क्या झारखंड सीजीएल में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया?
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का निर्णय सही ठहराया।
- सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी।
- पेपर लीक के आरोपों पर उदारता से विचार किया गया।
- विशेष जांच टीम को जांच जारी रखने का निर्देश।
- भविष्य में पारदर्शिता का संकेत।
रांची, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की सीजीएल (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) परीक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और सफल अभ्यर्थियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ द्वारा की गई। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि झारखंड हाईकोर्ट का फैसला सही और संतुलित है, इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अपीलकर्ताओं की याचिका भी खारिज कर दी गई।
गौरतलब है कि इससे पहले 3 दिसंबर को झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 10 संदिग्ध अभ्यर्थियों के परिणाम पर रोक लगाते हुए शेष सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुमति दी थी। अदालत ने जेएसएससी को आगे की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जेएसएससी ने मेरिट लिस्ट जारी की और राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए थे।
हाईकोर्ट ने पेपर लीक के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि जिन अभ्यर्थियों पर पेपर लीक में शामिल होने की आशंका है या जिन्हें आरोपी बनाया गया है, उनका परिणाम जारी नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को भी खारिज कर दिया था।
अदालत ने कहा था कि यह मामला सीबीआई को सौंपने योग्य नहीं है। हालांकि, पूरे प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम को जांच जारी रखने और छह महीने के भीतर उसे पूरा करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सफल अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने बहस की थी।