नैनीताल में शीतकालीन पर्यटन सीजन की तैयारी: नैनी झील में नावों की मरम्मत शुरू, ₹2.25 लाख तक की लागत
सारांश
मुख्य बातें
नैनीताल में बरसात का मौसम समाप्त होते ही नैनी झील के किनारे नाव चालकों की सक्रियता बढ़ गई है। अक्टूबर 2026 से शीतकालीन पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ ही झील में नौकायान कराने वाली नावों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी है, ताकि पर्यटकों को सुरक्षित और आनंददायक नौकायान का अनुभव मिल सके। नाव चालक समिति के महासचिव नरेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, यह प्रक्रिया हर वर्ष इसी अवधि में संपन्न की जाती है।
मानसून के बाद क्यों जरूरी है मरम्मत
बरसात के दौरान नैनी झील में नौकायन का व्यवसाय अपेक्षाकृत सुस्त रहता है। लगातार वर्षा के कारण नावों की लकड़ी में नमी घुस जाती है और उनमें दरारें आने की आशंका बनी रहती है। नरेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, करीब तीन महीने तक मानसून का असर नौकायन व्यवसाय पर रहता है, जिसके बाद नावों को झील से बाहर निकालकर व्यापक देखभाल की जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार पहाड़ी पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर और मज़बूती से स्थापित करने की कोशिश कर रही है। नैनीताल का शीतकालीन सीजन राज्य के पर्यटन राजस्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मरम्मत की प्रक्रिया
चौहान ने बताया कि मरम्मत की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाती है। सबसे पहले नावों में जमा गंदगी और सिल्ट को साफ किया जाता है। इसके बाद लकड़ी की जाँच होती है और खराब हिस्से को बदल दिया जाता है। दरारों को भरने के लिए अलसी के तेल से तैयार पोटीन का उपयोग किया जाता है। पोटीन लगाने के बाद नावों पर वार्निश की जाती है और उन्हें धूप में सुखाया जाता है।
गौरतलब है कि मरम्मत के बाद नावों को तीन से चार दिन तक पूरी तरह सूखने दिया जाता है। सुरक्षा जाँच पास करने के बाद ही नावों को दोबारा झील में उतारा जाता है।
नाव निर्माण की लागत
चौहान ने बताया कि नैनी झील में उपयोग होने वाली नावों का निर्माण काफी महँगा पड़ता है। एक नई नाव बनाने में लगभग ₹2.25 लाख तक का खर्च आता है। इसमें करीब 8 किलो तांबे की कीलें लगती हैं, जिन्हें दिल्ली से मँगवाया जाता है। तांबे की कीमत लगभग ₹3,000 प्रति किलो होने के कारण निर्माण लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
नाव के आकार और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के अनुसार लागत में अंतर भी संभव है। यह वित्तीय भार नाव चालकों के लिए एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर जब मानसून के तीन महीनों में आय पहले से सीमित रहती है।
पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
नाव चालक समिति के अनुसार, सीजन शुरू होने से पहले प्रत्येक नाव की पूर्ण सुरक्षा जाँच अनिवार्य है। इसका उद्देश्य केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि नैनी झील में आने वाले प्रत्येक पर्यटक की जान-माल की हिफाज़त सुनिश्चित करना है। सरोवर नगरी के रूप में प्रसिद्ध नैनीताल में शीतकालीन महीनों में देश-विदेश से पर्यटकों की भारी आमद होती है, और नौकायान इस अनुभव का अभिन्न हिस्सा है।
आने वाले हफ्तों में सभी नावों के तैयार हो जाने के साथ ही नैनी झील एक बार फिर पर्यटकों की रौनक से भर जाने की उम्मीद है।