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बस्तर की माओवादी समस्या में कमी, 5500 से अधिक कैडर हुए आत्मसमर्पण

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बस्तर की माओवादी समस्या में कमी, 5500 से अधिक कैडर हुए आत्मसमर्पण

सारांश

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी कैडरों की संख्या में अभूतपूर्व कमी आई है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस क्षेत्र को माओवादी प्रभाव से मुक्त करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

मुख्य बातें

बस्तर में माओवादी कैडरों की संख्या में 5,500 की कमी।
लगभग 3,000 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
सुरक्षा बलों ने 525 माओवादियों को मार गिराया।
बस्तर की माओवादी समस्या के समाधान के लिए प्रयास जारी हैं।
सरकार की नीतियों से विकास और विश्वास का माहौल बढ़ा है।

रायपुर, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सशस्त्र माओवादी कैडरों की संख्या में हाल के वर्षों में ५,५०० से अधिक की भारी कमी आई है, जो वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक उल्लेखनीय सफलता है। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कमी ने इस क्षेत्र को इस साल ३१ मार्च तक माओवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त होने के अपने लक्ष्य के और करीब ला दिया है।

मीडिया से बात करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि हाल के दिनों में लगभग ३,००० माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे सशस्त्र कैडरों की संख्या में काफी कमी आई है।

इसके अतिरिक्त, सुरक्षा बलों ने पिछले दो वर्षों में लगभग २,००० माओवादी गुर्गों को गिरफ्तार किया है। कुल मिलाकर, आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों के परिणामस्वरूप सशस्त्र माओवादी कैडरों की ताकत में लगभग ५,००० की कमी आई है।

गृह मंत्री ने आगे बताया कि सुरक्षा बलों ने विभिन्न अभियानों में ५२५ माओवादी तत्वों को मार गिराया है। इस प्रकार, सशस्त्र कैडरों की कुल संख्या में ५,५२५ की कमी आई है।

शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य दोनों सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से, पूरा बस्तर क्षेत्र जल्द ही माओवादी हिंसा की गिरफ्त से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने इस प्रगति को हासिल करने में केंद्र और राज्य सशस्त्र बलों के जवानों द्वारा दिखाए गए साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट की एक श्रृंखला के माध्यम से इस विकास को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सुशासन की निर्णायक नीतियों ने बस्तर में बदलाव की एक नई लहर ला दी है।

'नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति २०२५' के तहत २,८०० से अधिक व्यक्तियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और मुख्यधारा में लौट आए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह दर्शाता है कि विकास और विश्वास की शक्ति किसी भी वैचारिक भटकाव से अधिक शक्तिशाली है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन के प्रसार के साथ बस्तर से माओवाद का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। यह क्षेत्र, जो कभी भय, हिंसा और अलगाव का प्रतीक था, अब आत्मविश्वास के साथ लोकतंत्र, विकास और विश्वास की ओर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार के मजबूत संकल्प और सक्रिय जनभागीदारी ने मिलकर स्थायी शांति के लिए एक ठोस नींव तैयार की है। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को इस बात के एक शक्तिशाली उदाहरण के रूप में वर्णित किया कि कैसे विश्वास स्थायी परिवर्तन ला सकता है।

बस्तर, जिसे लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा है, अब एक अधिक शांतिपूर्ण भविष्य के संकेत दिखा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि निरंतर अभियान और पुनर्वास के प्रयास आने वाले महीनों में इस क्षेत्र से नक्सल समस्या को समाप्त करने में मदद करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बस्तर में माओवादी कैडरों की संख्या में कितनी कमी आई है?
हाल के वर्षों में बस्तर क्षेत्र में माओवादी कैडरों की संख्या में 5,500 से अधिक की कमी आई है।
क्या सरकार ने माओवादी समस्या को समाप्त करने के लिए कुछ किया है?
जी हां, सुरक्षा बलों और सरकार ने आत्मसमर्पण तथा पुनर्वास नीतियों के जरिए माओवादी समस्या को कम करने के लिए कई प्रयास किए हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की संख्या कितनी है?
हाल के दिनों में लगभग 3,000 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
बस्तर का भविष्य कैसा दिखता है?
बस्तर अब एक अधिक शांतिपूर्ण भविष्य की ओर बढ़ रहा है, जहां माओवादी गतिविधियों में कमी आई है।
सरकार की नीतियों का प्रभाव क्या रहा है?
सरकार की नीतियों ने बस्तर में सुशासन और विकास की एक नई लहर ला दी है।
राष्ट्र प्रेस
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