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निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में मिला, चाय की दुकान में फंदे से लटकी मिली लाश

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निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में मिला, चाय की दुकान में फंदे से लटकी मिली लाश

सारांश

निठारी हत्याकांड में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली को बरी किया था। अब रिहाई के महज कुछ महीनों बाद ही उनका शव हरिद्वार की एक चाय दुकान में फंदे से लटका मिला है — एक ऐसे जीवन का अंत जो दो दशक कठघरे में रहा।

मुख्य बातें

सुरेंद्र कोली का शव 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में उनकी चाय दुकान में फंदे से लटका मिला।
घटनास्थल सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने बताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को कोली को निठारी कांड के सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया था।
जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा था कि साक्ष्य पर्याप्त नहीं और जाँच में गंभीर खामियाँ थीं।
कोली मूल रूप से अल्मोड़ा के भिकियासैंण क्षेत्र के ग्राम मंगरुखाल का निवासी था।
सप्तऋषि पुलिस चौकी ने शव कब्जे में लेकर जाँच शुरू की; परिजनों को सूचित किया गया।

निठारी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए गए सुरेंद्र कोली का शव 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में स्थित उनकी चाय की दुकान से बरामद किया गया। शव के गले में फंदा पड़ा था और यह घटना सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने की बताई जा रही है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया है और सभी पहलुओं की जाँच शुरू कर दी है।

घटनाक्रम का विवरण

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहा था। उसका शव रस्सी के सहारे दुकान के भीतर लटका पाया गया। सूचना मिलते ही सप्तऋषि पुलिस चौकी की टीम तत्काल मौके पर पहुँची और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस के मुताबिक कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के ग्राम मंगरुखाल का निवासी था।

उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस का कहना है कि मृत्यु के कारणों और परिस्थितियों की पूरी जाँच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा गया है।

सुप्रीम कोर्ट से बरी होने का इतिहास

सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को निठारी हत्याकांड से जुड़े मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2011 के पुनर्विचार फैसले को वापस लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को भी रद्द कर दिया था।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि कोली के खिलाफ साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं और जाँच में गंभीर खामियाँ रही हैं — इसलिए न्याय के हित में उसे बरी किया जाता है। 2011 में एक मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई थी, जिसे भी उक्त फैसले में पलट दिया गया था।

निठारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि

वर्ष 2006 में सामने आया निठारी हत्याकांड पूरे देश को हिला देने वाला था। नोएडा के निठारी गाँव में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे स्थित नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल बरामद हुए थे। इस कांड ने न केवल पुलिस तंत्र बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।

मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी, जिसने कई मामलों में चार्जशीट दाखिल की। पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली दोनों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि कोली बच्चों और महिलाओं को बहला-फुसलाकर लाता था, उनके साथ दुष्कर्म करता और फिर हत्या कर शवों को नाले में फेंक देता था। हालाँकि बाद में अदालतों ने 13 में से 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया था।

रिहाई के बाद का जीवन और अब मृत्यु

गौरतलब है कि करीब दो दशक के कानूनी संघर्ष और लंबी जेल-यात्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में एक साधारण जीवन अपनाने की कोशिश की थी। उसके हाल के दिनों में चाय की दुकान चलाने की बात आसपास के लोगों ने भी स्वीकार की है। उसकी मृत्यु ऐसे समय में हुई है जब निठारी कांड को लेकर न्याय की लंबी लड़ाई का एक अध्याय अभी-अभी खत्म हुआ था।

पुलिस द्वारा जाँच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु की वजह स्पष्ट हो पाएगी। परिजनों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दो दशक जेल में बिताने वाले व्यक्ति को समाज और राज्य किस रूप में वापस लेते हैं? रिहाई के बाद एक चाय की दुकान तक सीमित हो जाना और फिर इस तरह का अंत — यह केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि उस पुनर्वास-शून्य व्यवस्था का आईना है जो न्यायिक बरी के बाद भी खड़ी नहीं होती। मृत्यु के कारणों की जाँच जितनी ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी यह जानना भी है कि बरी होने के बाद उसे किसी भी सरकारी या सामाजिक सहायता का लाभ मिला या नहीं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरेंद्र कोली का शव कहाँ और कैसे मिला?
सुरेंद्र कोली का शव 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने उनकी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला। सप्तऋषि पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लेकर जाँच शुरू की।
सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने कब और क्यों बरी किया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ के माध्यम से कोली को सभी आरोपों से बरी किया था। कोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे और जाँच में गंभीर खामियाँ रही थीं।
निठारी हत्याकांड क्या था?
वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल बरामद हुए थे। इस मामले में पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था और जाँच CBI को सौंपी गई थी।
सुरेंद्र कोली पर कितने मामले थे और उनका क्या हुआ?
कोली पर कुल 13 मामलों में आरोप लगाए गए थे। समय के साथ 12 मामलों में उन्हें बरी किया गया, जबकि एक मामले में 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी थी। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को भी पलटते हुए कोली को पूरी तरह बरी कर दिया।
अब पुलिस क्या कर रही है?
हरिद्वार पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है और कोली के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाँच के बाद मृत्यु के सटीक कारण स्पष्ट होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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