नक्सली आंदोलन को बड़ा झटका: 2025 तक 256 माओवादी ढेर, 1562 ने किया सरेंडर

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नक्सली आंदोलन को बड़ा झटका: 2025 तक 256 माओवादी ढेर, 1562 ने किया सरेंडर

सारांश

सुरक्षा बलों ने 2025 में नक्सली गतिविधियों को गंभीर झटका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

Key Takeaways

  • 256 नक्सली मारे गए।
  • 1562 नक्सलियों ने किया सरेंडर।
  • सुरक्षा बलों ने 99 एनकाउंटर किए।
  • आदिवासी क्षेत्रों में शांति और विकास की नई उम्मीद।
  • माओवादी संगठन की शक्ति में कमी।

रायपुर, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुरक्षा बलों ने २०२५ में नक्सली आंदोलन को एक बड़ा झटका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य और पूर्वी भारत में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की गई है।

डेटा से स्पष्ट होता है कि माओवादी संगठन तेजी से कमजोर हो रहा है, जिसका प्रमुख कारण एनकाउंटर में भारी क्षति, बड़े पैमाने पर सरेंडर और महत्वपूर्ण नेतृत्व का समाप्त होना है।

पुलिस और सुरक्षाकर्मियों द्वारा प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने पूरे वर्ष में नक्सलियों के साथ ९९ गंभीर एनकाउंटर किए। इन अभियानों में २५६ नक्सली मारे गए, जबकि ८८४ को गिरफ्तार किया गया।

फोर्स का मनोबल बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि रिकॉर्ड १,५६२ नक्सलियों ने सरेंडर किया। सुरक्षा टीमों ने आतंकवादियों से ६४५ हथियार और ८७५ इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) भी बरामद किए। हालांकि, इन अभियानों की कीमत चुकानी पड़ी; ड्यूटी के दौरान २३ जवान शहीद हो गए। इसके परिणामस्वरूप, नक्सलियों ने साल भर में ४६ बेगुनाह नागरिकों की हत्या की। गैरकानूनी सीपीआई (माओवादी) के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि पिछले डेढ़ साल में बीस से अधिक शीर्ष नक्सल नेता समाप्त हो चुके हैं, जिससे समूह का कमांड स्ट्रक्चर बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

विशेष हताहतों में माडवी हिडमा और माडवी हिडमा उर्फ संतोष – दोनों केंद्रीय समिति के सदस्य; बसवाराजू, जो जनरल सेक्रेटरी और पोलित ब्यूरो के सदस्य थे; जयराम उर्फ चलपति; विवेक उर्फ प्रयाग मांझी; नरसिम्हा चलम उर्फ गौतम; गजराला रवि; मोधेम बालकृष्ण उर्फ भास्कर; सहदेव सोरेन उर्फ प्रयाग; राजू उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी; कोसा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी; और गणेश उर्फ चमारू दादा – सभी केंद्रीय समिति के सदस्य शामिल हैं।

कई दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य भी मारे गए, जिनमें सुधीर उर्फ सुधाकर, कुहादामी जगदीश, रेणुका उर्फ भानु, जंगू नवीन उर्फ मधु, मुंडुगुला भास्कर राव, रणधीर, नीति उर्फ निर्मला, रूपेश, जोगन्ना, दसरू और राजू शामिल हैं। अन्य बड़े नुकसान में भास्कर (मचेरियाल डीवीसी के सचिव) और रेणुका (केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रेस टीम के सदस्य) शामिल हैं।

ये आंकड़े नक्सली संगठन की ऑपरेशनल क्षमता और वैचारिक पकड़ में तेजी से गिरावट का संकेत देते हैं। सैकड़ों कैडर या तो समाप्त हो गए, गिरफ्तार हो गए या सरेंडर करने के लिए तैयार हो गए हैं, और उनकी शीर्ष निर्णय लेने वाली बॉडी बिखर गई है, जिससे कभी मजबूत माओवादी नेटवर्क कमजोर स्थिति में आ गया है।

अधिकारी २०२५ के अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लंबी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देख रहे हैं, जो देश के सबसे अधिक प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में शांति और विकास की नई उम्मीद लेकर आएगा।

Point of View

जिससे आदिवासी क्षेत्रों में स्थिरता और विकास की नई उम्मीद जगती है।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

2025 में कितने नक्सली मारे गए?
२०२५ में २५६ नक्सली मारे गए।
कितने नक्सलियों ने सरेंडर किया?
इस वर्ष रिकॉर्ड १५६२ नक्सलियों ने सरेंडर किया।
नक्सली आंदोलन को यह झटका क्यों लगा?
यह झटका नक्सली संगठन की नेतृत्व हानि और एनकाउंटर में भारी नुकसान के कारण लगा।
सुरक्षा बलों ने कितने एनकाउंटर किए?
सुरक्षा बलों ने पूरे वर्ष में ९९ एनकाउंटर किए।
इस लड़ाई का भविष्य क्या है?
अधिकारी इसे नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानते हैं।
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