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सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज पर रोक की याचिका खारिज की, पहले से हैं मामले

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सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज पर रोक की याचिका खारिज की, पहले से हैं मामले

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों से पहले मुफ्त सुविधाओं के वादों पर रोक लगाने की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पहले से ही मामले लंबित हैं। यह निर्णय राजनीतिक दलों की चुनावी गतिविधियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की फ्रीबीज पर पहले से मामले लंबित हैं राजनीतिक दलों के वादों की पारदर्शिता पर सवाल चुनाव आयोग से सख्ती से कार्रवाई की उम्मीद सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोकने की आवश्यकता

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चुनावों से पहले राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाओं जैसे 'फ्रीबीज' के वादों पर रोक लगाने की मांग की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस विषय से संबंधित अन्य याचिकाएं पहले से ही लंबित हैं, इसीलिए वह इस नई याचिका पर अलग से सुनवाई नहीं करेगा।

यह याचिका इस तर्क पर दायर की गई थी कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा सरकारी धन का उपयोग कर मुफ्त सुविधाओं का वादा करना उचित नहीं है और इसे भ्रष्ट आचरण माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह के वादे मतदाताओं को प्रभावित करते हैं और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह खड़ा करते हैं।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले ऐसे वादों पर सख्ती से रोक लगाए। इसके साथ ही, जो दल इन नियमों का उल्लंघन करें, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, याचिका में यह सुझाव दिया गया था कि राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणापत्र के साथ यह स्पष्ट करें कि वे जिन मुफ्त योजनाओं का वादा कर रहे हैं, उनके लिए पैसा कहां से आएगा।

एक और महत्वपूर्ण मांग यह थी कि इन घोषणाओं का ऑडिट भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से कराया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो और वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि चूंकि इसी विषय से जुड़े मामले पहले से अदालत में लंबित हैं, इसलिए इस पर अलग से सुनवाई करना उचित नहीं होगा। कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब यह स्पष्ट है कि 'फ्रीबीज' के मुद्दे पर आगे की सुनवाई पहले से लंबित याचिकाओं के आधार पर ही होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। कोर्ट का यह कदम राजनीतिक दलों के वादों पर सवाल उठाता है, जिससे लोकतंत्र की नींव मजबूत होती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को क्यों खारिज किया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे से संबंधित अन्य याचिकाएं पहले से ही लंबित हैं, इसलिए इस नई याचिका पर अलग से सुनवाई नहीं की जा सकती।
याचिका में क्या मांग की गई थी?
याचिका में चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों के मुफ्त वादों पर रोक लगाने और उनके ऑडिट की मांग की गई थी।
फ्रीबीज का क्या मतलब है?
फ्रीबीज का अर्थ है चुनावों से पहले राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को मुफ्त सुविधाएं या लाभ देने के वादे।
इस फैसले का क्या प्रभाव हो सकता है?
इस फैसले से राजनीतिक दलों के चुनावी वादों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर असर पड़ेगा, जो भविष्य के चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या चुनाव आयोग इस मामले में कुछ करेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि वह राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले वादों पर सख्ती से रोक लगाए।
राष्ट्र प्रेस
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