निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में मिला, चाय की दुकान में फंदे से लटकी मिली लाश
सारांश
मुख्य बातें
निठारी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए गए सुरेंद्र कोली का शव 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में स्थित उनकी चाय की दुकान से बरामद किया गया। शव के गले में फंदा पड़ा था और यह घटना सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने की बताई जा रही है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया है और सभी पहलुओं की जाँच शुरू कर दी है।
घटनाक्रम का विवरण
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहा था। उसका शव रस्सी के सहारे दुकान के भीतर लटका पाया गया। सूचना मिलते ही सप्तऋषि पुलिस चौकी की टीम तत्काल मौके पर पहुँची और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस के मुताबिक कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के ग्राम मंगरुखाल का निवासी था।
उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस का कहना है कि मृत्यु के कारणों और परिस्थितियों की पूरी जाँच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा गया है।
सुप्रीम कोर्ट से बरी होने का इतिहास
सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को निठारी हत्याकांड से जुड़े मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2011 के पुनर्विचार फैसले को वापस लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को भी रद्द कर दिया था।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि कोली के खिलाफ साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं और जाँच में गंभीर खामियाँ रही हैं — इसलिए न्याय के हित में उसे बरी किया जाता है। 2011 में एक मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई थी, जिसे भी उक्त फैसले में पलट दिया गया था।
निठारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि
वर्ष 2006 में सामने आया निठारी हत्याकांड पूरे देश को हिला देने वाला था। नोएडा के निठारी गाँव में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे स्थित नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल बरामद हुए थे। इस कांड ने न केवल पुलिस तंत्र बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।
मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी, जिसने कई मामलों में चार्जशीट दाखिल की। पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली दोनों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि कोली बच्चों और महिलाओं को बहला-फुसलाकर लाता था, उनके साथ दुष्कर्म करता और फिर हत्या कर शवों को नाले में फेंक देता था। हालाँकि बाद में अदालतों ने 13 में से 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया था।
रिहाई के बाद का जीवन और अब मृत्यु
गौरतलब है कि करीब दो दशक के कानूनी संघर्ष और लंबी जेल-यात्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में एक साधारण जीवन अपनाने की कोशिश की थी। उसके हाल के दिनों में चाय की दुकान चलाने की बात आसपास के लोगों ने भी स्वीकार की है। उसकी मृत्यु ऐसे समय में हुई है जब निठारी कांड को लेकर न्याय की लंबी लड़ाई का एक अध्याय अभी-अभी खत्म हुआ था।
पुलिस द्वारा जाँच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु की वजह स्पष्ट हो पाएगी। परिजनों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।