अकेले अरविंद की पार्टी बनी AAP — राघव चड्ढा के BJP में जाने पर NDA का तीखा वार
सारांश
Key Takeaways
- राघव चड्ढा समेत AAP के कई सांसदों ने पार्टी छोड़कर 25 अप्रैल 2025 को BJP का दामन थामा।
- BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा — AAP अब 'अकेले अरविंद की पार्टी' बन गई है।
- BJP महासचिव तरुण चुघ ने पंजाब में AAP सरकार पर 'माफिया राज' चलाने का आरोप लगाया।
- JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने राघव चड्ढा के साथ पार्टी के व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
- AAP की स्थापना 2012 में अन्ना आंदोलन से हुई थी, लेकिन अब संस्थापक सदस्यों से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक का पलायन जारी है।
- राजीव रंजन ने तेजस्वी यादव और RJD को राष्ट्रीय स्तर पर अप्रासंगिक करार दिया।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित कई अन्य नेताओं के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने के बाद देशभर में सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने इस घटनाक्रम को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व की विफलता बताते हुए AAP पर जोरदार हमला बोला है।
पूनावाला का तंज — 'अकेले अरविंद की पार्टी'
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि अब 'आम आदमी पार्टी' का वास्तविक अर्थ बदल चुका है — यह पार्टी अब 'अकेले अरविंद की पार्टी' बनकर रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी अपने मूल आदर्शों से पूरी तरह भटक गई है।
पूनावाला ने याद दिलाया कि जो नेता अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की कोख से निकले थे, उन्होंने बदलाव का वादा किया था। लेकिन आज वही नेता VVIP संस्कृति के प्रतीक बन गए हैं और कथित तौर पर 'शीश महल' जैसे आलीशान सरकारी आवास में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को बार-बार भ्रमित करने का यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए।
तरुण चुघ का पंजाब पर बड़ा आरोप
पंजाब के मोहाली में BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी AAP पर प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में AAP सरकार के नाम पर वास्तव में 'माफिया राज' चल रहा है। चुघ ने यह भी कहा कि न्यायालय ने भी केजरीवाल पर भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर टिप्पणियाँ की हैं, जो उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं।
चुघ ने आगे कहा कि AAP के वरिष्ठ नेता अब स्वयं समझ गए हैं कि पार्टी में सही दिशा में काम नहीं हो रहा, इसीलिए वे एक-एक कर पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में AAP पूरी तरह बिखर जाएगी और BJP के नेतृत्व पर देश का विश्वास और मजबूत होगा।
JDU ने राघव चड्ढा के साथ व्यवहार को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इस मामले पर अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा के साथ AAP नेतृत्व ने जो व्यवहार किया, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। चड्ढा एक कुशल और भरोसेमंद रणनीतिकार थे, जिन्होंने पार्टी की हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई।
राजीव रंजन ने कहा कि जब पार्टी नेतृत्व अपने ही सक्षम नेताओं की उपेक्षा करता है, तो परिणाम यही होता है जो आज सामने आ रहा है। यह घटना AAP के आंतरिक लोकतंत्र की खोखली स्थिति को उजागर करती है।
तेजस्वी यादव पर भी JDU का निशाना
राजीव रंजन ने तेजस्वी यादव के पश्चिम बंगाल दौरे पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता खो चुकी है। उनके अनुसार, तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय राजनीति में अब गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
गहरा विश्लेषण — AAP का संकट और बड़ी तस्वीर
गौरतलब है कि AAP की स्थापना 2012 में अन्ना हजारे आंदोलन की नींव पर हुई थी, जिसका मूल वादा था — पारदर्शी, ईमानदार और जन-केंद्रित राजनीति। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के भीतर से ही असंतोष की आवाजें उठती रही हैं। योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण जैसे संस्थापक सदस्यों का पार्टी से बाहर होना और अब राघव चड्ढा जैसे चेहरे का जाना — यह एक क्रमिक विघटन की कहानी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AAP का यह संकट केवल नेताओं के पार्टी छोड़ने तक सीमित नहीं है — यह पार्टी की आंतरिक संरचना और एकाधिकारवादी निर्णय-प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AAP की हार के बाद पार्टी पहले से ही दबाव में है, और अब यह पलायन उस घाव को और गहरा कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP इस राजनीतिक झटके से कैसे उबरती है और क्या केजरीवाल पार्टी को फिर से एकजुट कर पाते हैं।