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नेपाल सरकार के कस्टम ड्यूटी निर्णय पर स्थानीय लोगों का विरोध

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नेपाल सरकार के कस्टम ड्यूटी निर्णय पर स्थानीय लोगों का विरोध

सारांश

नेपाल सरकार के द्वारा भारत से लाए गए सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले का स्थानीय निवासियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह निर्णय उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा। जानें इस मुद्दे पर क्या हो रहा है।

मुख्य बातें

नेपाल सरकार ने 100 नेपाली रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्णय उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा।
नेपाल-भारत संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
धार्मिक यात्राओं के लिए कस्टम-फ्री सुविधाएं देने का सुझाव दिया गया है।
तस्करी पर नियंत्रण के लिए यह कदम उठाया गया है।

काठमांडू, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल सरकार ने भारत के सीमावर्ती कस्बों से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया है, जिसका विरोध तेज हो गया है। सीमा क्षेत्रों के निवासियों और संबंधित व्यक्तियों का कहना है कि यह कदम उनकी आर्थिक स्थिति को और भी कठिन बना देगा, क्योंकि वे लंबे समय से सस्ते सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं।

सरकार ने इस नियम को लागू करने की प्रक्रिया को सख्त कर दिया है। हालांकि यह प्रावधान पहले से मौजूद था, लेकिन इसे व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण लागू नहीं किया गया था। नई सरकार के इस निर्णय ने स्थानीय समुदाय में नाराजगी को जन्म दिया है।

नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने शनिवार को सरकार से कस्टम नीति में तात्कालिक संशोधन की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि वर्तमान नियम सीमा निवासियों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं।

इस संगठन ने नेपाल और भारत के बीच दीर्घकालिक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का हवाला देते हुए सरकार से व्यवहारिक और जनहित में निर्णय लेने के लिए कहा, ताकि सीमा पार आवाजाही सरल हो सके और लोगों के बीच संबंध मजबूत हों।

उनकी प्रमुख मांगों में 100 नेपाली रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी को समाप्त करने की अपील की गई है। उनका कहना है कि यह नियम विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों को प्रभावित करता है और इसे लागू करना भी कठिन है। इसके बजाय घरेलू उपयोग के सामान पर शून्य शुल्क की मांग की गई है।

संगठन ने सीमा क्षेत्रों में सुव्यवस्थित और सस्ते बाजार विकसित करने की भी मांग की, ताकि लोगों को आवश्यक वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हों। धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं के लिए विशेष कस्टम-फ्री सुविधाएं देने का सुझाव भी दिया गया है, जिसमें श्रद्धालु 48 घंटे तक बिना शुल्क सामान ले जा सकें। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

वहीं, सीमा शुल्क विभाग के निदेशक किशोर बरतौला ने इस नियम के पालन का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम तस्करी पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि तस्कर आम लोगों के माध्यम से छोटे सामान लेकर उन्हें बड़ी मात्रा में इकट्ठा कर बेचते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि 100 रुपये से अधिक के सामान पर शुल्क लगाने से सरकार को ज्यादा राजस्व नहीं मिलता, लेकिन इससे तस्करी पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है। साथ ही, इस सख्ती से नेपाल के सीमावर्ती शहरों के व्यापारियों को भी लाभ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्थानीय लोगों की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कस्टम ड्यूटी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल सरकार ने कस्टम ड्यूटी क्यों लगाई?
नेपाल सरकार ने तस्करी पर नियंत्रण लगाने के लिए भारत से लाए गए सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया है।
इस फैसले का स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
स्थानीय लोग इस निर्णय को अपनी आर्थिक स्थिति के लिए हानिकारक मानते हैं, क्योंकि वे सस्ते सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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