एनआईए कोर्ट का फैसला: एनएससीएन (आईएम) के हथियार तस्कर थाई नागरिक को 6 साल कैद, ₹5 लाख जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को नगा उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड – इसाक-मुइवा (एनएससीएन-आईएम) की अंतरराष्ट्रीय हथियार खरीद साजिश में अहम भूमिका निभाने वाले थाई नागरिक विली नारुएनार्टवानिच को छह साल की सज़ा-ए-कैद और ₹5 लाख के जुर्माने से दंडित किया। राऊज एवेन्यू स्थित एक्सक्लूसिव कोर्ट-03 का यह आदेश उस मामले में निर्णायक मोड़ है, जिसकी जड़ें 13 जनवरी 2010 को दर्ज एनआईए की प्रारंभिक जाँच में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
24 सितंबर को कोर्ट ने नारुएनार्टवानिच को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 122 (भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध की तैयारी) तथा गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम — यूएपीए की धारा 18 के अंतर्गत दोषी ठहराया था। 8 अक्टूबर को सज़ा सुनाई गई।
गौरतलब है कि इस मामले की जाँच गृह मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शुरू की थी, जो एनएससीएन(आईएम) की विदेशी हथियार नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों की पड़ताल कर रही थी।
तस्करी नेटवर्क का स्वरूप
जाँच के अनुसार, बैंकॉक में रहने वाले व्यवसायी नारुएनार्टवानिच (उर्फ वुथिकॉर्न नारुएनार्टवानिच, उर्फ विली) ने इस हथियार खरीद नेटवर्क में बिचौलिए और मुख्य साजिशकर्ता की भूमिका निभाई। उसने एनएससीएन(आईएम) के प्रमुख हथियार खरीदार एंथनी शिमरे के साथ समन्वय किया और चीनी हथियार एवं गोला-बारूद कंपनी के प्रतिनिधियों से वार्ता में सक्रिय भाग लिया।
प्रस्तावित खरीद और ट्रांसशिपमेंट व्यवस्था की कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर आँकी गई थी। इन हथियारों का उद्देश्य संगठन के सशस्त्र कैडरों को मज़बूत करना, आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना और भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न करना था।
एनएससीएन(आईएम) और हथियार साजिश की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब नगालैंड में शांति प्रक्रिया वर्षों से जारी है। एनएससीएन(आईएम) भारत सरकार के साथ संघर्षविराम समझौते में रहते हुए भी कथित तौर पर अपनी सैन्य क्षमता बनाए रखने के प्रयास करता रहा है। यह मामला उसी द्वंद्व का एक ठोस उदाहरण है — एक ओर बातचीत की मेज़, दूसरी ओर विदेशी हथियार नेटवर्क।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनआईए ने किसी उत्तर-पूर्व उग्रवादी संगठन की हथियार खरीद श्रृंखला में विदेशी कड़ी को उजागर किया हो। इस फैसले के साथ एनआईए ने दिखाया है कि ऐसे नेटवर्क में विदेशी नागरिकों पर भी भारतीय न्यायिक प्रक्रिया लागू हो सकती है।
सज़ा का महत्व
यह दोषसिद्धि और सज़ा एनआईए की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें उग्रवाद के वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क को कमज़ोर करने पर ज़ोर दिया जाता है। यूएपीए के तहत आतंकवाद से जुड़ी साजिश में किसी विदेशी नागरिक को सज़ा सुनाया जाना भारतीय आतंकवाद-रोधी कानून की व्यापक पहुँच का प्रमाण माना जा रहा है।
आगे क्या
मामले में अन्य आरोपियों की सुनवाई अभी जारी है। एनआईए की जाँच के अनुसार, इस नेटवर्क में कई और कड़ियाँ हैं जिनकी पड़ताल अभी भी चल रही है। इस फैसले के बाद एनएससीएन(आईएम) पर कूटनीतिक और सुरक्षा दबाव और बढ़ने की संभावना है।