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एनडीए फ्लोर लीडर्स की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय, विपक्ष के विरोध को जनता तक पहुंचाने की योजना

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एनडीए फ्लोर लीडर्स की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय, विपक्ष के विरोध को जनता तक पहुंचाने की योजना

सारांश

नई दिल्ली में एनडीए के फ्लोर लीडर्स ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के गिरने के बाद महत्वपूर्ण बैठक की। इसमें महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध को उजागर करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्य बातें

महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध उठाने का निर्णय।
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का गिरना।
विरोध प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी देने की योजना।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अस्वीकार होने के बाद सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के फ्लोर लीडर्स ने शुक्रवार को संसद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सदस्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विपक्षी दलों के विरोध को उजागर करेंगे। इस मुद्दे की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने के लिए विरोध प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश फैलाया जाएगा।

सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026; केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 को पेश करने और इन पर चर्चा करने के लिए संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था।

गुरुवार को लोकसभा में प्रस्तुत किए गए और दो दिनों तक जिन पर चर्चा हुई, उनमें 'हाउस ऑफ द पीपल' (लोकसभा) के आकार को बढ़ाने का सुझाव शामिल था। इसके अलावा, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और इस परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का प्रावधान भी था। 'केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) कानून विधेयक' का उद्देश्य पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मामलों में भी ऐसे ही प्रावधानों को लागू करना था।

विपक्ष ने परिसीमन को महिला आरक्षण के कार्यान्वयन से जोड़ने का विरोध किया। शुक्रवार को 528 सदस्यों की उपस्थिति में, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे सरकार को लगभग 54 वोटों की कमी का सामना करना पड़ा।

नतीजों के पश्चात संसदीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पीकर ओम बिरला से निवेदन किया कि वे बाकी दो बिलों पर वोटिंग न करवाएं, क्योंकि ये तीनों बिल आपस में गहरे तौर पर जुड़े हुए थे।

विपक्ष का मूड भांपते हुए केंद्रीय कानून मंत्रालय ने गुरुवार रात 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को अधिसूचित कर दिया। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

हालांकि, यह बिल सितंबर 2023 में ही पारित हुआ था, लेकिन इसे लागू करने के लिए एक नए परिसीमन (सीमा-निर्धारण) अभ्यास से जोड़ा गया था। सरकार ने संबंधित प्रावधानों में संशोधन करने और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे लागू करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए यह नया कानून पेश किया।

गौरतलब है कि पिछली जनगणना 2011 में की गई थी, और अगली जनगणना 2021 में होने वाली थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक क्या है?
यह विधेयक महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पेश किया गया था।
एनडीए के फ्लोर लीडर्स की बैठक में कौन-कौन से मुद्दे पर चर्चा हुई?
बैठक में महिलाओं के सशक्तिकरण और विपक्ष के विरोध को उजागर करने पर चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
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