नागपुर की डॉ. श्रुति नीरज सवालाखे बनीं मिसेज यूनाइटेड नेशंस 2026, भारतीय संस्कृति को दिलाई वैश्विक पहचान
सारांश
मुख्य बातें
नागपुर की डॉ. श्रुति नीरज सवालाखे ने नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय पेजेंट में मिसेज यूनाइटेड नेशंस 2026 का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया, जिससे नागपुर और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन हुआ। इस जीत के साथ उन्हें मिसेज यूनाइटेड नेशंस अर्थ का खिताब भी प्रदान किया गया, जो मूलतः ओमान का खिताब है।
प्रतियोगिता का विवरण
डॉ. श्रुति ने बताया कि यह प्रतियोगिता मूल रूप से श्रीलंका में प्रस्तावित थी, किंतु अंततः इसका आयोजन नई दिल्ली में किया गया। इस पेजेंट में रूस, कजाकिस्तान, जापान समेत अनेक देशों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड, इंटरव्यू, टैलेंट राउंड, रैंप वॉक, डिफरेंट कॉस्ट्यूम और सवाल-जवाब सहित कई मापदंडों पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया।
भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व
डॉ. श्रुति ने अपनी वेशभूषा के माध्यम से पूरी भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व किया। उनकी पोशाक में तिरंगा था, भारतीय स्त्री का स्वरूप था और साथ ही वायुसेना, नौसेना तथा थलसेना का भी प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व था। उन्होंने कहा, 'मेरी सोच यह थी कि मैं इस मंच पर पूरी भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत करूं — एक भारतीय स्त्री कैसी होती है, वह प्रेम का प्रतीक कैसे है और संस्कारों के साथ कैसे आगे बढ़ सकती है।'
परिवार की भूमिका और प्रेरणा
डॉ. श्रुति ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति डॉ. नीरज सवालाखे, पिता डॉ. रवि सर्डे और उनका बच्चा — जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियन है — उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी कि मैं भारत का नाम रोशन कर सकूं और मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरा परिवार है।'
महिलाओं के लिए संदेश
डॉ. श्रुति ने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा, 'शादी कोई अंत नहीं है, बल्कि एक बगीचा है जहाँ दो आत्माएँ एक साथ खिलती हैं। अपने सपनों को संजोइए और वह बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।' उनके अनुसार सुंदरता का सही अर्थ खुले विचार, सुंदर हृदय और पवित्र आत्मा है — बाहरी आकर्षण क्षणिक है, जबकि आंतरिक सुंदरता दिल को जीत लेती है।
आगे की तैयारी
डॉ. श्रुति ने संकेत दिया कि वे अब मिसेज वर्ल्ड और मिसेज यूनिवर्स प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुट जाएंगी। उनका लक्ष्य इन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत और नागपुर का झंडा बुलंद करना है। उनकी यह यात्रा उन लाखों भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाते हुए अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं।