सौरभ हत्याकांड मेरठ: वकील का दावा — लंदन से लौटते ही रची गई पूर्वनियोजित हत्या की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृतक परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने दावा किया है कि यह हत्या किसी आवेश में नहीं, बल्कि पूरी तरह पूर्वनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई थी। उनके अनुसार, अभियुक्त साहिल और मुस्कान ने मिलकर सौरभ को रास्ते से हटाने की योजना पहले से तैयार की थी और हत्या से पूर्व उसे बेहोश करने के लिए कथित तौर पर नशीला पदार्थ खाने में मिलाया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से स्वदेश लौटा था। वकील विजय बहादुर के अनुसार, इसके कुछ ही दिनों बाद 3 मार्च को सौरभ अपनी माँ के घर से खाना लेकर आया और उसके तुरंत बाद उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि हत्या से पहले और बाद में अलग-अलग चरणों में तैयारियाँ की गई थीं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि यह कोई सहज अपराध नहीं था।
वकील ने दावा किया कि हत्या से पहले एक विशेष दवा लाई गई थी, जिसे कथित तौर पर सौरभ के खाने में मिलाया गया ताकि उसे बेहोश किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब मामले की सुनवाई 126 तारीखों तक चल चुकी है और अदालत के समक्ष कुल 22 गवाह पेश किए जा चुके हैं।
अदालत की प्रक्रिया और गवाह
जब वकील विजय बहादुर से मामले में लंबी सुनवाई और गवाहों की संख्या पर सवाल किया गया, तो उन्होंने अदालत के रुख पर टिप्पणी करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि न्यायालय का वास्तविक दृष्टिकोण केवल फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा और इससे पहले कोई राय देना उचित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने पूरी सुनवाई शांतिपूर्ण ढंग से की है, दोनों पक्षों को सुना है और दोनों तरफ से प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार किया जा रहा है। गौरतलब है कि इतनी लंबी सुनवाई प्रक्रिया यह दर्शाती है कि मामला कानूनी दृष्टि से अत्यंत जटिल है।
सज़ा के प्रावधान और कानूनी पहलू
वकील ने बताया कि अदालत के सामने सबसे पहला प्रश्न यह होगा कि अभियुक्तों को दोषी ठहराया जाए या नहीं। दोषसिद्धि की स्थिति में इसके बाद सजा के बिंदु पर अलग से सुनवाई होगी। ऐसे गंभीर मामलों में अदालत के समक्ष उम्रकैद और मृत्युदंड जैसे प्रावधानों पर विचार का प्रश्न उठता है।
जब उनसे पूछा गया कि अभियुक्त मुस्कान की छोटी बच्ची को देखते हुए क्या सजा में कोई राहत मिल सकती है, तो विजय बहादुर ने कहा कि यह पूरी तरह अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दोषसिद्धि पर निर्णय आएगा, उसके बाद ही सजा के मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा
मामले में फैसले का इंतजार अब परिवार और कानूनी पक्षों दोनों को है। 126 तारीखों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया और 22 गवाहों की गवाही के बाद अब सुनवाई अपने अंतिम चरण में बताई जा रही है। वकील विजय बहादुर के अनुसार, दोषसिद्धि के बाद सजा के पहलू पर भी गहन बहस होगी, जिसमें मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चतम दंड की माँग की जा सकती है।