क्या नीतीश के संपत्ति खुलासे की सराहना करते हुए राजीव रंजन प्रसाद ने कांग्रेस और टीएमसी पर निशाना साधा?
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का संपत्ति खुलासा पारदर्शिता का उदाहरण है।
- राजीव रंजन प्रसाद ने नेताओं को सीखने का अवसर दिया।
- कांग्रेस की स्वीकार्यता में कमी चिंता का विषय है।
- टीएमसी की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है।
- राजनीतिक पारदर्शिता की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पटना, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अपनी संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण सभी नेताओं के लिए सीखने का अवसर है।
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, "यह आज के नेताओं के लिए, जो लालच और धन संग्रह की चाह रखते हैं, एक महत्वपूर्ण सबक है। नीतीश कुमार को जनता का भरोसा और आशीर्वाद इसलिए मिलता है क्योंकि वे निजी संपत्ति से जुड़े नहीं हैं और उन्होंने अपने पद का कभी गलत इस्तेमाल नहीं किया। आज के नेताओं को इस उदाहरण से प्रेरणा लेनी चाहिए।"
जदयू प्रवक्ता ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा हाल ही में सरकार पर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। हाल ही में पार्टी को राज्यों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की जनता में स्वीकार्यता कम होने के कारण, खड़गे बौखलाहट में रटे हुए तर्कों के साथ बयान देते रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी अपनी कमियों को समझने में असफल रहती है, तो आने वाले समय में उसकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
टीएमसी और अभिषेक बनर्जी के बयानों पर जदयू प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने कथित "वोट चोरी" के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का प्रयास किया, जिसके लिए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को बिहार में इकट्ठा किया। अब पश्चिम बंगाल में टीएमसी और अन्य विपक्षी पार्टियां वही करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन जनता ममता बनर्जी से मुक्ति चाहती है, इसलिए टीएमसी की सत्ता में वापसी नहीं होगी।
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सलाह दी कि अगर उनके पास सबूत हैं, तो तथ्यों के साथ अपने बीएलए के जरिए औपचारिक शिकायत दर्ज करें। बिहार में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से की गई थी। जब वोटर लिस्ट जारी हुई, तब राहुल गांधी कोलंबिया में थे और उन्हें पता था कि बिहार में कोई गड़बड़ी नहीं है। इसलिए उन्होंने देश में रहना उचित नहीं समझा।"