नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान-साहिल को फांसी की मांग, मेरठ अदालत आज सुनाएगी सजा
सारांश
मुख्य बातें
मेरठ की एक अदालत बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को नीला ड्रम हत्याकांड में दोषी ठहराई गई मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को सजा सुनाएगी। दोनों पर मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या कर उनके शव के टुकड़ों को एक नीले ड्रम में छुपाने का आरोप सिद्ध हो चुका है। पीड़ित परिवार ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने की माँग करते हुए कहा है कि यदि निचली अदालत से संतोषजनक सजा नहीं मिली तो वे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे।
परिवार की पीड़ा और माँग
सौरभ राजपूत की माँ ने कहा कि वह नवरात्र के व्रत और पूजा-पाठ में भी दोषियों को फांसी मिलने की प्रार्थना कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि उन्हें मौत की सजा दी जाए। अगर मौत की सज़ा से भी कोई कड़ी सजा हो, तो उन्हें वही दी जानी चाहिए। मुस्कान और साहिल को जब तक सजा नहीं मिल जाती, तब तक कानून की लड़ाई लड़ेंगे।'
सौरभ के भाई राहुल राजपूत ने बताया कि अदालतों के चक्कर लगाते हुए 15-16 महीने बीत चुके हैं और परिवार शुरू से ही मृत्युदंड के लक्ष्य के साथ यह लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'सजा से बचने के लिए मुस्कान परिवार और बेटी से मिलने का नाटक कर रही है।' राहुल ने स्पष्ट किया कि जब तक दोनों को फांसी नहीं मिलती, तब तक परिवार को चैन नहीं आएगा।
मुस्कान के परिवार की चुप्पी
सजा के दिन जब मीडिया की टीम मुस्कान के घर पहुंची, तो दरवाजे बंद मिले। मुस्कान के माता-पिता ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। बताया गया है कि करीब डेढ़ साल से मुस्कान के माता-पिता ने किसी से सार्वजनिक रूप से बात नहीं की है। जेल में बंद मुस्कान ने जेल प्रशासन से अपनी बेटी और माता-पिता से मिलने तथा परिवार को चिट्ठी लिखने की अनुमति माँगी है।
मामले की पृष्ठभूमि
मार्च 2025 में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल की मदद से पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी। आरोपों के अनुसार, हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें घर में रखे एक नीले ड्रम में भर दिया गया था। 19 मार्च 2025 को पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चित हुआ।
न्यायिक प्रक्रिया का सफर
इस हत्याकांड में जुलाई 2025 में ट्रायल शुरू हुआ था। लगभग 13 महीनों तक चली अदालती बहस में 126 तारीखों के दौरान 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 30 सितंबर 2026 को जिला जज अरविंद कुमार ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को हत्या का दोषी करार दिया था। अब अदालत सजा की मात्रा तय करेगी।
आगे क्या होगा
सजा सुनाए जाने के बाद दोनों पक्षों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध रहेगा। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि निचली अदालत से मृत्युदंड नहीं मिला, तो वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेंगे। यह मामला भारत में वैवाहिक विश्वासघात और साजिशन हत्या के सर्वाधिक चर्चित मामलों में से एक बन चुका है।