क्या दिसंबर से बंगाल में निपाह वायरस के केवल 2 मामले सामने आए हैं?
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के केवल दो मामले हैं।
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने निगरानी बढ़ाई है।
- भ्रामक रिपोर्टों पर ध्यान देना जरूरी है।
- निपाह एक जूनोटिक संक्रमण है।
- कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पिछले दिसंबर से अब तक पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस बीमारी के केवल दो मामलों की पुष्टि हुई है।
मंत्रालय ने मीडिया में निपाह वायरस के संबंध में चल रही अटकलों और गलत आंकड़ों पर चिंता व्यक्त की है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि कई रिपोर्टें भ्रामक हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इन दो पुष्ट मामलों के संपर्क में आए कुल 196 लोगों की पहचान की गई। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने सभी की निगरानी की और जांच कराई। किसी में भी बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए और सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन दो मामलों के अलावा अब तक निपाह वायरस का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। मामलों की पुष्टि के बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर तय स्वास्थ्य नियमों के तहत तुरंत आवश्यक कदम उठाए। निगरानी बढ़ाई गई और केंद्र और राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियों ने मिलकर लैब जांच और फील्ड जांच जैसे उपाय किए, जिससे स्थिति को समय पर काबू में रखा जा सका।
मंत्रालय ने कहा कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय किए गए हैं। मंत्रालय ने जनता और मीडिया से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी की गई और पुष्टि की गई जानकारी पर भरोसा करें और बिना पुष्टि या अनुमान पर आधारित खबरें न फैलाएं।
निपाह एक जूनोटिक संक्रमण है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है और फिर इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के लार, पेशाब और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है।
यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) से फैलता है और गंभीर सांस की बीमारी व दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है। फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।