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क्या लश्कर-ए-तैयबा भर्ती मामले में सैयद एम इदरीस को एनआईए कोर्ट से 10 साल की सजा मिली?

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क्या लश्कर-ए-तैयबा भर्ती मामले में सैयद एम इदरीस को एनआईए कोर्ट से 10 साल की सजा मिली?

सारांश

लश्कर-ए-तैयबा भर्ती मामले में एनआईए कोर्ट ने सैयद एम इदरीस को 10 साल की सजा देकर आतंकवाद के खिलाफ सख्ती दिखाई है। क्या यह कार्रवाई अन्य आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ भी सख्ती का संकेत है?

मुख्य बातें

सैयद एम इदरीस को 10 साल की कठोर सजा मिली।
यह मामला लश्कर-ए-तैयबा की भर्ती से संबंधित है।
एनआईए ने सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथीकरण की जांच की।
पाकिस्तान के फरार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
एनआईए ने आतंकवादी नेटवर्क पर सख्त निगरानी रखने का आश्वासन दिया है।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विशेष अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के भर्ती और कट्टरपंथीकरण से जुड़े एक मामले में सैयद एम इदरीस को 10 साल की कठोर सजा सुनाई है। यह मामला पश्चिम बंगाल में मुस्लिम युवाओं की भर्ती कर उन्हें इस प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जोड़ने और भारत सरकार के खिलाफ जिहाद के लिए उकसाने से संबंधित है।

एनआईए की विशेष अदालत ने उत्तर कन्नड़ जिले के निवासी सैयद एम इदरीस को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं के तहत दोषसिद्धि करते हुए अधिकतम 10 वर्ष की कठोर सजा देने के साथ-साथ 70 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

प्रेस नोट के अनुसार, एनआईए ने यह मामला अप्रैल 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस से अपने हाथ में लिया था। जांच के दौरान, एजेंसी ने सैयद एम इदरीस को जम्मू-कश्मीर के अल्ताफ अहमद राठर के साथ गिरफ्तार किया था। दोनों ने मिलकर तानिया परवीन के साथ साजिश रची, जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को भर्ती करना और लश्कर-ए-तैयबा का एक मॉड्यूल बनाना था। तानिया परवीन को मार्च 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जब एसटीएफ ने पुख्ता खुफिया सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चलाया था।

एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बनाया जा रहा था। इस नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से बताया गया है।

इसके बाद, एनआईए ने सितंबर 2020 और मई 2021 में इस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित दो फरार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। फरार आरोपियों की पहचान आयशा और बिलाल के रूप में हुई है।

एनआईए ने स्पष्ट किया कि वह आतंकी संगठनों से जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों पर निगरानी रखे हुए है और ऐसे मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस मामले में सजा का निर्णय आतंकवाद के खिलाफ हमारी दृढ़ता को दर्शाता है। यह समय की मांग है कि हम इस प्रकार की गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई करें। हमें युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देना होगा ताकि वे इस प्रकार के संगठनों के प्रभाव में न आएं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैयद एम इदरीस को कितने साल की सजा मिली?
सैयद एम इदरीस को एनआईए कोर्ट ने 10 साल की कठोर सजा सुनाई है।
यह मामला किससे संबंधित है?
यह मामला लश्कर-ए-तैयबा की भर्ती और कट्टरपंथीकरण से संबंधित है।
एनआईए ने कब यह मामला अपने हाथ में लिया?
एनआईए ने यह मामला अप्रैल 2020 में अपने हाथ में लिया था।
तलाशी के दौरान क्या बरामद किया गया?
तलाशी के दौरान जिहादी पाठ्यपुस्तकों सहित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।
एनआईए की आगे की योजना क्या है?
एनआईए आतंकवादी संगठनों से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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