नायब सिंह सैनी का सफर: 1996 में BJP कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर से हरियाणा के मुख्यमंत्री तक
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 21 अगस्त को गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आयोजित 'जेन-एच युवा उद्यमी चौपाल' कार्यक्रम में युवाओं के सामने अपने संघर्षपूर्ण राजनीतिक सफर की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 में जब वह पंचकूला स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन वह हरियाणा के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे।
कंप्यूटर से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक
सैनी ने बताया कि 1996 में तत्कालीन हरियाणा BJP प्रभारी नरेंद्र मोदी ने पंचकूला स्थित पार्टी कार्यालय में एक कंप्यूटर भेजा था। उसी कंप्यूटर को संचालित करने की जिम्मेदारी सैनी को सौंपी गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय उनके मन में मुख्यमंत्री बनने का कोई सपना नहीं था — केवल ईमानदारी से काम करने की लगन थी।
मुख्यमंत्री ने अपने सफर को रेखांकित करते हुए कहा, 'मेरे सफर में कोई लिफ्ट नहीं थी, केवल सीढ़ियां थीं, और कई बार ऐसा भी हुआ जब अगला कदम तक दिखाई नहीं देता था।' यह बयान 4,000 से अधिक संस्थानों में लाइव प्रसारित किया गया।
2009 की हार और उससे मिली सीख
सैनी ने बताया कि राजनीति में प्रवेश के बाद उनकी पहली भूमिका चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि किसी अन्य उम्मीदवार के चुनाव अभियान में रात 2 बजे तक काम करना था। जब वर्ष 2009 में उन्हें स्वयं चुनाव लड़ने का अवसर मिला, तब उनके पास चुनावी खर्च के लिए पर्याप्त धन भी नहीं था। लोगों के सहयोग से वह चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि हार के अगले ही दिन वह दोगुने उत्साह के साथ फिर से जनता के बीच पहुंच गए। उस समय न कोई पद था, न दोबारा टिकट मिलने की कोई गारंटी — फिर भी उन्होंने काम जारी रखा। इसी निरंतरता का परिणाम था कि वर्ष 2014 में उन्हें बड़ी जीत मिली और जनता ने उन्हें विधायक चुना।
युवाओं को संदेश: असफलता पहचान नहीं, सीख है
कार्यक्रम में उपस्थित युवा उद्यमियों ने सैनी से राजनीतिक विरासत के बिना आगे बढ़ने, असफलता से उबरने, स्टार्टअप, नशे की समस्या, रोजगार और सरकारी कामकाज की गति जैसे विषयों पर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने उन्हें सलाह दी कि त्वरित सफलता के पीछे भागने के बजाय निरंतरता, विश्वसनीयता और धैर्य को अपनी असली ताकत बनाएं।
उन्होंने कहा कि असफलता को अपनी पहचान न बनने दें, बल्कि अपने काम को अपनी पहचान बनाएं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवा उद्यमिता और करियर निर्माण को लेकर नई पीढ़ी में असमंजस बढ़ रहा है।
2014 से पहले का दौर और युवाओं की आकांक्षाएं
सैनी ने 2014 से पहले के राजनीतिक माहौल को याद करते हुए कहा कि उस दौर में राजनीति में युवाओं का उपयोग तो किया जाता था, लेकिन यदि कोई युवा आगे बढ़ने की इच्छा रखता था तो उसकी आकांक्षाओं को दबा दिया जाता था। उन्होंने 'जेन-एच' की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ केवल हरियाणा नहीं, बल्कि 'जेन-एचबी' यानी हरियाणा-भारत भी है — और 'जेन-एचबी भारत की धड़कन है।'
सांसद, प्रदेश अध्यक्ष और फिर मुख्यमंत्री
2014 में विधायक बनने के बाद सैनी को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद वह सांसद बने, फिर BJP के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष और अंततः मुख्यमंत्री। उन्होंने कहा कि यह सब जनता के स्नेह, अपनी जिम्मेदारी के प्रति समर्पण और पार्टी द्वारा दिए गए अवसरों का परिणाम है। गौरतलब है कि बिना किसी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि के इस ऊंचाई तक पहुंचना हरियाणा की राजनीति में एक उल्लेखनीय उदाहरण माना जाता है।