याप्त नहीं होगा। यह जानकारी ऐसी भाषा में होगी जिसे गिरफ्तार व्यक्ति समझ सके, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई भ्रम न हो।
सर्कुलर के अनुसार, गिरफ्तारी के समय पुलिस को लिखित में ठोस कारण देना अनिवार्य होगा। मौखिक सूचना मान्य नहीं होगी। साथ ही, पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह जानकारी स्थानीय भाषा या ऐसी भाषा में हो जिसे गिरफ्तार व्यक्ति पूरी तरह से समझ सके।
यह भी निर्देशित किया गया है कि लिखित कारण गिरफ्तारी के समय ही दिए जाएं, या अधिकतम दो घंटे के भीतर आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले उपलब्ध कराए जाएं। पुलिस को यह भी रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा कि लिखित कारण प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
यह निर्देश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, २०२३ के प्रावधानों के अनुरूप हैं।
मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का पालन न करने पर गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है और अदालत की अवमानना या विभागीय कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में आरोपी की तत्काल रिहाई भी संभव होगी।
पुलिस मुख्यालय ने वरिष्ठ अधिकारियों को इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, ताकि पुलिस व्यवस्था मजबूत रहे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी हो सके।