5 अक्टूबर 2026
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मुंबई में 9 महीनों में बिके 72,804 घर; 2018 के बाद सबसे ऊँचा स्तर, प्रीमियम सेगमेंट ने मारी बाज़ी

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मुंबई में 9 महीनों में बिके 72,804 घर; 2018 के बाद सबसे ऊँचा स्तर, प्रीमियम सेगमेंट ने मारी बाज़ी

सारांश

मुंबई के आवासीय बाज़ार ने 2026 के पहले नौ महीनों में 72,804 घर बेचकर 2018 के बाद का सर्वाधिक आँकड़ा दर्ज किया। ख़ास बात यह है कि किफ़ायती घरों की माँग सिकुड़ रही है और ₹1 करोड़ से ऊपर की संपत्तियाँ बिक्री वृद्धि की असली इंजन बन चुकी हैं।

मुख्य बातें

मुंबई में जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान 72,804 आवासीय इकाइयाँ बिकीं — 2018 के बाद का सर्वाधिक स्तर, सालाना 1 प्रतिशत वृद्धि।
डेवलपर्स ने इस अवधि में 72,673 नई इकाइयाँ लॉन्च कीं — सालाना 13 प्रतिशत अधिक।
₹10 करोड़-₹20 करोड़ श्रेणी में 40% और ₹20 करोड़-₹50 करोड़ में 35% की वृद्धि; देश में ₹50 करोड़+ के बिके 53 में से 41 घर मुंबई में।
मुंबई की भारित औसत कीमत तीसरी तिमाही में 5 प्रतिशत बढ़कर ₹37,064 प्रति वर्ग फुट हुई।
₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री 6 प्रतिशत घटकर 26,136 इकाई रही।
बिना बिका स्टॉक 2 प्रतिशत घटकर 1,55,473 इकाई ; QTS 6.6 से घटकर 6.4 तिमाही हुआ।

मुंबई का आवासीय बाज़ार जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान 2018 के बाद अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया, जब इस अवधि में कुल 72,804 आवासीय इकाइयाँ बिकीं — सालाना आधार पर 1 प्रतिशत की वृद्धि। नाइट फ्रैंक इंडिया की 5 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह आँकड़ा न केवल शहर की माँग की मज़बूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि ख़रीदारों का रुझान तेज़ी से उच्च-मूल्य वाली संपत्तियों की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्ट के अनुसार, इसी नौ-महीने की अवधि में डेवलपर्स ने 72,673 नई आवासीय इकाइयाँ लॉन्च कीं, जो सालाना आधार पर 13 प्रतिशत अधिक है। इससे नई आपूर्ति और माँग लगभग संतुलित बनी रही। बिना बिके स्टॉक की इन्वेंटरी सालाना आधार पर 2 प्रतिशत घटकर लगभग 1,55,473 इकाई रह गई।

तिमाही आधार पर बिक्री में लगातार सुधार देखा गया। पहली तिमाही में 23,185 इकाइयाँ बिकीं, जो तीसरी तिमाही तक बढ़कर 25,449 इकाई हो गईं — 2018 के बाद किसी एकल तिमाही में सबसे ऊँचा आँकड़ा।

प्रीमियम सेगमेंट की अगुवाई

किफ़ायती श्रेणी की तुलना में उच्च-मूल्य वर्ग की माँग कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ी। ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच की इकाइयों की बिक्री 9 प्रतिशत बढ़कर 16,296 इकाई रही। ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ की श्रेणी में 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9,861 इकाइयाँ बिकीं।

₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच की बिक्री 16 प्रतिशत उछली, जबकि ₹10 करोड़ से ₹20 करोड़ और ₹20 करोड़ से ₹50 करोड़ की श्रेणियों में लेनदेन क्रमशः 40 प्रतिशत और 35 प्रतिशत बढ़े। देश के आठ प्रमुख शहरों में ₹50 करोड़ से अधिक कीमत पर बिके कुल 53 घरों में से 41 अकेले मुंबई में थे।

इसके विपरीत, ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री सालाना 6 प्रतिशत घटकर 26,136 इकाई रही, जो कुल बिक्री का 36 प्रतिशत है। ₹50 लाख से ₹1 करोड़ की श्रेणी में भी 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 17,601 इकाइयाँ बिकीं।

मुंबई की राष्ट्रीय हिस्सेदारी

देश के आठ प्रमुख शहरों में इस अवधि के दौरान कुल 2,58,238 घर बिके और 2,79,899 नई इकाइयाँ लॉन्च हुईं — लॉन्चिंग में सालाना 4 प्रतिशत की वृद्धि। इसमें मुंबई की बिक्री में 28 प्रतिशत और लॉन्चिंग में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, जिससे यह देश का सबसे बड़ा आवासीय बाज़ार बना रहा।

गौरतलब है कि मुंबई में भारित औसत आवासीय कीमत 2026 की तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर ₹37,064 प्रति वर्ग फुट हो गई।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

नाइट फ्रैंक इंडिया के गुलाम जिया के अनुसार, बाज़ार की मज़बूती अब तेज़ी से अधिक कीमत वाले घरों की माँग से प्रेरित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई देश का सबसे बड़ा किफ़ायती आवास बाज़ार बना हुआ है, हालाँकि प्रीमियम सेगमेंट बिक्री वृद्धि का मुख्य चालक बनकर उभरा है।

यह ऐसे समय में आया है जब बढ़ती आय और संपन्न ख़रीदारों की निरंतर माँग ने उच्च-मूल्य संपत्तियों में निवेश को प्रोत्साहित किया है।

बाज़ार की गति और आगे की राह

बिक्री की गति में सुधार को दर्शाने वाला 'क्वार्टर्स टू सेल' (QTS) 2026 की तीसरी तिमाही में घटकर 6.4 तिमाही रह गया, जो एक साल पहले 6.6 तिमाही था। यह संकेत देता है कि बाज़ार में स्टॉक पहले की तुलना में तेज़ी से खप रहा है। प्रीमियम और अल्ट्रा-लग्ज़री सेगमेंट में तेज़ी को देखते हुए विश्लेषकों का अनुमान है कि चौथी तिमाही में भी यह रुझान जारी रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

804 इकाइयों का यह आँकड़ा सुर्खियों में चमकदार दिखता है, लेकिन इसकी संरचना एक गहरी असमानता उजागर करती है — किफ़ायती सेगमेंट सिकुड़ रहा है और वृद्धि लगभग पूरी तरह ₹1 करोड़ से ऊपर की संपत्तियों पर टिकी है। यह ऐसे समय में है जब मुंबई पहले से देश का सबसे महँगा आवासीय बाज़ार है और ₹37,064 प्रति वर्ग फुट की औसत कीमत मध्यवर्गीय ख़रीदारों को और दूर धकेल रही है। असली सवाल यह है कि क्या 'मज़बूत बाज़ार' की यह परिभाषा उन लाखों लोगों के लिए भी कुछ मायने रखती है जिनके लिए ₹50 लाख का घर भी पहुँच से बाहर है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में 2026 के पहले नौ महीनों में कितने घर बिके?
नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-सितंबर 2026 में मुंबई में 72,804 आवासीय इकाइयाँ बिकीं, जो सालाना आधार पर 1 प्रतिशत अधिक है और 2018 के बाद का सर्वाधिक आँकड़ा है।
मुंबई में किस कीमत वर्ग के घरों की बिक्री सबसे तेज़ी से बढ़ी?
₹10 करोड़ से ₹20 करोड़ की श्रेणी में 40 प्रतिशत और ₹20 करोड़ से ₹50 करोड़ की श्रेणी में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो सभी श्रेणियों में सबसे तेज़ रही। ₹1 करोड़ से अधिक कीमत वाले घर कुल बिक्री वृद्धि के प्रमुख चालक बनकर उभरे हैं।
मुंबई में किफ़ायती घरों की माँग का क्या हाल है?
₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री सालाना 6 प्रतिशत घटकर 26,136 इकाई रही, जो कुल बिक्री का 36 प्रतिशत है। ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच की बिक्री भी 1 प्रतिशत घटकर 17,601 इकाई रही।
देश के आठ प्रमुख शहरों में मुंबई की बाज़ार हिस्सेदारी कितनी है?
आठ प्रमुख शहरों में कुल बिकी 2,58,238 इकाइयों में मुंबई की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही, जिससे यह देश का सबसे बड़ा आवासीय बाज़ार बना रहा। नई लॉन्चिंग में मुंबई की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत थी।
मुंबई में औसत आवासीय कीमत अभी कितनी है?
नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की तीसरी तिमाही में मुंबई में भारित औसत आवासीय कीमत सालाना 5 प्रतिशत बढ़कर ₹37,064 प्रति वर्ग फुट हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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